हटके डेस्क: भारत दुनिया में लोगों के लिए बेस्ट टूरिस्ट स्पॉट माना जाता है। दुनिया के कई देशों से लोग यहां की खूबसूरती का दीदार करने पहुंचते हैं। हालांकि, अब कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के बाद लोग छुट्टियां प्लान करने से पहले सौ बार सोचेंगे। इस लॉकडाउन ऑस्ट्रेलिया की सर्फर कारमेन ग्रीनट्री ने अपनी बायोग्राफी रिलीज की है। इसमें उन्होंने 2004 में अपने भारत दौरे का वो काला अध्याय लोगों के सामने रखा है। मात्र 22 साल की उम्र में कारमेन भारत घूमने आई थीं। उस समय एक टूरिस्ट गाइड ने उसे बहलाकर किडनैप कर लिया था। इसके बाद कारमेन के लिए ये ट्रिप नर्क बन गया। लगातार दो महीने तक कारमेन का रेप किया गया। अब लॉकडाउन में कारमेन ने किताब पब्लिश की है, जिसमें उसने अपने साथ हुए इस क्राइम का जिक्र किया। महिला की आपबीती इन दिनों चर्चा में है।
कारमेन ने अपनी किताब में 2004 में भारत दौरे की कहानी लोगों के सामने रखी। कारमेन ऑस्ट्रेलिया ककी मशहूर सर्फर हैं। उन्होंने इस किताब में लिखा कि कैसे भारत दौरे के दौरान दो महीने तक किडनैप कर उनका रेप किया गया।
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अब 37 साल की हो चुकी कारमेन ने किताब में लिखा कि किस तरह उसे एक नाव में किडनैप किया गया था। उसे उसके गाइड ने ही धोखे से किडनैप किया था।
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मई 2004 में एक टूर्नामेंट हारने के बाद कारमेन ने ब्रेक लेने का फैसला किया। इस दौरान वो छुट्टियां मनाने भारत आई। सिडनी एयरपोर्ट पर भारत आने से पहले कारमेन की तस्वीर।
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भारत आने के बाद वो कश्मीर पहुंची। जहां रफीक डुंडू ने उसे दलाई लामा के पास मुफ्त शिक्षा दिलवाने की बात कही। इसके बाद कारमेन को एक नाव में ले जाया गया, जहां महीने तक उसे कैद कर रखा गया। तस्वीर में किडनैपर रफीक।
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किडनैप होने के बाद दो महीने तक कारमेन को ऐसे कमरे में रखा गया। जहां हर रात उसका रेप किया जाता था। साथ ही जब भी वो छोड़ने की बात कहती, उसे जमकर पीटा जाता था।
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कारमेन ने किताब में लिखा कि उसने एक वक्त के बाद गिनना भी छोड़ दिया था कि उसका रेप कितनी बार किया गया। पहले तो उसे लगा कि शायद रेप के बाद उसे छोड़ दिया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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रेपिस्ट ने उसका पासपोर्ट, वीजा सब रख लिया था। नाव में वो बिलकुल अकेली थी और अपनी मौत का इन्तजार कर रही थी। उसी बोट में रेपिस्ट का पूरा परिवार भी रहता था लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की।
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धीरे-धीरे कारमेन से घर के काम करवाए जाने लगे। इसके बाद एक दिन अचानक बोट पर कुछ पुलिसवाले आए जिन्होंने कारमेन को किडनैपर से मुक्त करवाया।
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इसके बाद कारमेन को उसका पासपोर्ट वापस करवाया गया, जिसके कुछ दिनों के अंदर वो वापस अपने देश लौट गई। इसके कुछ दिनों बाद कारमेन को भारत आकर रेपिस्ट के खिलाफ गवाही देने को कहा गया लेकिन वो किसी कारण से आ नहीं पाई।
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बाद में पता चला कि रेपिस्ट को 6 महीने के बाद बेल मिल गई और वो वापस घर जा चुका है। इस जानकारी के बाद कारमेन को काफी तकलीफ हुई लेकिन उसने धीरे-धीरे आगे बढ़ने का फैसला किया।
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अब इस हादसे के 16 साल बाद कारमेन ने अपनी किताब अ डेंजरस परसुइट ऑफ हैपीनेस में सारा वाक्या लिखा है।
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अब कारमेन की शादी हो चुकी है। अपने पति और तीन बच्चों के साथ वो खुशहाली भरा जीवन बिता रही है। लेकिन इस घटना ने उसकी जेहन में बेहद कड़वी यादें भर दी है।
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