बिहार के बेगूसराय में तालिबानी इंसाफ़ का खौफनाक चेहरा! दरिंदगी का शिकार हुई पीड़िता को पंचायत ने ठहराया दोषी-थूक चाटने पर किया मजबूर। जानिए आखिर आरोपी से पहले कठघरे में पीड़िता क्यों खड़ी की गई?
बेगुसराय: बिहार के बेगूसराय से मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 30 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया है कि पड़ोसी ने उसके साथ दो बार दुष्कर्म किया, लेकिन जब मामला पंचायत के सामने पहुंचा तो आरोपी के बजाय पीड़िता को ही दोषी ठहरा दिया गया। महिला का आरोप है कि पंचायत ने उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करते हुए अपना ही थूक चाटने के लिए मजबूर किया। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दोहरी दरिंदगी और न्याय का ढोंग
शिकायत के अनुसार, तीन बच्चों की 30 वर्षीय माँ अपने घर में अकेली थी और उसका पति मजदूरी के सिलसिले में गांव से बाहर गया हुआ था। इसी का फायदा उठाकर पड़ोसी ने 2 जून और 4 जून को उसके घर में घुसकर जबरन दुष्कर्म किया।
- रंगे हाथों पकड़ना और पंचायत का गठन: 4 जून को जब आरोपी खिड़की के रास्ते भागने की कोशिश कर रहा था, तब ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया।
- तालिबानी इंसाफ: न्याय दिलाने के नाम पर 4 और 5 जून को पंचायत बुलाई गई। लेकिन निष्पक्ष फैसले के बजाय पंचायत ने उलटे पीड़िता को ही दोषी करार दे दिया।
- अमानवीय यातना: पंचायत के आदेश पर महिला को सरेआम अपना ही थूक चाटने के लिए मजबूर कर घोर अपमानित किया गया।
पति के लौटने के बाद उसने हिम्मत जुटाकर शनिवार को शिकायत दर्ज कराई।
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पंचायत का फैसला बना सबसे बड़ा सवाल
महिला का आरोप है कि पंचायत ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उसे ही दोषी ठहराया। इतना ही नहीं, उसे अपना ही थूक चाटने जैसी अपमानजनक सजा दी गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
एक गिरफ्तारी, मुख्य आरोपी अब भी फरार
बेगूसराय के डीएसपी निखिल कुमार ने बताया कि महिला की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपी की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस वायरल वीडियो की भी जांच कर रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी सुबोध कुमार और संबंधित थाना प्रभारी ने घटनास्थल का दौरा कर जांच शुरू कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पीड़िता को न्याय मिलेगा और पंचायत के कथित अमानवीय फैसले के जिम्मेदार लोगों पर भी कानून का शिकंजा कस पाएगा?
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