88 करोड़ का घपला, दुबई में फरारी और फिर अचानक इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस! मास्टरमाइंड के पकड़े जाने के बाद उसकी पत्नी विशाखा राठौड़ का भी UAE से डिपोर्टेशन... क्या खुलेंगे करोड़ों के इस काले खेल के राज?

नई दिल्ली: सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने विदेश मंत्रालय (MEA) और गृह मंत्रालय (MHA) के साथ मिलकर 88 करोड़ रुपये के हाई-प्रोफाइल इन्वेस्टमेंट फ्रॉड मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। इंटरपोल के सहयोग से सीबीआई ने वॉन्टेड भगोड़ी विशाखा राठौड़ को यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) से भारत डिपोर्ट करवा लिया है। 3 अगस्त को पुणे पहुंचते ही महाराष्ट्र पुलिस की टीम ने उसे हिरासत में ले लिया।

क्या है 88 करोड़ रुपये का निवेश घोटाला?

जांच अधिकारियों के अनुसार, विशाखा राठौड़ और उसका पति अविनाश राठौड़ इस पूरे 88 करोड़ रुपये के घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता हैं। इन दोनों ने कई लुभावनी निवेश योजनाओं के नाम पर आम निवेशकों को फंसाया और हर महीने एक निश्चित रिटर्न देने का झूठा आश्वासन दिया। इसके बाद, निवेशकों की मेहनत की कमाई को बेईमानी से हड़पकर फर्जी बैंक और डीमैट खातों के जरिए इधर-उधर ट्रांसफर कर दिया गया।

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कैसे हुई गिरफ्तारी और डिपोर्टेशन?

विशाखा राठौड़ 3 अगस्त को पुणे पहुंची, जहां महाराष्ट्र पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। इससे पहले 4 जून 2026 को विशाखा और उसके पति अविनाश के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ था। इसी नोटिस के आधार पर UAE अधिकारियों ने दोनों के खिलाफ कार्रवाई की।

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दुबई से मास्टरमाइंड पति का प्रत्यर्पण और कस्टडी

दोनों आरोपियों के खिलाफ 4 जून, 2026 को इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस के आधार पर यूएई अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए मुख्य मास्टरमाइंड अविनाश राठौड़ को हिरासत में लिया और 23 जुलाई, 2026 को भारत प्रत्यर्पित (Extradited) कर दिया। मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही पुणे पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।

भगोड़ों पर कसा शिकंजा: सीबीआई और इंटरपोल का बड़ा एक्शन

भारत में इंटरपोल के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (NCB) के रूप में कार्य करते हुए सीबीआई ने 'भारतपोल' प्लेटफॉर्म के जरिए वैश्विक कानून प्रवर्तन एजेंसियों से तालमेल बिठाकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 से जुलाई 2026 के बीच भारत ने दुनिया के 36 अलग-अलग देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को सफलतापूर्वक वापस लाकर अदालती कार्यवाही के दायरे में खड़ा किया है।

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