पिता के ऑपरेशन के लिए जमा किए थे पैसे..एक दिन ऐसी इमोशनल हुई लेडी कांस्टेबल कि ले बैठी अलग तरह का फैसला

Published : Jul 16, 2020, 11:21 AM ISTUpdated : Jul 16, 2020, 11:23 AM IST

बर्दवान, पश्चिम बंगाल. कोरोना वायरस ने सारी दुनिया की हालत खराब कर दी है।  खासकर, गरीबों के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजार करना भारी पड़ रहा है। लेकिन दुनिया में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है, जो तन-मन और धन से मजबूरों की मदद कर रहे हैं। इस लेडी कांस्टेबल ने एक ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो मिसाल गया है। 37 वर्षीय माहिनूर खातून के पिता पेशे से ट्रक ड्राइवर थे। उन्होंने बड़े कष्ट उठाकर बेटी को पढ़ाया। माहिनूर के पिता की उम्र इस समय 70 साल है। उनकी कॉर्डियक सर्जरी होना है। इसके लिए माहिनूर ने पाई-पाई जोड़कर पैसा इकट्ठा किया था। लेकिन जब अपनी ड्यूटी के दौरान उनका सामना ऐसे गरीबों से भी हुए, जिनके पास खाने को कुछ नहीं बचा था। यह देखकर माहिनूर इमोशनल हो गईं और उन्होंने इनके लिए कुछ करने की ठानी। पिता को जब यह बात पता चली, तो उन्होंने अपना ऑपरेशन टाल दिया और यह पैसा गरीबों की मदद के लिए दे दिया। अब माहिनूर 'सपोर्ट माहिनूर' अभियान के जरिये गरीबों को राशन मुहैया करा रही हैं।  

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पिता के ऑपरेशन के लिए जमा किए थे पैसे..एक दिन ऐसी इमोशनल हुई लेडी कांस्टेबल कि ले बैठी अलग तरह का फैसला

लॉकडाउन में माहिनूर खातून न सिर्फ पुलिस की ड्यूटी कर रही हैं, बल्कि वक्त निकालकर लोगों की मदद के लिए भी आगे आई हैं। वे जरूरतमंदों तक राशन पहुंचा रही हैं। माहिनू पूर्व बर्दवान जिले में रहती हैं।

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माहिनूर के पिता मसूद चौधरी की जल्द कॉर्डियक सर्जरी होनी है। लेकिन फिलहाल इसे टाल दिया गया है। वे खुशी जताते हैं कि उनकी बेटी एक नेक काम कर रही है।
 

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माहिनूर जिस इलाके में रहती हैं, वहां ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर रहते हैं। कोई रिक्शा चलाता है, तो कोई सब्जी का ठेला। लॉकडाउन के कारण सबके लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में माहिनूर उनके लिए मसीहा बनकर सामने आई हैं।

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माहिनूर खुद भी एक गरीब फैमिली से हैं। उनकी मां पेपर बैग बनाकर बेचती थीं। वहीं, पिता ट्रक ड्राइवर रहे हैं। लेकिन उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं रहने दी।

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माहिनूर कहती हैं कि उनके पड़ोसी बड़ी मुश्किल में हैं। जब उन्होंने देखा कि वे एक-दूसरे को आलू-चावल देकर मदद कर रहे हैं, तो हमने भी उनके लिए कुछ करने की सोची।

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माहिनूर को 40000 रुपए महीने सैलरी मिलती है। इसमें वे अपने मां-बाप की देखभाल के अलावा लोगों की मदद कर रही हैं। खातून ने मिलाप संस्था की मदद से अप्रैल में 'सपोर्ट माहिनूर' अभियान शुरू किया था। इससे उन्होंने करीब 6 लाख रुपए जुटाए। इससे 10,000 राशन के पैकेट बांटे गए।

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माहिनूर पिछले 12 साल से पुलिस की नौकरी में हैं। वे कहती हैं कि उन्होंने पड़ोसियों की ऐसी बुरी हालत पहले कभी नहीं देखी। 

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