Published : Jan 24, 2020, 11:37 AM ISTUpdated : Jan 24, 2020, 11:52 AM IST
नई दिल्ली. गणतंत्र दिवस के लिए गुरुवार को फुल ड्रेस रिहर्सल हुई। पूरी परेड को ठीक वैसे ही किया गया, जैसे 26 जनवरी को की जाएगी। इस बार की परेड में सबसे आकर्षण का केंद्र चिनूक और अपाचे हेलीकॉप्टर होंगे, जो पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में फ्लाई पास्ट में हिस्सा लेंगे। चिनूक हेलीकॉप्टर को भारतीय वायुसेना की जान कहा जाता है। इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल 19 देशों की सेनाएं करती हैं। मौजूदा वक्त में भारतीय वायुसेना अपने अभियानों के लिए एमआई-26 एस का इस्तेमाल करती है।
चिनूक बहुत तेजी से उड़ान भरने में सक्षम है - सेना अब तक जिन हेलीकॉप्टर को उड़ाती रही है उसमें सिंगल रोटर इंजन होता था लेकिन चिनूक हेलीकॉप्टर में दो रोटर इंजन लगे हैं यह बहुत ही नया कन्सेप्ट है जो इंडियन एयरफोर्स को और मजबूत बनाता है। चिनूक हेलीकॉप्टर बहुत तेजी से उड़ान भरने में सक्षम है।
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घनी पहाड़ियों में आसानी से काम करता है - यह बेहद घनी पहाड़ियों में भी आसानी से काम कर सकता है। हेलीकॉप्टर किसी भी तरह के मौसम का सामना करने के साथ ये छोटे हेलीपैड और घनी घाटियों में भी उतर सकता है।
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ऊंचे और दुर्गम इलाकों में भारी-भरकम सामान ले जाने में सक्षम - इस हेलीकॉप्टर की मदद से भारतीय वायुसेना ऊंचे और दुर्गम इलाकों में बेहद भारी भरकम सामान ले जाने में सक्षम है, ये लगभग 11 टन तक का भार उठा सकता है।
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फ्लाइंग रेंज 550 किमी. है, पौने तीन घंटे तक उड़ सकता है - इसकी फ़्लाइंग रेंज क़रीब 550 किलोमीटर है। ये एक बार में पौने तीन घंटे तक उड़ सकता है। इसका निशाना बहुत सटीक है जिसका सबसे बड़ा फायदा होता है युद्ध क्षेत्र में, जहां दुश्मन पर निशाना लगाते वक्त आम लोगों को नुकसान नहीं पहुंचता है।
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अपाचे रडार की नजर से बचने में माहिर है - अपाचे हेलिकॉप्टर का डिज़ाइन ऐसा है कि इसे रडार पर पकड़ना मुश्किल होता है। इससे सुरक्षा पर पर कोई नुकसान नहीं आता है। अपाचे में सबसे खतरनाक हथियार 16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता का है। हेलिकॉप्टर के नीचे लगी राइफल में एक बार में 30एमएम की 1,200 गोलियाँ भरी जा सकती हैं।
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280 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकता है - अपाचे 280 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तक उड़ाया जा सकता है। ये करीब 16 फुट ऊंचा और 18 फुट चौड़ा होता है। अपाचे हेलिकॉप्टर को उड़ाने के लिए दो पायलट होना जरूरी है। इसके बड़े विंग को चलाने के लिए दो इंजन होते हैं, इस वजह से इसकी रफ़्तार बहुत ज्यादा है।
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