Published : Dec 03, 2019, 05:20 PM ISTUpdated : Dec 03, 2019, 05:27 PM IST
नई दिल्ली. एसपीजी (संशोधन) बिल 2019 राज्यसभा में पास हो गया। इसस पहले अमित शाह ने कहा, कानून एक परिवार को ध्यान में रखकर नहीं बनाए जा सकते। उन्होंने कहा कि जो आरोप लग रहे हैं कि यह एसपीजी (संशोधन) बिल एक राजनीतिक प्रतिशोध है, जबकि ऐसा नहीं है। इस बिल से अगर किसी का नुकसान होगा तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का होगा क्योंकि 5 साल के बाद तो उनको भी एसपीजी सुरक्षा नहीं मिलेगी। ऐसे में बताते हैं कि देश में वह सुरक्षा की 5 श्रेणियां कौन-कौन सी हैं, जो प्रधानमंत्री से लेकर नेताओं तक को दी जाती हैं।
देश में पांच श्रेणियों में सुरक्षा व्यवस्था तय की गई हैं।
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एसपीजी सुरक्षा : यह देश की सबसे ऊंचे स्तर की सुरक्षा है। 2 जून 1988 में स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) बना। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले एसपीजी में पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स (BSF,CISF,ITBP,CRPF) के जवान होते हैं।
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जेड प्लस सुरक्षा : इसे देश की दूसरे नंबर की सुरक्षा व्यवस्था कही जाती है। यह एसपीजी के बाद आती है। इसमें 55 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं, जिसमें से 10 एनएसजी कमांडो होते हैं। इसके अलावा पुलिस ऑफिसर भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होते हैं। पहला सुरक्षा घेरा एनएसजी कमांडो बनाते हैं।
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जेड श्रेणी की सुरक्षा : इसमें कुल 22 सुरक्षागार्ड तैनात होते हैं। सुरक्षा में 4 से 5 एनएसजी कमांडो होते हैं। इसमें दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी या सीआरपीएफ के कमांडो शामिल होते हैं।
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वाई श्रेणी की सुरक्षा : यह सुरक्षा का तीसरा स्तर होता है। कम खतरे वाले लोगों को यह सुरक्षा दी जाती है। इसमें दो कमांडो सहित 11 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं।
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एक्स श्रेणी की सुरक्षा : इस श्रेणी में दो सुरक्षा गार्ड तैनात होते हैं, जिसमें एक पीएसओ (व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी) होता है। इस सुरक्षा में कोई कमांडो शामिल नहीं होता है। कुछ राज्यों में विधायकों और सांसदों को एक्स श्रेणी की सुरक्षा दी जाती है।
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