उज्जैन. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में ग्रहों की स्थिति के आधार पर कई शुभ और अशुभ योग बनते हैं। इनमें से कुछ दोष बहुत हानि पहुंचाने वाले होते हैं, कालसर्प योग (Kalsarp Dosh Upay) भी इनमें से एक है। इसलिए इसे योग न कहकर दोष कहा जाता है। कुछ विशेष उपाय करने से इस दोष के अशुभ प्रभाव का कम किया जा सकता है। ये उपाय यदि खास तिथियों पर किए जाएं तो और भी शुभ फल मिलते हैं। ऐसी ही तिथि है मौनी अमावस्या। इस बार मौनी अमावस्या 21 जनवरी, शनिवार को है। इस दिन 4 राजयोग- हर्ष, वरिष्ठ, सत्कीर्ति और भारती बन रहे हैं, जिसके चलते ये तिथि और भी खास हो गई है। आगे जानिए इस दिन कालसर्प दोष शांति के लिए कौन-से उपाय करें…
राहु-केतु के उपाय करें
ज्योतिषियों के अनुसार, कालसर्प दोष का मुख्य कारण राहु-केतु ग्रह हैं। इसलिए मौनी अमावस्या पर यदि इन दोनों ग्रहों से संबंधित उपाय किए जाएं या मंत्र जाप किए जाएं तो भी कालसर्प दोष का अशुभ प्रभाव कम हो सकता है। ये है राहु-केतु के मंत्र-
- ऊं रां राहवे नम:
- ऊं केम केतवे नमः
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शिवलिंग पर चढ़ाएं चांदी के नाग-नागिन
मौनी अमावस्या पर सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव की पूजा करें और महामृत्युजंय मंत्र का जाप कम से कम 108 बारे करें। इसके बाद शिवलिंग पर चांदी से बने नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाएं और महादेव से शुभ फल के लिए प्रार्थना करें। जल्दी ही कालसर्प दोष के अशुभ प्रभाव से आपको मुक्ति मिल जाएगी।
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कालसर्प यंत्र की स्थापना घर में करें
मौनी अमावस्या पर कालसर्प यंत्र की स्थापना अपने घर के पूजा स्थान पर करें और प्रतिदिन इसके दर्शन करें। सुबह-शाम दीपक लगाएं। ये यंत्र बहुत ही विशेष है। इसके प्रभाव से घर की निगेटिविटी भी दूर होगी और शुभ फलों की प्राप्ति भी संभव है। पूजा सामग्री की दुकान पर ये यंत्र आसानी से मिल जाता है।
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इस मंत्र का जाप करें
मौनी अमावस्या पर कुछ खास मंत्रों का जाप करने से भी कालसर्प दोष का अशुभ प्रभाव कुछ कम हो सकता है। इन मंत्रों का जाप यदि रोज भी किया जाए तो हर तरह की परेशानी दूर हो सकती है।
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शंखपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात: काले विशेषत:।
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इस दिन करें विशेष पूजा
कालसर्प दोष निवारण के लिए विशेष पूजा की जाती है। इसके लिए किसी योग्य ज्योतिषी या ब्राह्मण से सलाह लें। उज्जैन, त्र्यंबकेश्वर और नासिक आदि स्थान कालसर्प दोष पूजा के लिए बहुत ही खास माने गए हैं। यदि यहां जाना संभव न हो तो किसी भी नदी के तट पर भी कालसर्प दोष की पूजा करवा सकते हैं। इस उपाय से आपकी परेशानियां कम हो सकती हैं।
Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें। आर्टिकल पर भरोसा करके अगर आप कुछ उपाय या अन्य कोई कार्य करना चाहते हैं तो इसके लिए आप स्वतः जिम्मेदार होंगे। हम इसके लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।
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