3-3 फीट के अंतर पर जलाईं 22 अर्थियां, चिता देखते ही गश खाकर गिर पड़े परिजन..लपटों से तेज थीं चीखें

Published : Feb 27, 2020, 05:39 PM IST

कोटा (राजस्थान). बूंदी हादसे में मारे गए 24 लोगों के शवों को जब कोटा के किशोरपुरा मुक्तिधाम में लाया गया तो वह हर कोई सहम गया। पूरे शहर में कोहराम और हाहाकार मच गया। आलम यह था कि अंतिम संस्कार करने के लिए शमशान में अलग से एक शेड बनाया गया। मुक्तिधाम में तीन-तीन फीट के अंतर से 22 अर्थियां जलाई गईं। बता दें, 26 फरवरी दिन बुधवार सुबह 10 बजे बूंदी की मेज नदीं में एक बारातियों से भरी बस गिर गई थी। बस में कुल 30 लोग सवार थे। जिसमें 24 की मौके पर मौत हो गई, जबकि 6 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे में मारे गए मामा पक्ष अपनी भांजी प्रीति की शादी के लिए कोटा से सवाई माधोपुर जा रहा था।    

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3-3 फीट के अंतर पर जलाईं 22 अर्थियां, चिता देखते ही गश खाकर गिर पड़े परिजन..लपटों से तेज थीं चीखें
जब एक साथ इतने लोगों का अंतिम संस्कार किया गया तो लोग बोले-हमने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसा दुखद दिन कभी नहीं देखा। जहां एक साथ एक ही परिवार से संबंध रखने वाले 22 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया हो।
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मुक्तिधाम में हर तरफ मौत की चीखे सुनाई दे रहीं थीं। मृतकों के परिजन इस हादसे में जान गंवाने वाले के शव को देखकर गश खाकर गिर रहे थे। अंतिम यात्रा में आए लोग किसी तरह से उनको संभाल रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत बड़ी त्रासदी हो गई हो।
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पुलिस और प्रशासन ने 22 शवों को एक साथ मुक्तिधाम तक ले जाने के लिए जवाहर नगर से किशोरपुरा मुक्तिधाम करीब 4 किलोमीटर में ग्रीन कॉरिडोर बनाया था।
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इस दर्दनाक एक्सीडेंट में मरने वालों में दो परिवार ऐसे थे, जिनमें पति-पत्नी और एक-एक बच्चे की मौत हो गई और एक-एक बच्चा बच गया। जैसे ही गांव के लोगों को इस हादसे की खबर लगी तो पूरा गांव मृतकों के घर नम आंखों से दौड़ पड़ा। परिजन बुरी तरह चीख-चीखकर अपने बेटे-बहू का नाम ले रहे थे।
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कोटा में जिस रास्ते से भी मृतकों की अर्थियां निकलीं लोग सड़क किनारे खड़े होकर उनको प्रणाम कर रहे थे। सब जुबान पर बस यही था कि भगवान अब ऐसा किसी के साथ नहीं करना।

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