Published : Jun 15, 2021, 12:16 PM ISTUpdated : Jun 15, 2021, 01:03 PM IST
गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प के एक साल पूरे हो गए। 15 जून 2020 को भारतीय सैनिकों ने अपने अदम्य साहस का एक बार फिर से परिचय दिया था। शहीद गुरतेज सिंह वह पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने गलवान में चीन की साजिश का पता लगाया। गुरतेज सिंह ऑपरेशनल पेट्रोलिंग के स्काउट में थे। उन्हें गलवान घाटी में पेट्रोलिंग का काम सौंपा गया था। उन्हें मरणोपरांत गणतंत्र दिवस 2021 पर वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
शहीद गुरतेज सिंह का जन्म 15 नवंबर 1997 को पंजाब के मनसा जिले के गांव बिरेवाला डोगरान में हुआ था। उन्होंने 18 दिसंबर 2018 को भारतीय सेना की पंजाब रेजिमेंट ज्वॉइन की।
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पंजाब रेजिमेंट सेंटर में ट्रेनिंग के बाद उन्हें 14 अक्टूबर 2019 को तीसरी बटालियन पंजाब रेजिमेंट में तैनात किया गया था। उस समय बटालियन को सियाचिन में उत्तरी ग्लेशियर में तैनात किया गया था। उन्होंने सियाचिन में मलौन पोस्ट, बिला कॉम्प्लेक्स (ऊंचाई-18018 फीट) में तैनाती दी थी।
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15 जून 2020 को पेट्रोलिंग के दौरान उन्होंने भारतीय सैनिकों के खिलाफ चीनी सैनिकों को पोस्ट बनाते हुए देखा। कुछ देर बाद ही दोनों पक्षों का आमना-सामना हुआ। खूनी झड़प के दौरान भारतीय सैनिकों ने दुश्मन को खदेड़ दिया।
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चीनी सैनिकों पर घातक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप लगा। इसके बाद भी भारतीय सैनिकों ने उनका डटकर मुकाबला किया। चीनी सैनिक पीछे हटने पर मजबूर हो गए।
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शहीद गुरतेज सिंह के परिवार में उनके बुजुर्ग माता-पिता और एक भाई है। उनके पिता विरसा सिंह एक किसान हैं। मां प्रकाश कौर गृहिणी हैं। परिवार पंजाब के मनसा जिले के बीरेवाला डोगरान गांव में रहता है।
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