अमित शाह के टारगेट को प्रशांत किशोर की ललकार, जानिए, चैलेंज देने वाले रणनीतिकार का कैसा है ट्रैक रिकॉर्ड

Published : Dec 21, 2020, 02:23 PM IST

नई दिल्ली. प बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 200 सीटों का लक्ष्य रखा है। लेकिन भाजपा के इस लक्ष्य को चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने चुनौती दी है। दरअसल, प्रशांत किशोर इस बार तृणमूल कांग्रेस की रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने दावा किया है कि भाजपा प बंगाल में दहाई का अंक भी नहीं छू पाएगी। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा, अगर भाजपा इससे अच्छा प्रदर्शन करेगी, तो वे ट्विटर छोड़ देंगे। उधर, भाजपा की कमान इस बार भी अमित शाह के हाथ में नजर आ रही है। ऐसे में मुकाबला अमित शाह बनाम प्रशांत किशोर का होता नजर आ ररहा है। जहां अमित शाह को भाजपा का चाणक्य कहा जाता है, तो वहीं, प्रशांत किशोर भी कई राज्यों में अपने प्रदर्शन से लोहा मनवा चुके हैं। ऐसे में देखते हैं कि प्रशांत किशोर का ट्रैक रिकॉर्ड कैसा है। 

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अमित शाह के टारगेट को प्रशांत किशोर की ललकार, जानिए, चैलेंज देने वाले रणनीतिकार का कैसा है ट्रैक रिकॉर्ड

2014: कभी मोदी के लिए बनाई थी रणनीति
2014 के लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने भाजपा और नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर काम किया था। मार्केटिंग से लेकर विज्ञापन तक सब प्रशांत किशोर के दिमाग की उपज थी। इतना ही नहीं, चाय पर चर्चा, रन फॉर यूनिटी और मंथन जैसे कार्यक्रमों की दम पर प्रशांत किशोर सफल रणनीति बनाने में कामयाब साबित हुए। 2014 में भाजपा की जीत में प्रशांत किशोर की अहम भूमिका मानी जाती है। हालांकि, इस चुनाव के बाद प्रशांत ने भाजपा और मोदी से दूरी बना ली और  इंडियन पॉलिटिकल ऐक्‍शन कमिटी नाम से अपना नया संगठन बनाया। 

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2015: PK ने थामा नीतीश कुमार का हाथ 
प्रशांत किशोर ने 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के साथ मिलकर काम किया। नीतीश के प्रचार की कमान भी उन्होंने ही संभाली। पीके की रणनीति एक बार फिर सफल रही, राज्य में जदयू-यूपीए गठबंधन की सरकार बनी। हालांकि, बाद में नीतीश कुमार भाजपा के साथ आ गए और इसके बाद से नीतीश कुमार और प्रशांत किशोर के रिश्ते खराब होते चले गए।  

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2017: पंजाब में कांग्रेस को जिताने का लिया जिम्मा
प्रशांत किशोर 2016 में कांग्रेस के साथ आ गए। पीके की रणनीति की दम पर पंजाब में कांग्रेस को जीत मिली। कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री बने। इस जीत का क्रेडिट पीके को भी मिला। 

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2017 : उत्तर प्रदेश में रणनीति हुई फेल 
प्रशांत किशोर ने एक के बाद एक राज्य में सफल रणनीति बनाई। हालांकि, उनका जादू उत्तर प्रदेश में नहीं चला। जनता ने सपा और कांग्रेस के साथ को नकार दिया। भाजपा की रणनीति के सामने प्रशांत किशोर फेल हो गए। भाजपा 300 से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब रही। 

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2019 : जगनमोहन रेड्डी ने बनाया राजनीतिक सलाहकार
प्रशांत किशोर ने 2017 में आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी को जिताने का जिम्मा उठाया। किशोर की कंपनी ने जगन की छवि बदलने के लिए कई अभियान चलाए। इसका असर 2019 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला। जगनमोहन रेड्डी ने 175 में से 151 सीटें जीतीं। इसी के साथ प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा में आ गए। 

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2020 : केजरीवाल के साथ मिलाया हाथ
इस साल प्रशांत किशोर ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की पार्टी आप के रणनीतिकार बने। इसका फायदा आप को मिला। दिल्ली में केजरीवाल 62 सीटें जीतने में कामयाब हुए। इसी के साथ प्रशांत किशोर की भूमिका को भी सराहना मिली।  

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2021 : प बंगाल और तमिलनाडु में रणनीति बना रहे पीके
प्रशांत किशोर के पास अभी दो बडे़ प्रोजेक्ट हैं। पहला बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को सत्ता में बरकरार रखना और दूसरा तमिलनाडु में डीएमके के लिए रणनीति तैयार करना। ताकि पार्टी राज्य में सरकार बना सके।  

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