यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ की 10 अनदेखी तस्वीरः कभी बाघ को दूध पिलाया-कभी बच्चों के साथ की हंसी-ठिठोली

Published : Mar 25, 2022, 08:17 AM ISTUpdated : Mar 25, 2022, 11:38 AM IST

नई दिल्ली। यूपी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी दुबारा शासन करने जा रही है। गोरखपुर के पांच बार अजेय सांसद रहे योगी आदित्यनाथ ने पहली बार 2017 में यूपी के मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली थी। फॉयर ब्रांड हिंदूवादी नेता के रूप में पहचान बनाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक शुरूआत गोरखनाथ मंदिर के तत्कालीन महंत ब्रह्लीन पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में हुई। पहली बार योगी आदित्यनयाथ महज 26 साल की उम्र में सांसद बनें। इसके बाद वह कभी पीछे मुड़कर नहीं देखे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ी कुछ तस्वीरों के माध्यम से महत्वपूर्ण क्षणों को याद करते हैं...जो कभी भुलायी नहीं जा सकती।  

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यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ की 10 अनदेखी तस्वीरः कभी बाघ को दूध पिलाया-कभी बच्चों के साथ की हंसी-ठिठोली

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का होली के अवसर पर एक बच्ची को दुलारते हुए और बच्चों के संग सेल्फी लेते हुए फोटो सुर्खियां बटोरी थी। योगी आदित्यनाथ का बच्चों से हमेशा लगाव रहा है। वह हर साल दिवाली के अवसर पर वनटांगियां गांव में जाकर बच्चों को किताबें और मिठाइयां बांटते हैं। वह गांववालों के साथ दिवाली भी मनाते हैं। सीएम बनने के बाद भी यह अनवरत जारी है। 
 

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गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा

सन्यास लेने के बाद योगी आदित्यनाथ गोरखपुर आ गए थे। यहां वह अपने गुरु और तत्कालीन महंत गुरु अवेद्यनाथ की शरण में रहे। नाथ संप्रदाय की दीक्षा के बाद महंत अवेद्यनाथ ने उनको अपना उत्तराधिकारी बनाया। सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से संसदीय चुनाव लड़े और सांसद बने। महंत अवेद्यनाथ ने अपने उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ के लिए यह सीट छोड़ी थी। गुरु-शिष्य का यह रिश्ता एक पिता-पुत्र की तरह हमेशा कायम रहा। महंत अवेद्यनाथ के जीवन के अंतिम दिनों में योगी आदित्यनाथ पूरी शिद्दत के साथ उनकी सेवा में जुटे रहे। मंदिर का कामधाम संभालने के साथ ही वह दिल्ली के मेदांता अस्पताल में लगातार उनके साथ ही रहे।
 

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योगी आदित्यनाथ का बाघ के साथ खेलने का एक फोटो खूब वायरल होता रहा है। दरअसल, यह फोटो उनके बैंकाक यात्रा के दौरान की है जहां एक चिड़ियाघर में बाघ का बच्चा उनके पास चला आया था।
 

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हर साल होली के अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में रथयात्रा निकलती है। रथ पर सवार होकर योगी आदित्यनाथ पूरे शहर में निकलते हैं और जमकर होली खेलते हैं। यह परंपरागत होली उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद भी जारी है। रथयात्रा शुरू होने के पहले मंदिर परिसर में फाग भी गाया जाता है। 

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एक जनसेवक संन्यासी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले योगी आदित्यनाथ को जीव-जंतुओं से भी काफी लगाव है। मंदिर परिसर में गायों और अपने प्रिय कालू के साथ कुछ वक्त जरूर वह बिताते हैं। बीते दिनों गोरखपुर के चिड़िया घर में आए जानवरों को देखने सीएम पहुंचे थे। इस दौरान उनको अपने हाथों से खिलाना न भूले। 

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिनचर्या की शुरूआत हमेशा की तरह अभी भी पूजा-पाठ और गौसेवा से ही होती है। मंदिर परिसर में गौसेवा करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। 

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गोरखनाथ मंदिर, न केवल भारत बल्कि नेपाल राष्ट्र के लोगों के लिए भी श्रद्धा का केंद्र है। नेपाल राजशाही परिवार की खिचड़ी हर साल परंपरागत रूप से मकर संक्रांति पर चढ़ाई जाती है। यहां होने वाले सम्मेलनों में गोरक्ष पीठाधीश्वर को बड़े आदर-सम्मान के साथ आमंत्रित किया जाता रहा है। 

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नवरात्रि पर गोरखनाथ मंदिर में कन्या पूजन और कन्याओं को भोजन कराया जाता है। बच्चों को भी इसमें शामिल किया जाता है। क्षेत्र के सैकड़ों बच्चे हर साल मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर आते हैं और योगी आदित्यनाथ खुद अपनी देखरेख में उनको भोजन करवाते हैं। 

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नवरात्रि का नौ दिन व्रत योगी आदित्यनाथ रखते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर में ही कलश स्थापना की जाती है। यहां नौ दिनों तक पूजन-अर्चन करते हैं। पूर्व में नौ दिनों तक परिसर से महंत योगी आदित्यनाथ बाहर नहीं निकलते थे। 

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