Published : Jun 18, 2021, 02:04 PM ISTUpdated : Jun 18, 2021, 02:27 PM IST
नई दिल्ली. कोरोना महामारी की दूसरी लहर में संक्रमण का असर पानी में भी दिख रहा है। अहमदाबाद के साबरमती, चंदोला और कांकरिया झीलों के पानी के सैंपल टेस्ट किए गए, जिसके बाद पानी में वायरस का पता चला है। रिसर्च IIT गांधीनगर और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान स्कूल के शोधकर्ताओं ने किया है।
'खतरनाक स्थिति पैदा हो सकती है'
IIT गांधीनगर में अर्थ साइन्स विभाग के प्रोफेसर मनीष कुमार ने कहा कि झीलों और नदियों में SARS-CoV-2 की मौजूदगी से खतरनाक स्थिति पैदा हो सकती है।
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प्रोफेसर मनीष कुमार ने कहा कि उन्होंने 3 सितंबर से 29 दिसंबर 2019 के बीच हर हफ्ते एक बार पानी के सैंपल कलेक्ट किए थे। जबकि साबरमती नदी से 694 सैंपल कलेक्ट किए गए। 549 चंदोला झील से और 402 कांकरिया झील से सैंपल लिए गए।
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शोधकर्ता ने कहा कि वे इसी तरह की टेस्टिंग पूरे देश में करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वायरस नदियों (प्राकृतिक जल) में बहुत लंबे समय तक रह सकता है।
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कर्नाटक के बेंगलुरु में सीवेज सर्विलांस सिस्टम शुरू किया गया है। भारत में इस तरह का प्रयोग करने वाला कर्नाटक पहला राज्य है।
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इससे पहले उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा नदी में कोविड-19 संक्रमित व्यक्तियों के शव तैरते पाए गए थे। स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि 100 से अधिक शवों को नदी में फेंक दिया गया था।
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