'..और रेडियो बंद करके दुम दमाकर भागा पाकिस्तान', करगिल में भारतीय सेना ने दुश्मन को ऐसे हराया

Published : Jul 16, 2020, 01:49 PM IST

नई दिल्ली. कारगिल युद्ध 1999 में लड़ा गया था, जो कि तीन महीनों तक चला था। इसकी शुरुआत पाकिस्तान की ओर से की गई थी, लेकिन खत्म भारत ने किया था। ये युद्ध आज भी हर भारतीय के जहन में है। हर कोई इससे जुड़ी जानकारी पाने की जिज्ञासु रहता है। कारगिल युद्ध मई 1999 से शुरू होकर जुलाई में खत्म हुआ था। इन तीन महीनों में हर रोज रणनीतियां बनाई जाती थीं। इन्हें अंजाम देने के लिए आगे की प्रक्रिया की जाती थी। तोलोलिंग इस युद्ध की बड़ी जीत में से एक थी। इसके साथ ही प्वॉइंट 5140 की चोटी भी इस जीत का अहम हिस्सा थी। 13 जून 1999 को तोलोलिंग की जीत के बाद राजपुताना राइफल्स (राज रिफ) को वापस बुला लिया गया था ताकि वो थोड़ा आराम कर सके। हालांकि, इसके बाद 18 ग्रेनेडियर्स और 13 जैक रिफ को आगे के टारगेट के लिए चुना गया था। 

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'..और रेडियो बंद करके दुम दमाकर भागा पाकिस्तान', करगिल में भारतीय सेना ने दुश्मन को ऐसे हराया

लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) मोहिंदर पुरी ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में तोलोलिंग की जीत के बारे में बताया और कहा कि कैसे भारतीय जवानों ने अगला टारगेट प्वॉइंट 5140 पर जीत हासिल की थी। लेफ्टिनेंट जनरल ने बताया था कि तोलोलिंग से कुछ दूरी में 'हम्प' पर दुश्मन (पाकिस्तानी सैनिक) कब्जा जमाए बैठा था। इस खास टास्क के लिए 18 ग्रेनेडियर्स को चुना गया था। रेकी की गई, प्लान तैयार हुआ और अब भारतीय सेना के जांबाज 'हम्प' पर धावा बोलने के लिए तैयार थे। कारगिल की जीत में हम्प और प्वॉइंट 5140 की जीत काफी जरूरी थी। 

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मोहिंदर पुरी ने बताया कि 13 जून 1999 को तोलोलिंग पर भारतीय जवानों द्वारा कब्जा कर लिया गया था। तोलोलिंग से ऊपर जाने के लिए बीच में एक रास्ता आता है, उसका नाम हम्प रखा गया था। दरअसल, टू राजपुताना राइफल्स ने तोलोलिंग पर कब्जा किया था तो 18 ग्रेनेडियर्स ने उन्हें आराम देने के लिए वापस बुला लिया था। 18 ग्रेनेडियर्स, जो वहां पर पहले से मौजूद थी, उन्हें आदेश दिया गया कि इस 'हम्प' को पकड़िए। 

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मोहिंदर बताते हैं कि तोलोलिंग की हम्प से दूरी तकरीबन 730 मीटर की थी। उससे सात-आठ सौ गज की दूरी पर प्वॉइंट 5140 की चोटी थी। इस 5140 के लिए सीधी चढ़ाई थी। ऑफिसर्स ने 13 जम्मू कश्मीर राइफल्स को भी बिल्डअप कर लिया था।

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लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मोहिंदर पुरी ने कहा कि उनका मानना था कि जब हम्प पर कब्जा कर लिया जाएगा तो 5140 के लिए 13 जैक रिफ को टास्क देंगे। जब रेकी वगैरह करके ही प्लान बनाया जा रहा था। हम्प पर कब्जा जमाने के लिए जब 18 ग्रेनेडियर्स जैसे ही आगे बढ़ा तो दुश्मन ने भीषण फायरिंग शुरू कर दी। इसमें भारतीय जवानों की काफी कैजुअलटी हो गई थी। थोड़ी देर के बाद 18 ग्रेनेडियर्स ने हमला किया और 13 जैक रिफ की मदद के साथ हम्प पर कब्जा कर लिया था।

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मोहिंदर पुरी बताते हैं कि इसके बाद इंडियन आर्मी का अगला टारगेट प्वॉइंट 5140 था। सेना ने 13 जून को तोलोलिंग और 16-17 जून को हम्प पर कब्जा किया। 5140 का टास्क 13 जैक रिफ को दिया गया था। इस पर कब्जा पाने के लिए 13 जैक रिफ के साथ 2 नागा (नागा रेजिमेंट), 18 गढ़वाल राइफल्स का भी सपॉर्ट था। इन्हें डायवर्जनरी अटैक के लिए रखा गया था। 

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दक्षिण पश्चिम की तरफ से नागा रेजिमेंट और 18 गढ़वाल राइफल्स को भेजा गया और कहा गया कि इससे जैक रिफ को थोड़ी मदद मिल जाएगी। इस जंग को जांबाजों ने 19 जून को जीत ली थी। यहीं से कैप्टन विक्रम बत्रा ने रेडियो पर कमांडिंग ऑफिसर कर्नल वाईके जोशी को संदेश दिया था, ये दिल मांगे मोर मतलब उन्होंने प्वॉइंट 5140 को फतेह कर लिया है।

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लेफ्टिनेंट जनरल मोहिंदर पुरी ने बताया कि जब प्वॉइंट 5140 की लड़ाई चल रही थी तो इनके रेडियो को इंटरसेप्ट किया गया। दोनों ओर से जमकर गालीगलौच किया जा रहा था। जैसे ही पाकिस्तान को पता चला कि 5140 पर भारतीय सेना का कब्जा हो गया है तो वो रेडियो सेट्स बंद कर वहां से दुम दबाकर भाग खड़े हुए। इस जंग में पाकिस्तान की ओर काफी कैजुअलटी हुई थी। कई तो खाई में गिर गए थे। फिर भारत सेना ने मौलवी बुलवाकर उन्हें दफन करवा दिया था। 

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