Published : Jan 12, 2023, 08:46 AM ISTUpdated : Jan 12, 2023, 12:58 PM IST
जोशीमठ(Joshimath). जोशीमठ पर मंडराता प्रलय का खतरा कम होने के बावजूद लोगों द्वारा फैलाई जा रहीं अब अफवाहों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चिंता जाहिर की है। इस बीच आईआईटी कानपुर के भू वैज्ञानिक(geologist) प्रो. राजीव सिन्हा ने एक नया खुलासा किया है। 2021 में चमोली में आई आपदा के बाद उत्तराखंड क्षेत्र में ड्रोन सर्वे कर चुके प्रो. सिन्हा ने आगाह किया कि चूंकि जोशीमठ भूस्खलन के मलबे पर बसा है, जो भूर्गभ में पानी का सतह पर दबाव बनने पर धीरे-धीरे खिसक रहा है। जोशीमठ भूस्खलन और भू-धंसाव से प्रभावित क्षेत्र में है, इसका कारण यहां आने वाले हल्के भूकंप हैं। वहीं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (आईआईआरएस) ने करीब दो साल की सेटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन करने के बाद सरकार को एक रिपोर्ट दी है। इसके अनुसार, जोशीमठ हर साल 6.62 सेंटीमीटर यानी करीब 2.60 इंच धंस रहा है। आईआईआरएस देहरादून के वैज्ञानिकों ने जुलाई 2020 से मार्च 2022 के बीच जोशीमठ और आसपास के करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र की सेटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन किया। इधर, सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा-हमने अस्थाई तौर पर अपने जवानों को स्थानांतरित किया है। अगर जरूरत पड़ी तो हम औली में अपने जवानों को स्थाई तौर पर तैनात करेंगे। जोशीमठ से माणा जाने वाली रोड पर कुछ दरारें हैं, जिसे BRO ठीक कर रहा है। इससे हमारी ऑपरेशनल रेडीनेस पर कुछ असर नहीं पड़ा है। जहां तक स्थानीय लोगों को मदद पहुंचाने की बात है तो हमने अपने अस्पताल, हेलीपैड आदि सिविल प्रशासन को दिए हैं, जिससे वे लोगों को अस्थाई तौर पर लोगों को स्थानांतरित कर सकें। पढ़िए पूरी डिटेल्स...
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 8 जनवरी को कहा था कि यहां सभी बड़े प्रोजेक्ट रोक दिए गए हैं, लेकिन दैनिकभास्कर की रिपोर्ट कुछ अलग कहानी कहती है। उसके अनुसार जोशीमठ से करीब 3 किमी दूर सड़क बनाने के लिए पहाड़ों पर ड्रिलिंग जारी है।
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को आपदा प्रभावित जोशीमठ कस्बे(subsidence-hit Joshimath) का दौरा किया और प्रभावित लोगों के लिए अंतरिम सहायता की घोषणा की। हालांकि स्थानीय लोगों ने बद्रीनाथ हादसे की तर्ज पर मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और डैमेज भवन गिराने की कार्रवाई नहीं होने दी।
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धामी ने जोशीमठ पहुंचने पर संवाददाताओं से कहा, "हम जोशीमठ के लोगों के साथ खड़े हैं। प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। मुझे उनका पूरा समर्थन है। उनके (प्रभावित लोगों) हितों का ध्यान रखा जाएगा।" मुख्यमंत्री ने कहा कि बाजार दर के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा, जो सभी हितधारकों को विश्वास में लेने के बाद तय किया जाएगा।
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धामी ने कहा कि प्रभावित लोगों को 1.5 लाख रुपये की अंतरिम सहायता दी जा रही है और राहत और पुनर्वास के विवरण पर काम किया जा रहा है। धामी ने बताया कि प्रभावित परिवारों के बीच पैकेज राशि के वितरण एवं पुनर्वास पैकेज की दर सुनिश्चित करने के लिए चमोली के जिलाधिकारी हिमांशु खुराना की अध्यक्षता में 19 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
