पूरा गांव जला देता था, बच्चों को काट देता था...उस राक्षस की कहानी, जिसकी क्रूरता देख तालिबान भी कांपता था

Published : Aug 18, 2021, 05:21 PM ISTUpdated : Aug 18, 2021, 05:25 PM IST

काबुल. तालिबान (Taliban) अपनी क्रूरता के लिए जाना जाता है, लेकिन आज एक ऐसे शख्स के बारे में बताते हैं जिससे क्रूर तालिबान भी डरता है। हम बात कर रहे हैं मुल्ला दादुल्ला की। इसे तालिबान लड़ाकों में सबसे क्रूर माना जाता है। मन में सवाल आ रहा होगा कि ऐसा क्यों? तस्वीरों के जरिए मुल्ला दादुल्ला की क्रूरता की कहानी...

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पूरा गांव जला देता था, बच्चों को काट देता था...उस राक्षस की कहानी, जिसकी क्रूरता देख तालिबान भी कांपता था

तालिबान की रीढ़ माना जाता था
मुल्ला दादुल्ला के बारे में जानने के लिए 1990 में जाना होगा। जब तालिबान अफगानिस्तान में उभर रहा था। तब मुल्ला दादुल्ला को इस्लामी कट्टरपंथी समूह की रीढ़ माना जाता था। तालिबान के अंदर तालिबान प्रमुख मुल्ला उमर के साथ उसकी तुलना की जाती थी। दोनों को लगभग समान अधिकार मिले थे।
 

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मुल्ला ने अपना पैर गंवा दिया
मुल्ला उमर और मुल्ला दादुल्ला दोनों ने 1980 के दशक में सोवियत सेना के खिलाफ मुजाहिदीन के रूप में लड़ाई लड़ी। मुल्ला उमर ने जहां अपनी एक आंख गंवाई, वहीं मुल्ला दादुल्ला ने अपना एक पैर गंवा दिया। 
 

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पूरा गांव जला देता था मुल्ला
मुल्ला दादुल्ला के बारे में बताया गया जाता है कि उसने पूरा का पूरा गांव जला दिया था। उसने तालिबान का आदेश दिया था कि जहां भी तालिबान का विरोध हो वहां सभी को मार डालो। यह वह था, जिसे दुश्मनों के सिर काटने का श्रेय दिया जाता है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि वह बच्चों को भी नहीं छोड़ता था। 
 

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बच्चों की बेरहमी से हत्या करता था
बच्चों की हत्या की खबर जब मुल्ला उमर तक पहुंची तो वो भी परेशान हो गया। उसने 1997 में मुल्ला दादुल्ला को पद से बर्खास्त कर दिया था। लेकिन वह आत्मघाती हमलावरों सहित हजारों हथियारबंद लोगों को अपने साथ होने का दावा करते हुए वापस आ गया। 
 

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हजारों लोगों को मरवा दिया था
2000 में मुल्ला दादुल्ला ने अपनी सेना को अफगानिस्तान के बामयान प्रांत में नरसंहार करने का आदेश दिया। हजारा पश्तून तालिबान का विरोध कर रहे थे। मुल्ला दादुल्ला के आदेश पर हजारों को मार दिया गया। 
 

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मुल्ला जैसा था पीर आगा
मु्ल्ला दादुल्ला का उत्तराधिकारी पीर आगा को माना जाता है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि जब पीर आगा 8 से 80 साल के महिला और पुरुषों को एक गांव में इकट्ठा करता था, फिर उन्हें एक एक कर गोली मार देता था। पीर आगा 2018 में नाटो छापे में मारा गया था।
 

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2007 में मारा गया दादुल्ला
अफगान अधिकारियों ने 13 मई 2007 को खबर दी कि दादुल्ला हेलमंद प्रांत में अफगान और नाटो बलों की छापेमारी में मारा गया। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, दादुल्ला को गेर्शक जिले में मारा गया था, जबकि अन्य का दावा है कि वह संगीन और नारी सरज जिले के पास मारा गया था। कंधार प्रांत के गवर्नर असदुल्ला खालिद ने अपने सरकारी आवास पर दादुल्ला के शव को प्रदर्शन के लिए रखा। शरीर पर तीन गोलियां लगने के निशान थे, दो धड़ में और एक सिर के पिछले हिस्से में। 7 जून 2007 को तालिबान ने कहा कि चार अफगान स्वास्थ्य मंत्रालय के कर्मचारियों के बदले में दादुल्ला की बॉडी उन्हें वापस कर दिया गया था, जिन्हें बंधक बना लिया गया था। इसके बाद कंधार में उसको दफनाया गया। 

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