क्या 2010 के IPL कोच्चि स्कैंडल के पीछे सचमुच कोई बड़ा राजनीतिक कवर-अप छिपा था, जैसा ललित मोदी दावा कर रहे हैं? क्या सुनंदा पुष्कर को मिली कथित इक्विटी और ‘शैडो शेयरहोल्डर्स’ की कहानी आज भी अनसुलझा रहस्य है? क्या शशि थरूर पर दबाव, धमकी और सत्ता के इस्तेमाल के आरोपों में कोई छिपा सच दफन है? क्या कोच्चि फ्रेंचाइजी का पतन सिर्फ कारोबारी विफलता था? 

Lalit Modi IPL Controversy 2010: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने करीब डेढ़ दशक पुराने कोच्चि टस्कर्स स्कैंडल को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। यूके (UK) में रह रहे ललित मोदी ने एक इंटरव्यू में सीधा आरोप लगाया है कि साल 2010 में आए इस सियासी तूफान के दौरान कांग्रेस पार्टी की पूरी मशीनरी और खुद तत्कालीन यूपीए (UPA) अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी नेता शशि थरूर के बचाव में उतर आई थीं। ललित मोदी का दावा है कि इस पूरे विवाद के पीछे कांग्रेस का एक बहुत बड़ा 'कवर-अप' (मामले को दबाने की साजिश) काम कर रहा था।

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कोच्चि कंसोर्टियम ने $350 मिलियन की भारी-भरकम बोली क्यों लगाई?

कहानी का सबसे रोमांचक और सस्पेंस से भरा हिस्सा तब शुरू होता है जब साल 2010 में नई आईपीएल टीमों के लिए बोलियां लगाई जा रही थीं। ललित मोदी के अनुसार, कोच्चि कंसोर्टियम ने $350 मिलियन की भारी-भरकम बोली लगाकर फ्रेंचाइजी तो हासिल कर ली, लेकिन उसका फाइनेंशियल मॉडल पूरी तरह से संदिग्ध था।

आधी रात का वो फोन कॉल: 'अगर सुनंदा का नाम पूछा, तो सुबह घर पर रेड पड़वा दूंगा'

सस्पेंस तब गहरा गया जब कागजातों में 'सुनंदा पुष्कर' नाम की एक अज्ञात महिला को बिना किसी निवेश के कंपनी की 25% फ्री इक्विटी (मुफ्त शेयर) दी जा रही थी। ललित मोदी ने जब इस 'शैडो शेयरहोल्डर' की पहचान पर सवाल उठाए और फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट पर दस्तखत करने से मना कर दिया, तो उनके पास सीधे तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर का फोन आया। मोदी का दावा है कि थरूर ने फोन पर उनसे कहा, "ललित, सुनंदा के बारे में मत पूछो, वह मेरी अच्छी दोस्त हैं। अगर तुमने ज्यादा सवाल किए, तो मैं सुबह तुम्हारे यहाँ रेड डलवा दूँगा।" इसके जवाब में मोदी ने फोन पटक दिया था।

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10 रुपये के शेयर की कीमत रातों-रात 1 लाख!

ललित मोदी ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश करते हुए बताया कि जिस दिन कोच्चि को टीम मिली, उस दिन सुनंदा पुष्कर के 10 रुपये के शेयर की वैल्यू रातों-रात बढ़कर 1 लाख रुपये हो गई थी। जब मोदी ने इस वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने की कोशिश की, तो उनके खिलाफ दिल्ली के सत्ता गलियारों में चक्रव्यूह रच दिया गया।

सोनिया गांधी और अहमद पटेल के परदे के पीछे के खेल?

ललित मोदी का आरोप है कि शशि थरूर को बचाने के लिए खुद सोनिया गांधी परदे के पीछे से कमान संभाल रही थीं। मोदी ने दावा किया, "मुझ पर हर तरफ से हमले हो रहे थे। मुझे उस दौर के चाणक्य कहे जाने वाले अहमद पटेल और तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के फोन आ रहे थे। राजीव शुक्ला मेरे पास आकर कहते थे कि यह करो, वह करो।" मोदी का साफ कहना है कि पूरी सरकार एक भ्रष्ट फाइनेंशियल मॉडल को छिपाने और थरूर को राजनीतिक ढाल देने में जुट गई थी।

किसने ललित मोदी पर आधी रात को दस्तखत करने का बनाया दबाव?

इस विवाद का सस्पेंस यहीं खत्म नहीं होता। ललित मोदी ने तत्कालीन बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष शशांक मनोहर पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। मोदी के मुताबिक, बेंगलुरु में देर रात तक चली एक बैठक के दौरान शशांक मनोहर ने उन पर कोच्चि फ्रेंचाइजी के दस्तावेजों पर तुरंत दस्तखत करने का भारी दबाव बनाया।

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'शशांक मनोहर ने मजबूर किया, मैंने फाइल पर लिख दिया सच'

मोदी ने सुबह तक का वक्त मांगा, लेकिन मनोहर नहीं माने। आखिरकार भारी दबाव में आकर मोदी ने दस्तखत तो किए, लेकिन फाइल पर एक नोट लिख दिया कि वे यह हस्ताक्षर अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि अध्यक्ष के दबाव में आकर कर रहे हैं। गौरतलब है कि इस विवाद के बढ़ने के बाद अप्रैल 2010 में थरूर को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और साल 2011 में कोच्चि फ्रेंचाइजी को बीसीसीआई ने सस्पेंड कर दिया था।

सुनंदा पुष्कर की मौत से ठीक पहले की वो 'ट्विटर चैट' और आखिरी पत्ता

ललित मोदी ने 17 जनवरी 2014 को दिल्ली के एक आलीशान होटल में मृत पाई गईं सुनंदा पुष्कर को लेकर भी एक रहस्यमयी खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि मौत वाली सुबह सुनंदा उनके साथ ट्विटर पर बातचीत कर रही थीं। सुनंदा ने मोदी से पूछा था, "क्या मैं यह सब (कोच्चि स्कैंडल का सच) सबको बता दूं?" जिस पर मोदी ने कहा था, "हां, ज़रूर बता दो।" लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद उनकी संदेहास्पद मौत हो गई।

सुषमा स्वराज को लेकर ललित मोदी ने क्या बोला?

इंटरव्यू के आखिर में, जब मोदी से बीजेपी नेताओं जैसे वसुंधरा राजे और दिवंगत केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज के साथ उनके संबंधों और पुर्तगाल के लिए आपातकालीन यात्रा दस्तावेज (Emergency Travel Documents) मिलने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे पूरी तरह मानवीय मामला बताया। मोदी ने भावुक होते हुए कहा, “मेरी पत्नी को ब्रेन ट्यूमर था और वह जिंदगी की आखिरी जंग लड़ रही थी। परिवार के लिए इंसान अपनी जेब का आखिरी पत्ता भी चल देता है। मेरे लिए वह पत्ता सुषमा स्वराज थीं, जिन्हें मैं जानता था और मैंने अपनी पत्नी की जान बचाने के लिए उस आखिरी मौके का इस्तेमाल किया।”