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धामी ने यह भी कहा कि ऐसी धारणा बनाई जा रही है कि पूरा उत्तराखंड खतरे में है, जो सही नहीं है। उन्होंने कहा, "ऐसा प्रभाव नहीं बनना चाहिए। फरवरी में औली में अंतरराष्ट्रीय शीतकालीन खेल होने जा रहे हैं। चार धाम यात्रा भी कुछ महीनों में शुरू होगी। इस तरह की गलत धारणा नहीं बननी चाहिए।"
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मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां भी विकास कार्य हो रहा है वहां इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन होना चाहिए। धामी ने स्पष्ट किया कि केवल दो होटलों को टेक्निकली ध्वस्त किया जा रहा है न कि असुरक्षित के रूप में चिह्नित घरों को।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सप्ताह से भी अधिक समय पहले एक भूमिगत चैनल के फटने के बाद से मारवाड़ी वार्ड से रिसने वाले पानी का फोर्स लगभग आधा हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, "यह एक राहत देने वाली खबर है क्योंकि इससे पानी के लगातार रिसाव ने चिंता पैदा कर दी थी कि यह जोशीमठ में भूमि धंसाव को और बढ़ा सकता है।"
इस बीच, कस्बे में विरोध प्रदर्शन जारी रहा। वहीं प्रशासन प्रभावित परिवारों को सुरक्षित निकालने की कार्रवाई करता रहा। 18 और लोगों को अस्थायी राहत केंद्रों में स्थानांतरित कर दिया गया।
चमोली में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कहा कि जोशीमठ में खतरे के क्षेत्र से अब तक कुल 145 परिवारों को निकाला गया है।700 से अधिक घरों को असुरक्षित घोषित किया गया है। एक दूसरे से सटे दो होटल-सात मंजिला मलारी इन और पांच मंजिला माउंट व्यू एक दर्जन से अधिक घरों के लिए खतरा पैदा करते हुए सबसिडेंस जोन में अनिश्चित रूप से खड़े हैं। नोएडा के दो टावरों को गिराने वाले रुड़की स्थित केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) की मदद से इनके स्ट्रक्क्चर को टेक्निकली तरीके से गिराने की तैयारी मंगलवार को ही शुरू हो गई थी, लेकिन दोनों होटलों के मालिकों के विरोध के चलते इसे रोकना पड़ा। वे बद्रीनाथ जीर्णोद्धार मास्टरप्लान द्वारा विस्थापितों को दी गई पेशकश की तर्ज पर मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
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इससे पहले मुख्यमंत्री की सचिव मीनाक्षी सुंदरम ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि बाजार दर के अनुसार पर्याप्त मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "सार्वजनिक हित में हितधारकों के सुझावों के बाद बाजार दर तय की जाएगी। स्थानीय लोगों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।"
सुंदरम ने कहा, "मैं एक बात स्पष्ट करना चाहता हूं। केवल दो होटलों को तोड़ा जाना है... डेंजर जोन में बने घरों को नहीं गिराया जाएगा। घरों पर रेड क्रॉस के निशान सिर्फ उन्हें खाली कराने के लिए हैं।" सुंदरम भू-धंसाव प्रभावित शहर के लिए नोडल अधिकारी भी हैं। हालांकि आक्रोशित स्थानीय लोगों ने धरने पर बैठना जारी रखा और अधिकारियों को होटलों को गिराने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। लोगों ने कहा-"हम बद्रीनाथ की तर्ज पर मुआवजा चाहते हैं। लेकिन मुख्यमंत्री के सचिव ने कहा कि यह संभव नहीं है। मलारी इन के मालिक ठाकुर सिंह राणा ने कहा कि बाजार दर के अनुसार मुआवजा दिया जा सकता है। लेकिन जब हमने पूछा कि बाजार दर क्या होगी, तो उन्होंने कहा कि वह नहीं पता।
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