फर्रुखाबाद (Uttar Pradesh)। मोहम्मदाबाद में 24 बच्चों को बंधक बनाने की योजना में सिरफिरे सुभाष बाथम की पत्नी रूबी का भी हाथ था। पुलिस के लोगों ने जब छोटे बच्चों को छोड़ने के लिए कहा तो रुबी बोली थी, ऐसे कैसे छोड़ दें...यह तो एक-एक करोड़ के बच्चे हैं। जिसके बाद सुभाष ने पत्नी की बात मानते हुए 6 साल की मासूम को बेहोशी हालत में देने के बाद बाकि के 23 बच्चों को बंधक मुक्त करने के एवज में कुल 23 करोड़ रुपए की मांग करने लगा था। साथ ही कहा था कि मुझे आवास, शौचालय और 23 करोड़ रुपए दो तो सभी को छोड़ दूंगा। जिसे सुनकर अफसर भी हैरान हो गए थे।
इसका खुलासा प्रशासन ने किया है। उनका कहना है कि उस समय बाकि के 23 बच्चों को अपराधी के चंगुल से सही सलामत बचाना एक बड़ी चुनौती थी। मुख्यमंत्री खुद इसकी मानीटरिंग कर रहे थे।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का साफ निर्देश था कि किसी भी कीमत पर बच्चों को बगैर एक खरोंच आए बचाना है। मुख्यमंत्री खुद पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए थे और आपरेशन पूरा होने तक घटनाक्रम की पल-पल जानकारी ले रहे थे।
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सुभाष को पुलिस उलझाने के लिए समझाती रही कि थोड़ा समय दो, लेकिन सुभाष ने कहा कि उसे कोई बात नहीं करनी है। इस बीच कुछ ग्रामीणों ने देखा कि वह घर के अंदर विस्फोटक रख रहा है और उसने ज्वलनशील पदार्थ फैलाना शुरू कर दिए हैं। अंदर से एक धमाके की आवाज भी आई जिसके बाद लोगों के सब्र का बांध टूट गया।
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ग्रामीणों व पुलिस कर्मियों ने मकान के पिछले हिस्से का दरवाजा तोड़ा और घर के अंदर घुस गए। डरे सहमे बच्चे घर के अंदर घुप्प अंधेरे में तहखाने के एक कोने में कैद थे। बता दें कि पुलिस की कार्रवाई के बीच बाथम की पत्नी रूबी की भी ग्रामीणों ने पिटाई कर दी थी, जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गई। अस्पताल में इलाज के दौरान रूबी की मौत हो गई, जबकि सुभाष बाथम का एनकाउंटर पुलिस ने कर दिया था।
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बता दे कि इससे पहले आईजी मोहित अग्रवाल ने बताया था कि बच्चों को घर में बंधक बनाने वाले अपराधी सुभाष बाथम के घर से राइफल, गोला-बारूद और भारी मात्रा में कारतूस मिले थे।
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उसके पास इतना गोला-बारूद और कारतूस था कि वह पुलिस से तीन दिन तक मोर्चा ले सकता था। वह ज्यादा वक्त तक पुलिस को इंगेज कर सके, इसलिए ज्यादा फायरिंग नहीं कर रहा था।
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