समुद्र में जहाज डूबने की सबसे बड़ी दुर्घटना टाइटैनिक को माना जाता है। यह जहाज 10 अप्रैल, 1912 को इंग्लैंड के साउथम्पटन से अपनी पहली यात्रा पर रवाना हुआ था। 4 दिन बाद यह हिमशिला से टकरा गया और डूब गया। जहाज पर उस समय 2223 यात्री सवार थे। टाइटैनिक जैसा एक ही हादसा 3 फरवरी, 2006 को लाल सागर में डूब गया था। इस पर 1400 लोग सवार थे। यह मिस्र का जहाज था। यह घटना इतिहास के बड़े हादसों शुमार है। इस हादसे में सिर्फ 300 यात्रियों को ही बचाया जा सका था। अल-सलाम बोकाचियो '98 नामक यह जहाज़ सऊदी अरब के दबा नाम के बंदरगाह से दक्षिणी मिस्र के सफ़ागा बंदरगाह के सफ़र के लिए निकला था। हादसा क्यों हुआ, इसकी असली वजह अब तक नहीं पता चल पाई।
अल-सलाम 35 साल पुराना बताया जाता था। माना जा रहा था कि दुर्घटना के वक्त तेज हवाएं चल रही थीं। संभवत: इन्हीं हवाओं से जहाज डगमगाया और लाल सागर में समा गया। डूबने से पहले यह जहाज आखिरी बारी तट से 100 किलोमीटर की दूरी पर देखा गया था।
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यह जहाज मिस्र की एक निजी कंपनी अल सलाम मेरीटाइम ट्रांसपोर्ट का था। इस पर अरब और सूडान के भी करीब 100 लोग सवार थे।
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14 अप्रैल, 1912 को समुद्र में डूबे टाइटैनिक को दुनिया की पहली सबसे बड़ी समुद्र दुर्घटना माना जाता है। इस पर फिल्म भी बन चुकी है। यह जहाज इंग्लैंड के साउथम्पटन से न्यूयार्क के लिए रवाना हुआ था। माना जाता है कि जहाज अत्यधिक तेज गति से चल रहा था, जो दुर्घटना की वजह बना।
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कोस्टा कॉनकॉर्डिया भी इतिहास की एक बड़ी दुर्घटना में शामिल है। यह जहाज 13 जनवरी, 2012 को गिगलियो द्वीप के पास डूब गया था। इस जहाज में हजारों लोग बैठे थे।
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सिबययन द्वीप के पास डूब गया था। यह 20 जून, 2008 का मनीला से रवाना हुआ था। इसमें 800 लोग सवार थे, जिसमें से 28 लोग ही बचाए जा सके थे।
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