Published : Sep 19, 2021, 07:10 PM ISTUpdated : Sep 19, 2021, 07:34 PM IST
जालंधर. (पंजाब). कैप्टन अमरिंदर सिंह के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद सबके मन में यही सवाल था कि आखिर कौन पंजाब का मुख्यमंत्री होगा। दो बार की विधायक दल की बैठक के बाद भी फैसला नहीं हो सका। आखिरकार दिल्ली में बैठे पार्टी आलाकमान ने बैठकों और मंथनों के बाद चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब की कमान सौंप दी है। वह अब पंजाब के नए मख्यमंत्री होंगे।
इनका नाम चौकाने वाला है, क्योंकि सीएम की रेस में उनका नाम दूर-दूर तक नहीं था लेकिन विधायक दल की बैठक के बाद पाटी हाईकमान ने चन्नी पर मुहर लगाई। जितने भी नाम चर्चा में थे उनमें से किसी को भी पंजाब की कुर्सी नहीं मिली है। सुबह वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी का नाम सामने आया, लेकिन उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिए, इसके बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम पर सहमति बनी। लेकिन वह भी रेस से बाहर हो गए।
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चरणजीत सिंह चन्नी की कुर्सी देने की दूसरी सबसे बड़ी वजह यह है कि वह एक दलित चेहरा हैं। एक सर्वे के मुताबिक, भारत में सबसे अधिक दलित सिख पंजाब में हैं. इनकी संख्या लगभग 32% है, दलित सिख चेहरा होना उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने के सबसे बड़ा कारण हैं। कांग्रेस दलित कार्ड के नाम पर आने वाला 2022 का विधनासभा साधने के मूड में है।
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चन्नी की सीएम बनाने की तीसरी वजह कैप्टन की चेतावनी भी मानाी जा रही है। क्योंकि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने साफ तौर पर कह दिया था कि अगर पार्टी ने नवजोत सिंह सिद्धू या सिद्धू के किसी करीबी को मुख्यमंत्री बनाया तो उसे फ्लोर टेस्ट से गुजरना पड़ेगा। हो सकता था कि सिद्धू और रंधावा के मुख्यमंत्री बनाए जाने पर कैप्टन बगावती तेवर अपना सकते थे।
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बता दें कि चरणजीत सिंह युवा कांग्रेस से भी जुड़े रहे हैं और इस दौरान वे राहुल गांधी के करीब आए थे। बताया जा रहा है उनको गांधी परिवार का करीबी माना जाता रहा है। इसलिए पार्टी ने उनके नाम पर भरोसा जताया है।
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चरणजीत सिंह चन्नी चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीसरी बार विधायक बने हैं। वह 2015 से 2016 तक पंजाब विधानसभा में 2007 में वो पहली बार निर्दलीय चुनाव जीते थे इसके बाद उन्होंने दो बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता। विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं। उन्होंने सुनील जाखड़ का स्थान लिया था। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने आम आदमी पार्टी के चरनजीत सिंह को करीब 12000 वोटों के अंतर से हराया था
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बता दें कि चरणजीत सिंह चन्नी 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार में उन्हें टेक्निकल एजुकेशन और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग मंत्री बनाया गया था। उन्होंने पिछले महीने अगस्त में ही सिद्धू के साथ मिलकर अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला था, उनको कैप्टन का घुर विरोधी माना जाता है।
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