15 दिन की बच्ची के सिर से उठ गया पिता का साया, दंगाईयों ने दी दर्दनाक मौत

Published : Feb 29, 2020, 12:08 PM IST

नई दिल्ली. नागरिका संशोधन कानून को लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए हिंसा में मरने वालों की संख्या 42 तक पहुंच गई है। जबकि 200 से अधिक लोग घायल भी हैं। 3 दिन हुए जमकर हिंसा के बाद अब दिल्ली अमन-चैन वापस लौट आया है। वहीं, इस मामले की पुलिस जांच कर रही है। इन सब के बीच हर दिन नए-नए राज सामने आ रहे हैं। कहीं नालों से लाशें मिल रही हैं तो कहीं जले घरों और गाड़ियों से शव बरामद किए जा रहे हैं। 

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15 दिन की बच्ची के सिर से उठ गया पिता का साया, दंगाईयों ने दी दर्दनाक मौत
गुरुवार को गुरु तेग बहादुर अस्पताल से 35 साल के मुदस्सर खान के शव की पहचान हुई, जिनकी मौत दिल्ली दंगे के दौरान हुई थी। करीब दो हफ्ते पहले जिस घर में एक छोटी बच्ची की किलकारी गूंजने से खुशियों का शोर था, अब वहां मातम छाया हुआ है।
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8 बेटियां, सबसे छोटी 15 दिन की मासूमः मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार को मुदस्सर खान की पत्नी इमराना अपनी 15 दिन की बच्ची इनाया को गोद में लिए रोती दिखीं। उनकी सात और बेटियां हैं, जिनकी उम्र अलग-अलग है और सबसे बड़ी बेटी की उम्र 14 साल है।
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मुदस्सर खान की मां केसर खान ने रोते हुए कहा- 'इन बच्चों के चेहरो देखिए। छोटी बच्चियों को तो ये पता भी नहीं है कि क्या हुआ है। अब उनके भविष्य का ध्यान कौन रखेगा?' 14 साल की सबसे बड़ी लड़की ने कहा कि 14 फरवरी को मेरा जन्मदिन था और पापा ने मुझे एक गाउन गिफ्ट में दिया था।
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किसी काम से कर्दमपुरी गए थे युसुफः मुदस्सर खान प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग का बिजनेस करते हैं। उनके छोटे भाई युसुफ खान अपने भाई को हर मुसीबत का हल निकालने वाला कहते हुए याद करते हैं। युसुफ ने कहा- 'मेरे भइया सोमवार को किसी काम से कर्दमपुरी गए हुए थे। वह वहीं पर फंस गए और उन्होंने मुझे कर्दमपुरी में भड़की हिंसा के बारे में बताया।
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मैंने उनसे कहा था कि जब तक सब ठीक नहीं हो जाता, घर के अंदर ही रहें। अगले दिन उन्होंने सुबह मुझे फोन किया। वह लगातार बढ़ रही हिंसा से काफी चिंतित थे और भइया ने मुझसे वहां आकर उन्हें निकालने के लिए कहा था।' (फोटो- दिल्ली हिंसा के बाद अपनों के बिछड़ जाने पर रोती एक महिला)
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अजनबी ने फोन उठाकर दी मौत की सूचनाः जब युसुफ ब्रिजपुरी ब्रिज पर पहुंचे तो वहां उन्होंने देखा कि दोनों ही समुदायों के दंगाई एक दूसरे पर पत्थर बरसा रहे थे। युसुफ बताते हैं- 'मैंने अपने भाई को कई बार फोन किया, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। मैं काफी डर गया था। उसके बाद किसी अजनबी ने फोन उठाया और कहा कि मेरे भाई सड़क पर मरे पड़े थे और टाटा 407 से एक शख्स ने उनके शव को जीटीबी अस्पताल पहुंचाया।'
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23 फरवरी को हुई थी हिंसा की शुरुआतः दिल्ली के उत्तरपूर्वी इलाके में नागरिकता कानून के समर्थन और विरोध करने वाले दो गुटों के बीच झड़प से इस हिंसा की शुरुआत हुई थी। 23 फरवरी की रात को उपद्रवियों ने फिर हिंसा शुरू की। मौजपुर, करावल नगर, बाबरपुर, चांद बाग में पथराव और हिंसा की घटनाएं सामने आईं। प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था। यह हिंसा 24 और 25 फरवरी को भी जारी रही। (फोटो- हिंसा के बाद डर सहमी एक महिला रो पड़ी)

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