नई दिल्ली. निर्भया केस में दिल्ली की पटियाला कोर्ट ने तीसरा डेथ वारंट जारी कर दिया। अब 3 मार्च को सुबह 6 बजे दोषियों को फांसी देने की तारीख तय की गई है। इससे पहले कोर्ट ने 22 जनवरी और 1 फरवरी को फांसी की तारीख तय की थी, हालांकि, कानूनी विकल्पों के बाकी रहने के चलते यह टाल दी गई। ऐसे में निर्भया की मां का दर्द समझा जा सकता है। 7 साल से उन्होंने दोषियों को मौत दिलाने के लिए कोर्ट के चक्कर काटे हैं। उन्होंने एक मीडिया संस्थान में बात करते हुए बताया कि आखिर वह रात कैसी थी, जब उन्हें पता चला था कि बेटी के साथ दरिंदगी हुई है।
किसके पास क्या हैं विकल्प? मुकेश- कोई विकल्प नहीं। विनय की दया याचिका और क्यूरेटिव पिटीशन खारिज हो चुकी है। अक्षय की क्यूरेटिव और दया याचिका खारिज हो चुकी है। वहीं, पवन के पास अभी क्यूरेटिव और दया याचिका के दोनों विकल्प बचे हैं।
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निर्भया की मां आशा देवी पांडे ने बताया कि जब उन्हें पुलिस ने पहली बार फोन किया तो उन्हें लगा कि मामली एक्सीडेंट हुआ है। बेटी जल्द ही ठीक हो जाएगी। कोई बड़ी बात नहीं है।
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निर्भया की मां जब अस्पताल पहुंची तो बेटी की हालत देखकर दंग रह गईं। उन्होंने बताया, जब मैं बेटी को देखने के लिए अस्पताल पहुंची तो दंग रह गई। कोई जानवर भी कहीं ज्यादा दया दिखाता।
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निर्भया की मां ने बताया, दरिदों ने इतनी ताकत से उसके बाल खींचे थे कि गर्दन के पास उसके सिर की चमड़ी उखड़ गई थी।
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आशा देवी पांडे ने बताया कि बेटी के गालों पर काटे जाने के निशान थे।
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निर्भया के होंठों पर केवल खून ही खून दिखता था।
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'उन लोगों ने उसकी जांघों पर लोहे की छड़ से इतना मारा था कि जांघें बुरी तरह सूज गई थीं'
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16 दिसंबर, 2012 की रात में 23 साल की निर्भया से दक्षिण दिल्ली में चलती बस में 6 लोगों ने दरिंदगी की थी। साथ ही निर्भया के साथ बस में मौजूद दोस्त के साथ भी मारपीट की गई थी। दोनों को चलती बस से फेंक कर दोषी फरार हो गए थे। इसके बाद निर्भया का दिल्ली के अस्पताल में इलाज चला था। जहां से उसे सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया था। 29 दिसंबर को निर्भया ने सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
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