भगवान राम के अयोध्या लौटने के अलावा इन 10 वजहों से भी मनाई जाती है दिवाली

Published : Oct 23, 2022, 11:38 AM IST

Diwali Celebration Different Reason: दिवाली के त्योहार में अब सिर्फ 2 दिन रह गए हैं। इस बार दिवाली 24 अक्टूबर को देश के साथ ही पूरी दुनिया में धूमधाम के साथ मनाई जाएगी। लंका के राजा रावण का वध करने के बाद जब भगवान राम अयोध्या लौटे तो उनके स्वागत में नगरवासियों ने घी के दीपक जलाए। इसीलिए दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। हालांकि, दिवाली मनाने की पीछे और भी कई कहानियां हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों को इनके बारे में पता नहीं है। दिवाली से पहले हम बता रहे हैं इस त्योहार को मनाने के पीछे कुछ और वजहें, जिनके बारे में कम ही लोगों को पता है। 

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भगवान राम के अयोध्या लौटने के अलावा इन 10 वजहों से भी मनाई जाती है दिवाली

1- नरकासुर का वध : 
मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। नरकासुर ने 16,000 महिलाओं को बंदी बना रखा था, जिन्हें कृष्ण ने उसका वध करके मुक्त कराया था। इसलिए 5 दिनों तक चलने वाले दिवाली के त्योहार में एक दिन इसी विजय के लिए मनाया जाता है।

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2- अज्ञातवास से हस्तिनापुर लौटे पांडव :  
कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन पांडव 12 साल के वनवास और एक साल के अज्ञातवास के बाद वापस आए थे। पांडवों को मानने वाली प्रजा ने इस दिन दीप जलाकर उनका स्वागत किया था और तब भी प्रजा ने धूमधाम से दिवाली का त्योहार मनाया था। 

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3- राजा बलि के लिए जलाए गए थे दीपक : 
भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि दान में लेकर उनका सर्वस्व ले लिया था। बदले में उन्हें सुतल लोक का राजा बना दिया था। सुतल में रहने वाले लोगों को जब ये पता चला तो उन्होंने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। वहीं स्वर्ग के सुरक्षित होने पर भी देवताओं ने दीपोत्सव मनाया था। तभी से दिवाली मनाने की परंपरा चली आ रही है।  

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4- स्वर्ग में लौटी थीं देवी लक्ष्मी : 
मान्यता है कि दुर्वासा ऋषि ने एक बार गुस्से में इंद्र को शाप दिया था कि स्वर्ग श्रीविहिन हो जाएगा। इस शाप के चलते देवी लक्ष्मी को स्वर्ग सहित भगवान विष्णु को छोड़कर समुद्र में जाना पड़ा था। इसके बाद देवताओं और असुरों में युद्ध हुआ और समुद्र मंथन किया गया। समुद्र मंथन में 14 रत्नों के साथ ही देवी लक्ष्मी भी प्रकट हुई थीं। कहा जाता है कि दिवाली के दिन ही देवी लक्ष्मी ने भगवान नारायण से विवाह किया था। तभी से दिवाली मनाई जाने लगी। 

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5- विक्रमादित्य का राजतिलक : 
इस दिन सनातन धर्म के महान राजा विक्रमादित्य का राजतिलक हुआ था। इसलिए भी दिवाली एक ऐतिहासिक त्योहार है। महर्षि दयानंद ने इस दिन निर्वाण की प्राप्ति की थी। इसलिए भी दिवाली एक खास त्योहार है।
 

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6- भगवान महावीर का निर्वाण :   
यह दिन जैन समुदाय के लिए भी खास है। इस दिन 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर ने निर्वाण की प्राप्ति की थी। कार्तिक मास की चतुर्दशी के दिन महावीर को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इसलिए जैन समुदाय भी दिवाली मनाता है। 

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7- बंदी छोड़ दिवस : 
सिख समुदाय के लिए भी दिवाली का त्योहार बेहद खास है। इस दिन छठे सिख गुरु हरगोबिंद को 52 अन्य हिंदू राजाओं के साथ ग्वालियर के किले में कैद से छोड़ा गया था। बता दें कि इन्हें मुगल सम्राट जहांगीर ने कैद कर लिया था। 

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8- स्वामी दयानंद सरस्वती का निर्वाण : 
कार्तिक अमावस्या के दिन ही आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती को निर्वाण प्राप्त हुआ था। यही वजह है कि आर्य समाज के लोगों के लिए भी दिवाली का त्योहार बेहद खास है। 

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9- देवी काली का कमलात्मिका अवतार :   
शक्तिवाद के कलिकुला संप्रदाय के मुताबिक, देवी महाकाली के अंतिम अवतार कमलात्मिका के अवतार के दिन को कमलात्मिका जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह दिवाली के दिन ही होती है। बता दें कि बंगाल के अलावा, मिथिला, ओडिशा, असम और सिलहट क्षेत्रों में इसे मनाया जाता है। 

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10- कई जगहों पर दिवाली नए साल का प्रतीक :  
इसके अलावा भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात और उत्तर भारत के कुछ हिंदू समुदाय में दिवाली का त्योहार नए साल का प्रतीक भी है। इसके अलावा कुछ जगहों पर दिवाली को फसल उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। ये त्योहार सर्दी से पहले आखिरी फसल के प्रतीक के तौर पर भी मनाया जाता है।   

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