Published : Jul 08, 2020, 09:16 AM ISTUpdated : Jul 08, 2020, 09:19 AM IST
श्रीनगर. सुरक्षाबलों ने हिजबुल के पोस्टर ब्वॉय और आतंकी बुरहान वानी को 2016 में आज के ही दिन यानी 8 जुलाई को मार गिराया था। सोशल मीडिया पर कुछ पाकिस्तान परस्त लोग उसकी बरसी पर कैंपेन चला रहे हैं। बुरहान वानी की मौत सुरक्षाबलों के लिए घाटी में बड़ी कामयाबी थी, उसने बड़ी संख्या में युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती कराया था। वह कश्मीर में पाकिस्तान की आवाज बनता जा रहा था। लेकिन भारत के जाबांज सुरक्षाबलों ने उसे उसके दो साथियों के साथ मौत के घाट उतार दिया था। आईए जानते हैं कैसे इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था।
8 जुलाई को सुरक्षाबलों के पास सूचना आती है कि बुरहान वानी कोकरनाग के पास बमडूरा गांव में पहुंच गया है। इंटेलिजेंस और आर्मी ने प्लान के तहत उसे वहां बुलाया था। ऐसे में बिना देरी किए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप गांव में तैनात हो गई।
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दरअसल, वानी को उसकी गर्लफ्रेंड के जरिए बुलवाया गया था। वह अपने दो साथियों सरताज और परवेज के साथ वहां पहुंचा था। सरताज का फोन खुफिया एजेंसियों के रडार पर था।
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पहले लगाई गई आग
करीब 150 सुरक्षाबलों के जवान घर के आस पास तैनात थे। इसके बाद जिस घर में बुरहान वानी छिपा था, उसके पीछे आग लगाई गई। इस्लाम में जलकर मरना अच्छा नहीं माना जाता, इसलिए वह आग से बचने के लिए घर से बाहर निकला।
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नशे में घुत था वानी
बताया जाता है कि बुरहान वानी उस वक्त नशे में घुत था। वह चल भी नहीं पा रहा था। ऐसे में मौका देख जवानों ने घेर लिया। वानी को बचाने के लिए उसके साथियों ने फायरिंग भी की। लेकिन जवाबी कार्रवाई में तीनों आतंकी ढेर हो गए।
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आठ जुलाई 2016 को सुरक्षा बलों ने अनंतनाग जिले के कोकेरनाग में बुरहान वानी को उसके दो साथियों के साथ मार गिराया था। वह हिजबुल मुजाहिदीन का टॉप कमांडर था।
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बुरहान पर 10 लाख का इनाम था। उसकी मौत के बाद घाटी में काफी प्रदर्शन हुए थे। इस दौरान सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों में काफी झड़पें भी हुई थीं। प्रशासन को कई जिलों में इंटरनेट भी बंद करना पड़ा था।
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बुरहान की बरसी पर हर साल स्थिति काफी तनावपूर्ण रहती है। ऐसे में सुरक्षाबलों द्वारा एहतियातन तमाम कदम भी उठाने पड़ते हैं।
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