फांसी से पहले फंदे पर लगाएंगे मक्खन, बिहार के बक्सर से आया है निर्भया के दरिंदों का फंदा

Published : Jan 10, 2020, 12:49 PM ISTUpdated : Jan 31, 2020, 06:25 PM IST

नई दिल्ली. देश में हुए वीभत्स निर्भया गैंगरेप केस में बड़ी खबर सामने आ रही है कि 1 फरवरी को फांसी पर रोक लगा दी गई है। अनिश्चितकाल के लिए अभी चारों दोषियों की फांसी पर रोक लग गई है। साल 2020 में 1 फरवरी को निर्भया के चारों दरिंदों को फांसी होनी थी। इसके साथ ही करीब सात साल पुराना ये मामला पीड़िता को न्याय के साथ बंद हो जाएगा। हम आपको फांसी दे जाने के समय की प्रक्रिया बता रहे हैं कि कैसे एक लाल लिफाफे में कैदी को मौत का पैगाम भेजा जाता है। फांसी से जुड़ी ये बातें  जानकर लोग दंग रह जाते हैं.....।

PREV
110
फांसी से पहले फंदे पर लगाएंगे मक्खन, बिहार के बक्सर से आया है निर्भया के दरिंदों का फंदा
नियमों के अनुसार डेथ वारंट जारी होने के बाद इसकी सूचना एक लाल लिफाफे में दोषियों के परिजनों को दी जाती है।
210
यह लिफाफा उन्हें किस तारीख को कितने बजे सौंपा गया, इसका विवरण भी दर्ज होता है। दोषियों को परिजनों से मिलने की छूट भी दी जाती है। इस दौरान वे अपनी वसीयत या दूसरी चीजें परिजनों को सौंप सकते हैं।
310
डेथ वारंट जारी होने के बाद जेल प्रशासन का काम होता है कैदियों को मानसिक रूप से मौत के लिए तैयार करना। उन्हें एक अलग कोठरी में शिफ्ट किया जाता है और उनकी लगातार निगरानी की जाती है।
410
वे आपस में मिल भी सकते हैं। इस मुलाकात के दौरान भी उन पर कड़ी निगरानी रखी जाती है कहीं कैदी लड़-झगड़ न बैठें या खुद को कुछ नुकसान न पहुंचा लें। (फाइल फोटो)
510
डेथ वारंट से फांसी होने तक दोषी कैदियों की लगातार काउंसलिंग की जाती है। उन्हें सादा खाना और एक जोड़ी कपड़े मिलते हैं। अगर वे चाहें तो धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी सुन सकते हैं। इस बात का काफी ध्यान रखा जाता है कि वे शारीरिक या मानसिक रूप से बीमार न पड़ें। (फाइल फोटो)
610
फांसी देने के लिए विशेष रस्सी का इंतजाम किया जाता है। यह रस्सी सिर्फ बिहार की बक्सर जेल में बनती है और इसे मनीला रोप कहा जाता है। (फाइल फोटो)
710
बताया जाता है कि पहले यह फिलीपींस की राजधानी मनीला से मंगाई जाती थी इसलिए उसका यह नाम पड़ा। बक्सर जेल के कैदियों को इस रस्सी को बनाने की खास ट्रेनिंग मिलती है। (फाइल फोटो)
810
एक साक्षात्कार में बक्सर जेल के अधीक्षक विजय कुमार अरोड़ा कहते हैं, ‘यहां लंबे समय से फांसी के फंदे बनाए जाते रहे हैं। एक फंदा 7200 कच्चे धागों से बनता है।’ उनके मुताबिक पांच-छह कैदी दो-तीन दिन में इसे तैयार करते हैं। बताया जा रहा है कि तिहाड़ जेल प्रशासन ने ऐसे 12 फंदे मंगाए हैं। (मनीला रोप की फाइल फोटो)
910
फांसी देने से पहले रस्सी पर मोम या मक्खन लगाया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि यह गर्दन को छीले नहीं बल्कि आराम से दबाव बनाए। फांसी देते वक्त सब काम इशारों में ही होता है ताकि कैदी विचलित न हो। फांसी के बाद चिकित्सक शव की जांच करके मौत की पुष्टि करते हैं। (पवन जल्लाद की फाइल फोटो)
1010
डेथ वारंट के साथ ही दिल्ली की तिहाड़ में चारों दोषियों को फांसी देने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। यहां चारों को एकसाथ फांसी दी जाएगी जिसके लिए तख्त तैयार हो चुका है। (तिहाड़ जेल कैदियों कीफाइल फोटो)

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories