भगवान राम की नगरी दीपोत्सव के लिए अयोध्या सज-धज कर तैयार हो है। उत्तरप्रदेश की योगी सरकार के कार्यकाल में यह उत्सव लगातार तीसरे साल मनाया जा रहा है। आज शाम सरयू तट 5 लाख 51 हजार दीपों से जगमगा उठेगा। इस साल का दीपोत्सव पिछले साल का रिकार्ड को तोड़ेगा। सरकार की योजना अयोध्या के दीपोत्सव को वाराणसी की देवदीपावली के समकक्ष लाने की है। अयोध्या में 2017 में शुरू हुआ यह भव्य दीपोत्सव महज दो वर्ष में ही लोकोत्सव बन चुका है। कार्यक्रम स्थल रामकथा पार्क से लेकर राम की पैड़ी तक उल्लास छाया हुआ है। राम की पैड़ी का नजारा देखते ही बनता है।
शनिवार को इस भव्य आयोजन के साक्षी उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल होंगे।
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विदेशों तक अपनी छाप छोड़ चुके दीपोत्सव को राज्य मेले का दर्जा मिलने से इसमें आमजन की सहभागिता बढ़ी है। दीपोत्सव का हर सहभागी उल्लास से परिपूर्ण होकर मनोयोग से अपने कार्य को समय सीमा के अंदर अंजाम देने में जुटा है।
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सात देशों के एक हजार कलाकार रामलीला का मंचन कर रहे हैं। लोक नृत्य, लोकगीत, नाटक व घाटों पर राम भजन हो रहा है।
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त्रेतायुग के ऐतिहासिक पल को आज भी ना केवल यहां बल्की पूरे देश में दीपावली के रूप में मनाया जाता है। इसे विशेष आयोजन का आकार देने का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है।
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इस समय पूरी अयोध्या भगवान राम के लंका विजय के बाद अयोध्या वापसी पर खुशी मनाने को तैयार हैं। प्रदेश सरकार से इसे मिले समर्थन ने उत्सव में एक नया उत्साह भर दिया है।
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तीन दिन पहले से ही सरयूतट पर गीत संगीत और आध्यात्मिक चर्चाओं का दौर शुरू है। अवध विश्वविद्यालय और साकेत कालेज के छात्रों और शिक्षकों ने भी पूरी ताकत दीपोत्सव के संयोजन में लगा दी है।
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सभी धार्मिक और सामाजिक संगठन दीपोत्सव को जनोत्सव बनाने में लगे हैं। घाटों मंदिरों पर दीपक कतारबद्ध सजा दिए गए हैं। आज शाम एक साथ पांच लाख से भी अधिक जल उठेंगे। अयोध्या पिछले साल सर्वाधिक दीपक जलाने के अपने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़ेगी।
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संगीतमयी रामचरित मानस की धुन के बीच स्वयंसेवक दीयों को सजाने में जुटे हैं। शनिवार को तीसरे दीपोत्सव के मुख्य कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो चुका है। दीपोत्सव की महत्ता से प्रफुल्लित श्रद्धालु रामराज्य की कल्पना में खोए नजर आते हैं।
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हर वर्ष दीपोत्सव पर देर रात तक आसपास के जिले बस्ती, अंबेडकरनगर, गोंडा, बाराबंकी ही नहीं दूसरे प्रांतों से भी अच्छी तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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रामकथा पार्क, नयाघाट, रामकी पैड़ी से लेकर हनुमानगढ़ी तक श्रद्धालुओं का जत्था नजर आने लगा है। प्रशासन भी आमजन की सहभागिता पर जोर दे रहा है
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