Published : Mar 19, 2020, 04:38 PM ISTUpdated : Mar 19, 2020, 04:59 PM IST
नई दिल्ली. सात साल बाद निर्भया की मां का इंतजार खत्म हुआ। 20 मार्च की सुबह 5.30 बजे निर्भया के दोषियों को फांसी दी जाएगी। 16 दिसंबर 2012 की रात 6 दरिंदों में से एक मुकेश भी था। उसी ने सबसे पहले निर्भया को रॉड से मारा था। वारदात के बाद जब उसे गिरफ्तार किया गया, तब उसने कहा था कि अगर निर्भया चीखती-चिल्लाती नहीं तो बच जाती। ऐसे में बताते हैं मुकेश की सोच और उसके बारे में, जिसे जानकर शायद आप को गुस्सा आ जाए।
सबसे पहले जान लीजिए, जब 19 मार्च को दोषियों के वकील एपी सिंह के सभी विकल्प खत्म हो गए। तब उन्होंने क्या कहा? एपी सिंह ने कहा, दोषियों को भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर भेज दें, उन्हें डोकलाम भेज दें, लेकिन उन्हें फांसी न दें। वे देश की सेवा करने के लिए तैयार हैं। मैं इस बारे में एक हलफनामा दायर कर सकता हूं।
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दोषी मुकेश ने बताया था, "लड़की चिल्लाती रही। बचाओ-बचाओ। हम उसे मारपीट कर पीछे ले गए। हम आ जा रहे थे। बारी-बारी से। लड़की विरोध नहीं करती तो उसकी जान नहीं जाती।"
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दोषी मुकेश, मुख्य दोषी राम सिंह का भाई है। वह अपने बड़े भाई के साथ दक्षिण दिल्ली के रविदास झुग्गी झोपड़ी कॉलोनी में रहता था। वह कभी-कभी बस चलाने और साफ-सफाई का काम भी करता था।
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मुकेश सिंह को निर्भया और उसके दोस्त को लोहे की रॉड से पीटने का दोषी पाया गया था। कोर्ट में मुकेश ने कहा था कि घटना की रात वह बस चला रहा था और चार आरोपियो ने निर्भया के साथ रेप किया और उसके दोस्त की पिटाई की। लेकिन कोर्ट ने मुकेश की बात नहीं मानी और उसे मौत की सजा सुनाई।
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दोषी मुकेश ने कहा था, मैंने 15-20 मिनट गाड़ी चलाई थी। लाइटें बंद कर दी थीं। मेरा भाई मेन था। उसी ने निर्भया के दोस्त को मारा।
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दोषी मुकेश ने कहा था कि अगर रात में लड़कियां निकलेंगी तो ऐसी घटनाएं तो होंगी ही। रेप के लिए आदमी से ज्यादा वह जिम्मेदार होगी।
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मुकेश ने कहा था कि वह लड़की और उसका दोस्त बिना कुछ कहे ऐसा होने देते तो हमारा गैंग उन्हें मारता-पीटता नहीं। लड़की को घटना का विरोध नहीं करना चाहिए था। यदि वह विरोध नहीं करती तो हम घटना के बाद उसे उसके घर तक छोड़ते और केवल उसके दोस्त को ही मारते।
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