इंग्लैंड (England). डॉक्टर्स कई बार सुझाव देते हैं माता-पिता को अपने बच्चों के साथ ऐसा संबंध बनाए रखना चाहिए, जिससे की बच्चा हर बात शेयर कर सके। ये बात इसलिए कही जा रही है, क्योंकि ऐसा नहीं होने की वजह से 11 साल की एक बच्ची ने फांसी लगाकर खुद की जान दे दी। बच्ची जिंदा रहते हुए अपनी मां को ऐसी बात बताना चाहती थी, जिससे वह काफी दिनों से परेशान थी, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हुई। फिर उसने तय किया कि जान देकर वह अपनी बात मां को बताएगी। इसके बाद उसने खुद को फांसी के फंदे से लटका लिया। जानें क्या है non binary और इसमें क्या परेशानी है...?
11 साल की लड़की मां को बताना चाहती थी कि वह नॉन बाइनरी थी। नॉन-बाइनरी उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिनके लिंग की पहचान पुरुष या महिला के रूप में नहीं होती है। आत्महत्या से पहले लड़की ने मां के नाम एक नोट छोड़ा, जिसमें कहा कि वह नॉन बाइनरी है।
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लड़की का नाम केन्या मोरेनो मोलोंगुआ था। उसने अपनी मां को लेटर लिखा और कहा कि वह बहुत दुखी है। केन्या स्पेन में पैदा हुई और अपनी मौसी के साथ रह रही थी। मौत से कुछ समय पहले वह बहुत ही सामान्य लग रही थी। केन्या की चाची ने पूछताछ में बताया कि वह अपने लिंग को लेकर लगातार परेशान थी। लेकिन उसने इस बात का जिक्र नहीं किया। वह बहुत खुश रहती थी। मजेदार थी। सबके साथ खेलती। उसे देखकर लगता ही नहीं था कि वह किस दौर से गुजर रही है।
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मौत से दो या तीन दिन पहले केन्या ने कहा था कि वह सामान्य लड़की नहीं है। केन्या रात करीब साढ़े 8 बजे कुछ नूडल्स लेने के लिए नीचे आई और अपनी दादी से मजाक कर रही थी। लेकिन रात करीब 9.30 बजे केन्या की दादी के चीखने की आवाज सुनाई दी।
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सेंट्रल बेडफोर्डशायर कोरोनर कोर्ट में पूछताछ में बताया गया कि वह ऊपर की ओर दौड़ी और उसने देखा कि उसकी मां केन्या की मदद करने की कोशिश कर रही है। पैरामेडिक्स और डॉक्टरों के आने से पहले केन्या के परिवार ने सीपीआर शुरू कर दिया, लेकिन केन्या की मौत हो चुकी थी।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केन्या अपनी मां के साथ रहना चाहती थी। लेकिन वह अपने लिंग की पहचान से जूझ रही थी। ऐसे में उसे अपनी मां की जरूरत थी। लेकिन कुछ पारिवारिक कारणों की वजह से मां बेटी अलग अलग रहते थे। यही वजह है कि केन्या अपनी दिक्कत अपनी मां को नहीं बता सकी।
नोट- इस खबर में इस्तेमाल की गईं सभी तस्वीरें सांकेतिक हैं।