दावा: अगले 16 साल तक नहीं बन पाएगी कोरोना की वैक्सीन, एक के बाद एक फेल होते जाएंगे टेस्ट

Published : May 02, 2020, 11:15 AM IST

हटके डेस्क। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में भयानक तबाही मचा दी है। दुनिया भर में अब तक इसके 33 लाख मामले सामने आ चुके हैं, वहीं 2.34 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस ने अमेरिका में सबसे ज्यादा कहर बरपाया है। इससे वहां 63,861 लोगों की मौत हो चुकी है और 10 लाख 95 हजार, 210 लोग संक्रमित हैं। इसी बीच, अमेरिका और दुनिया के दूसरे देशों में साइंटिस्ट्स कोरोना वायरस का वैक्सीन बनाने में लगे हुए हैं। अमेरिका में इन्फेक्शियस डिजीज के टॉप एक्सपर्ट डॉक्टर एंथनी फाउची का कहना है कि एक से डेढ़ साल के बीच कोरोना वायरस का वैक्सीन तैयार कर लिया जाएगा। डॉक्टर एंथनी फाउची वाइट हाउस के कोरोना वायरस टास्क फोर्स के मेंबर हैं। डॉक्टर फाउची ने पहले यह चेतावनी दी थी कि कोरोना वायरस को जड़ से खत्म कर पाना संभव नहीं है। वहीं, अब उन पर वैक्सीन विकसित करने की पूरी जिम्मेदारी आ गई है। उनका कहना है कि अगस्त, 2021 तक कोरोना वायरस का वैक्सीन उपलब्ध करा दिया जाएगा, लेकिन कुछ साइंटिस्ट का कहना है कि यह इतनी जल्दी संभव नहीं हो सकता। कोरोना वायरस का वैक्सीन बनाने में कम से कम 16 साल लग सकते हैं। इसके लिए एकेडमिक रिसर्च के साथ ही कई फेज में क्लिनिकल ट्रायल करने होते हैं। ज्यादातर ट्रायल फेल हो जाने से वैक्सीन का प्रोडक्शन जल्दी नहीं किया जा सकता। प्री-क्लिनिकल ट्रायल के बाद 3 फेज में क्लिनिकल ट्रायल होंगे, इसके बाद फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) से अप्रूवल लेना होगा और वैक्सीन के प्रोडक्शन के लिए फैक्ट्रियां लगानी होंगी। इस सबमें काफी समय लगेगा और 2036 के मई-अगस्त के पहले कोरोना के वैक्सीन का आ पाना संभव नहीं लगता है। वैज्ञानिकों की इस बात से लोगों में असमंजस की स्थिति है, वहीं अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने वैक्सीन बनाने के लिए फास्ट ट्रैक डेवलपमेंट इनिशिएटिव लॉन्च किया है। देखें इससे जुड़ी तस्वीरें। 

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दावा: अगले 16 साल तक नहीं बन पाएगी कोरोना की वैक्सीन, एक के बाद एक फेल होते जाएंगे टेस्ट

अमेरिका के सिएटल स्थित कैसर परमानेंट वॉशिंगटन हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट में कोराना के एक मरीज पर वैक्सीन का फर्स्ट स्टेज सेफ्टी क्लिनिकल ट्रायल किया जा रहा है।

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सैन डियोगो की लैब में एक रिसर्च एसोसिएट कोरोना का वैक्सीन बनाने से जुड़े एक्सपेरिमेंट में लगा हुआ है।  

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कोरोना वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन बनाने का काम कई देशों में चल रहा है। जैसे ही यह महामारी सामने आई, चीन के साथ यूरोप और अमेरिका के हेल्थ साइंटिस्ट वैक्सीन बनाने की कोशिश में लग गए। 

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अमेरिका के एक लैब में कोरोना का वैक्सीन बनाने के लिए एक्सपेरिमेंट में लगा एक मेडिकल रिसर्चर। 

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कोरोना का वैक्सीन बना पाना बहुत आसान नहीं है। कुछ मेडिकल रिसर्चर्स ने दावा किया था कि इस साल सितंबर तक वैक्सीन सामने आ सकता है, लेकिन इसकी संभावना बहुत कम दिखाई पड़ रही है।  

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अमेरिका के एक लैब में कोरोना का वैक्सीन बनाने के लिए एक्सपेरिमेंट में लगी एक रिसर्चर। 

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वैक्सीन बनाने के लिए कई तरह के एक्सपेरिमेंट करने पड़ते हैं और इसमें सुरक्षा का पूरा ख्याल रखना पड़ता है। जरा-सी चूक से भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।  

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चीन के शहर वुहान में जब कोरोना वायरस की महामारी फैली, उसी समय वहां इसका वैक्सीन बनाने के लिए हेल्थ साइंटिस्ट्स ने काम करना शुरू कर दिया था। वुहान के एक लैब में वैक्सीन बनाने के लिए एक्सपेरिमेंट में लगे साइंटिस्ट्स।

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अमेरिका के एक लैब में यह मेडिकल रिसर्चर वैक्सीन बनाने के लिए एक्सपेरिमेंट में लगी है। 

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कोरोना वायरस का वैक्सीन बनाने के लिए कई देश एक साथ मिल कर भी काम कर रहे हैं। ब्रिटेन के एक लैब में ये महिला हेल्थ साइंटिस्ट वैक्सीन बनाने के लिए रिसर्च के काम में लगी है।  

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