बिछ गई थीं 1600 लोगों की लाशें, सबकुछ हो गया था तबाह...ब्लडी मैरी तूफान ने ऐसे मचाई थी तबाही

Published : Jun 09, 2020, 12:21 PM ISTUpdated : Jun 10, 2020, 01:39 PM IST

नई दिल्ली. अम्फान और निसर्ग चक्रवाती तूफान के बाद अब बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव वाला क्षेत्र बन रहा है। भारतीय मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी के पूर्वी मध्य क्षेत्र में गति नाम का चक्रवाती तूफान आ सकता है। 60 साल पहले (1960) चीन में जून महीने के पहले हफ्ते में मैनी नाम का तूफान आया था, जिसमें 1600 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। यह तूफान इतना भयंकर था कि ज्वाइंट टाइफून वार्निंग सेंटर (JTWC) ने इसे "ब्लडी मैरी" नाम दिया था। इस तूफान की शुरुआत 2 जून को हुई। मैरी तूफान ने 8 जून को हांगकांग में लैंडफॉल बनाया और ग्वांगडोंग और फुजियान तक गया। इसके बाद वापस प्रशांत महासागर में पहुंच गया।  

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बिछ गई थीं 1600 लोगों की लाशें, सबकुछ हो गया था तबाह...ब्लडी मैरी तूफान ने ऐसे मचाई थी तबाही


12 जून को मैरी तूफान कुछ कमजोर हुआ। इस तूफान ने चीन में बड़ा नुकसान पहुंचाया। 1937 के तूफान के बाद इस तूफान में मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा थी।  
 

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मैरी तूफान की वजह से हजारों लोग बेघर हो गए थे। 400 से ज्यादा छोटे ज्यादा नाव नष्ट हो गई थी। चीन में कई बांध टूटकर बिखर गए थे।
 

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दुनिया में ऐसे ही कई भयंकर तूफान हैं उन्हीं में से एक बांग्लादेश में आया ग्रेट भोला तूफान भी है। बांग्लादेश में 12 और 13 नवंबर 1970 को ये चक्रवाती तूफान आया था। ये तूफान इतना खतरनाक था कि करीब 5 लाख जानें चली गईं थीं। इस तूफान ने 185 किलोमीटर तक कहर बरपाया था। 
 

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बांग्लादेश में ही 1989 में टॉर्नेडो तूफान आया था। ये तूफान 26 अप्रैल  1989 को बांग्‍लादेश के माणिकगंज में आया था, जिसमें करीब 1300 लोग मारे गए थे और 12 हजार लोग बेघर हो गए थे। दौलतपुर और सतुरिया में करीब 80 हजार लोग बेघर हो गए थे।

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