राजस्थान की बालिका वधु: 8 की उम्र में शादी, पति ने ऑटो चलाकर शादी के 17 साल बाद पत्नी को बनाया डॉक्टर

Published : Dec 26, 2022, 10:48 AM ISTUpdated : Dec 26, 2022, 12:49 PM IST

जयपुर. करीब एक दशक पहले टीवी पर आने वाला एक सीरियल बालिका वधू हम सभी को याद होगा। कैसे उसमें एक छोटी सी उम्र में एक लड़की की शादी करवा दी जाती है। लड़की अपने बलबूते पर बहुत कुछ करना चाहती है। आखिरकार होता भी ऐसा ही है कि उसके ससुराल वाले उसको सपोर्ट करते हैं और वह अपने मुकाम हासिल कर लेती है। राजस्थान की भी एक ऐसी ही लड़की है। जिसकी शादी 8 साल की उम्र में हो गई। लेकिन उसका सपना डॉक्टर बनने का था। जब उसने यह बात अपने ससुराल वालों को बताई तो ससुराल वालों ने भी उसे काफी सपोर्ट किया। जिसके बाद अब वही लड़की 17 साल बाद एक डॉक्टर बन चुकी है। बता दें कि महिला की इस कामयाबी में पति का बहुत बड़ा रोल है, पति ने ऑटो-रिक्शा चलकार उसे पढ़ाया-लिखाया।

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राजस्थान की बालिका वधु: 8 की उम्र में शादी, पति ने ऑटो चलाकर शादी के 17 साल बाद पत्नी को बनाया डॉक्टर

दरअसल, हम बात जिस होनहार लड़की की बात कर रहे हैं वो राजधानी जयपुर के चौमू इलाके की रहने वाली रूपा यादव की। जिसके पिता माली राम ने गरीबी के चलते 8 साल की उम्र में उसकी शादी करवा दी थी। पिता ने विवाह तो करा दिया लेकिन बेटी के सपने को नहीं दबा पाए। 

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 शादी के बाद रूपा के ससुर कानाराम और बिदामी ने पहले तो बहू की बात को तवज्जो नहीं दिया। लेकिन फिर जैसे-जैसे रूपा पढ़ती गई। तो उसे मिलने वाले पुरस्कारों को देखकर सास-ससुर भी खुद को नहीं रोक पाए और उसे सपोर्ट करना शुरू कर दिया। रूपा ने 10वीं 12वीं में पहले तो 80% से ज्यादा अंक हासिल किए। 

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यूं ही नहीं कि रूपा केवल पढ़ाई में ही लगी रहती। वह खेत से लेकर चूल्हा चौका और हर एक वह काम करती जोक ससुराल में एक बहू करती है। शुरू से ही रूपा को डॉक्टर बनने का मन था। ऐसे में उसने नीट की तैयारी करना शुरू कर दिया। 11वीं क्लास में तो रूपा के हालात यह थे कि उसे गांव से 3 किलोमीटर दूर पैदल पढ़ने के लिए जाना होता था। 

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पहले तो साल 2016 में रूपा ने नीट की एग्जाम क्लियर कर ली। जिसके बाद रूपा को डॉक्टरी के लिए महाराष्ट्र स्टेट अलॉट हुआ। लेकिन परिवार वाले उसे दूर नहीं भेजना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने रूपा को दूर नहीं भेजा। फिर 2017 में जब नीट का रिजल्ट आया तो रूपा के ससुराल वालों ने भी उसे खुशी-खुशी भेज दिया।

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इसके बाद एमबीबीएस करते हुए तीसरे साल में रूपा प्रेगनेंट हो गई। लोगों ने तो रूपा को काफी बार कहा कि वह है इस बच्चे को ठुकरा दे। लेकिन रूपा ने किसी की भी एक नहीं सुनी और अपने बच्चे को जन्म भी दिया और डिलीवरी के 1 महीने बाद ही एग्जाम देने के लिए चली गई। रूपा इस बारे में बताती है कि उनके चाचा भीमाराम की कई सालों पहले हार्ट अटैक से मौत हुई थी। तब से ही रूपा ने सोच लिया था कि चाहे कुछ भी हो उसे डॉक्टर ही बनना है।

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बता दें कि रूपा ने एग्जाम 2017 में 603 अंक प्राप्त किए हैं, उसको आल इंडिया में 2283वीं रैंक मिली थी। इस रैंक पर उन्हें बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिल गया। कॉलेज की फीस और हॉस्टल खर्च इतना था कि उसके पास इसके लिए दिक्कत थी वो यह कैसे भरे। हालांकि उस समय राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे आगे आईं और बीकानेर कलेक्टर अनिल गुप्ता को रूपा की मदद के लिए निर्देश दिए।

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