Published : Aug 14, 2021, 03:32 PM ISTUpdated : Feb 05, 2022, 03:25 PM IST
नई दिल्ली. 14 अगस्त, 1947; ये वो मनहूस दिन था, जब एक मुल्क को भारत और पाकिस्तान; दो टुकड़ों में बांट दिया गया था। इससे भी बड़ी त्रासदी बंटवारे (India Pakistan partition) के दौरान पाकिस्तान से भारत और भारत से पाकिस्तान जाने वालों के साथ अमानवीय-हिंसक बर्ताव था। हजारों लोग साम्प्रदायिक हिंसा में दफन हो गए। वे न इधर के रहे और न उधर के। हजारों महिलाओं की आबरू लूट ली गई। यह दर्द कभी नहीं भुलाया जा सकता है। ऐसी हजारों तस्वीरें मौजूद हैं आज भी लोगों के रौंगटे खड़े कर देती हैं। बंटवारा एक त्रासदी थी, जिस पर प्रधानमंत्री दु:खी हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को बंटवारे को एक भीषण त्रासदी बताते हुए हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस(PartitionHorrorsRemembranceDay) के तौर पर मनाने का ऐलान किया है। इसका मकसद ऐसी घटनाएं दुबारा न हों। देखें कुछ तस्वीरें...
भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान करोड़ लोग इधर से उधर और उधर से इधर हुए। इस दौरान जो हिंसा हुई, उसमें 10 लाख लोग मारे गए। करीब 1.45 करोड़ शरणार्थियों ने अपना घर-बार छोड़कर अपने-अपने सम्प्रदाय बहुल देशों में शरण ली।
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15 अगस्त 1947 की आधी रात को भारत और पाकिस्तान कानूनी तौर पर दो स्वतंत्र देश बने थे। पाकिस्तान ने अपने बंटवारे की प्रक्रिया 14 अगस्त को कराची में की थी, ताकि आखिरी ब्रिटिश वाइसरॉय लुइस माउंटबेटन करांची और नई दिल्ली दोनों जगह के कार्यक्रमों में शामिल हो सकें।
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अंग्रेजों ने हमेशा से ही फूट डालो और राज्य करो की नीति को अपनाया। वे हिंदूओं और मुसलमानों दोनों को एक-दूसरे से लड़वाते रहते थे।
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बंटवारे से पहले 1906 में ढाका में मुस्लिम नेताओं ने मुस्लिम लीग की स्थापना की थी। 1930 में मुस्लिम लीग के सम्मेलन में प्रसिद्ध उर्दू कवि मुहम्मद इक़बाल ने अपने भाषण में पहली बार मुसलमानों के लिए एक अलग राज्य की मांग उठाई थी।
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लाहौर में 1940 के मुस्लिम लीग सम्मेलन में जिन्ना ने साफ कह दिया था कि वे बंटवारे के बाद दो अलग राष्ट्र चाहते हैं।
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हिन्दू महासभा जैसे हिन्दू संगठनों को बंटवारा कभी रास नहीं आया। वे हमेशा इसके विरोधी रहे। 1937 में इलाहाबाद में हिन्दू महासभा के सम्मेलन में विनायक दामोदर सावरकर ने अपने भाषण में कहा कहा था कि आज के दिन भारत एक राष्ट्र नहीं है, यहां पर दो राष्ट्र हैं-हिन्दू और मुसलमान।
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22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया था। तब पूर्व माउंटबेटन ने भारत से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपये की राशि देने को कहा था। हालांकि सरकार इसके पक्ष में नहीं थी, लेकिन महात्मा गांधी अनशन पर बैठ गए और सरकार को झुकना पड़ा।
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आरोप है कि अंग्रेजों ने जानबूझकर बंटवारे की प्रक्रिया ठीक से नहीं निभाई। यही वजह रही कि दंगे हुए। लाखों लोगों को मारा गया।
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भारत की जनगणना 1951 के अनुसार बंटवारे के तत्काल बाद तक 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गए। वहीं, 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए थे। इसमें से भी सबसे अधिक आना-जाना 78% पंजाब से हुआ था।
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भारत और पाकिस्तान का विभाजन 18वीं सदी में यूरोप, एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व हुए दूसरे विभाजनों में से एक था। हर विभाजन में हिंसा हुई, लेकिन जो तांडव भारत-पाक बंटवारे में देखने को मिला, वैसा कहीं नहीं।
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भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दौरान सबसे अधिक दंगे बंगाल, बिहार और पंजाब में हुए थे। यहीं अकेले 2.50 लाख से अधिक लोग मारे गए थे। जब दंगों को रोकने महात्मा गांधी बंगाल के नोआखली में अनशन पर बैठ गए थे।
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बंटवारे के दौरान 1 लाख से अधिक महिलाओं का किडनैप करके रेप और हत्या कर दी गई। कइयों के साथ जबरन शादियां या निकाह किए गए।
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बंटवारे से पहले भारत की जनसंख्या 31.8 करोड़ थी। 1941 की जनगणना के हिसाब से तब हिंदूओ की संख्या 29.4 करोड़ और मुसलमानों की संख्या 4.3 करोड़ थी। बाकी दूसरे धर्म के लोग। मुस्लिम नेता हिंदूओं की इसी आबादी के चलते अलग राष्ट्र की मांग पर अड़ गए थे।
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भारत-पाक बंटवारे का दर्द आज भी कई परिवार झेल रहे हैं। अंग्रेजों का 'फूट डालो और राज्य करो' षड्यंत्र इस बंटवारे की वजह बना। मौलाना आजाद और खान अब्दुल गफ़्फ़ार खान बंटवारा नहीं चाहते थे। लेकिन बाद में उनकी एक न चली।
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भारत का बंटवारा माउंटबेटन योजना के तहत भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के आधार पर किया गया था। इसी दौरान ब्रिटिश भारत में से सीलोन (श्रीलंका) और बर्मा (म्यांमार) को भी अलग किया गया था। हालांकि इसे भारत के विभाजन में शामिल नहीं किया जाता है।
(फोटो क्रेडिट - LIFE, BBC और सोशल मीडिया)
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