Published : May 17, 2022, 11:33 AM ISTUpdated : May 17, 2022, 11:34 AM IST
नई दिल्ली। यूक्रेन और रूस के बीच करीब ढाई महीने से जंग जारी है। इस युद्ध में यूक्रेन को अब तक अरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है। वहीं, सैंकड़ों लोगों की मौत हुई, जबकि लाखों लोग शरणार्थी का जीवन जीने को मजबूर हैं। युद्ध अगर रूकता है भी है जनजीवन इतना अस्त-व्यस्त हो चुका है कि सोचने में शायद महीनों लग जाएं कि शुरुआत कहां से की जाए। ऐसे में सोशल मीडिया पर लवीव शहर में कार कुछ फोटो वायरल हो रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि इनके मालिकों ने नुकसान से बचाने के लिए इसे पर्शियन कारपेट से कवर कर दिया है। इनमें सोवियत युग की जिगुली कार ज्यादा ट्रेंड कर रही। आइए तस्वीरों में देखते हैं इन कारों को कारपेट से कवर करने के बाद कैसा लुक आया है।
रूसी संघ में आज भी सोवियत युग से जुड़ी कई कलाकृतियां देखी जा सकती हैं। युद्ध के बीच लवीव शहर में बहुत से ऐसे लोग अब भी हैं, जो अपना घर छोड़कर नहीं गए। इन्हें जान के साथ-साथ माल की भी चिंता है। शायद इसी वजह से इस कार के मालिक ने इसे पर्शियन कारपेट से कवर कर दिया।
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जिगुली के नाम से मशहूर यह कार कंपनी काफी पुरानी मगर लोकप्रिय है। सोशल मीडिया पर कारपेट से कवर किए जाने के बाद इसका जो नया लुक सामने आया है, उसने सभी को लुभाया है। देखने वालों की नजर एक बारगी इस कार पर ठहर तो जाती ही है।
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वहीं, दावा किया जा रहा है कि करीब ढाई महीने तक रूसी सैनिकों से लोहा लेने के बाद यूक्रेन ने आखिरकार मारियुपोल शहर में हार मान ली है। बताया जा रहा है कि इस शहर में यूक्रेन सरकार ने अपना सैन्य अभियान पूरी तरह बंद कर दिया है।
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मारियुपोल शहर में यूक्रेन सरकार की ओर से हार मान लिए जाने के बाद रूसी सैनिक अब दोगुने जोश में हैं। हालांकि, अब उन्होंने इस शहर को निशाना बनाना बंद कर दिया है और एक स्टील फैक्ट्री में छिपकर रूसी सैनिकों के खिलाफ जंग लड़ रहे यूक्रेन के सैनिकों को अब बाहर निकाला जा रहा है।
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यूक्रेन सरकार ने मारियुपोल शहर में युद्ध रूकने के बाद से अब तक ढाई सौ से ज्यादा सैनिकों को बाहर निकाला है। यह सभी सैनिक बुरी तरह से घायल हैं और इन्हें तत्काल इलाज की सख्त जरूरत है। अब तक युद्ध की वजह से इन्हें निकाला नहीं जा सका था।
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मारियुपोल शहर में हार मानने के बाद यूक्रेन का यह बेहद महत्वपूर्ण शहर को जो कूटनीतिक और रणनीतिक दोनों तरह से यूक्रेन के लिए फायदेमंद अब पूरी तरह रूसी सेना के कब्जे में है। इसे रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
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बता दें कि यूक्रेन की सेना की ओर से इस बारे में आधिकारिक बयान जारी किया गया है। इसमें बताया गया है कि मारियुपोल शहर की सुरक्षा के लिए तैनात किए गए सैनिकों ने अपना मिशन पूरा कर लिया है। उन्हें आदेश दिया गया है कि सबसे पहले घायल सैनिकों का इलाज कराएं और उनकी जान बचाएं।
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वहीं, यूक्रेन की सेना की ओर से अपने सैनिकों को हीरो की तरह से पेश किया गया है। इसमे बताया गया कि अभियान में हिस्सा लेने वाले सैनिकों का नाम इतिहास में दर्ज हो गया है। खास तौर पर अजाेव यूनिट जिसने इस लड़ाकू मिशन में साहस का परिचय दिया है।
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बहरहाल, यूक्रेन के डिप्टी डिफेंस मिनीस्टर हन्ना मालियार ने सोमवार रात को बताया कि रूस के सैनिकों को नोवाअजोस्क सिटी पर कब्जा है। यहां यूक्रेन के 53 सैनिक बुरी तरह घायल अवस्था में थे। युद्ध समाप्ति की घोषणा के बाद सबसे पहले इन सैनिको को निकाला जा रहा है।
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यूक्रेन के डिप्टी डिफेेंस मिनीस्टर ने यह भी बताया कि ओलेनिवका कस्बे में भी 200 अन्य घायल सैनिकों को अब तक निकाला जा चुका है। ये बुरी तरह घायल हैं और इन्हें इलाज की सख्त जरूरत है। वहीं, स्टील फैक्ट्री में भी कई सैनिक फंसे हुए हैं, जिन्हें बाहर निकाला रहा है।
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