Published : Aug 27, 2021, 09:23 AM ISTUpdated : Aug 27, 2021, 09:27 AM IST
काबुल. हामिद करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ठीक सामने दो आत्मघाती हमले में 80 लोग से ज्यादा की मारे जाने की खबर है। मरने वालों में अधिकतर बच्चे और महिलाएं हैं। हमले में 12 मरीन कमांडो भी मारे गए। अमेरिका सहित कई देशों ने पहले ही एयरपोर्ट पर ब्लास्ट की चेतावनी दी थी। बावजूद इसके इसे रोका नहीं जा सका। ऐसे में चश्मदीद के जरिए ब्लास्ट के बाद की पूरी कहानी बताते हैं। मैंने बॉडी पार्ट्स को हवा में उड़ते हुए देखे...
कार्ल नाम का व्यक्ति ब्लास्ट के वक्त विमान के इंतजार में एयरपोर्ट के बाहर खड़ा था। लाइन में अपने विमान का इंतजार कर रहा था। उसने बताया, उसकी बाहों में एक बच्ची ने दम तोड़ा। विस्फोट से मारे गए और घायल हुए अमेरिकी सैनिक पासपोर्ट की जांच कर रहे थे।
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कार्ल ने बताया कि वह यूएस मरीन के लिए ट्रांसलेटर का काम करता था। वह हामिद करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाहर देश से बाहर ले जाने के लिए लाइन में इंतजार कर रहा था। भीड़ के अंदर एक तेज विस्फोट हुआ। बहुत सारे लोग घायल हो गए। मुझे एक बच्ची मिली। वह 5 साल की थी। मेरे हाथों ही मर गई।
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कार्ल ने आगे कहा, कुछ अमेरिकी बुरी तरह घायल हुए। लोग इधर-उधर भाग रहे थे। वहां तैनात सैनिक पीड़ितों को अपने गाड़ियों में हॉस्पिटल ले जा रहे थे। यह एक नहर के पास हुआ। अमेरिकी नहर के दूसरी ओर थे। वे लोगों के पासपोर्ट और सामान की जांच कर रहे थे। जिन लोगों के पास वीजा था, वे उन्हें एयरपोर्ट से ले जा रहे थे।
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कार्ल ने कहा, ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे पैरों के नीचे से जमीन खींच ली हो। एक पल के लिए मुझे लगा कि मेरे कान के परदे फट गए। सुनने की क्षमता खत्म हो गई है।
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उन्होंने कहा, मैंने बॉडी के पार्ट्स को हवा में उड़ते हुए देखा। जैसे हवा में प्लास्टिक की थैलियां हों। मैंने विस्फोट वाली जगह पर शव के चीथड़े, बुजुर्ग और बच्चों की लाशें बिखरी हुई देखी।
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कार्ल ने कहा कि इस जिंदगी में कयामत देखना संभव नहीं है, लेकिन इस ब्लास्ट में मैंने कयामत देखी। नहर का पानी खून में बदल गया। अचानक गोलियों की आवाज सुनाई दी। गाड़ियों को निशाना बनाया गया। अगर हमारा ड्राइवर संभला नहीं होता तो उसे एके-47 से गोली मार दी जाती।
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विस्फोट में कम से कम 12 अमेरिकी सैनिक मारे गए। 11 मरीन और एक नौसेना का डॉक्टर। एक अफगान अधिकारी ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि हमले में कम से कम 60 अफगान मारे गए और 143 अन्य घायल हो गए।
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पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने आत्मघाती विस्फोटों को घातक हमला कहा। अफगानिस्तान में ISIS सहयोगी ISIS-K ने हमलों की जिम्मेदारी ली है। टोलो न्यूज ने कई तस्वीर पोस्ट की, जिसमें बताया गया है कि खून से लथपथ लोगों को ठेले वाली गाड़ियों में धकेला जा रहा है।