Published : Apr 05, 2020, 06:08 PM ISTUpdated : Apr 05, 2020, 06:13 PM IST
वॉशिंगटन. चीन में फरवरी में जब कोरोना वायरस का कहर तेजी से बढ़ रहा था तब इटली ने मदद में प्रोटेक्टिव सूट (पीपीई) भेजे थे। लेकिन अब जब इटली को इनकी जरूरत पड़ी तो चीन उन्हें पैसे से बेचना चाहता है। यह खुलासा द स्पेक्टेटर मैगजीन ने अपनी रिपोर्ट में किया है। चीन के वुहान से निकले कोरोना वायरस का कहर दुनिया के 200 से ज्यादा देशों में है। अब तक 65 हजार लोगों की मौत हो चुकी है।
इटली इससे सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां अब तक 15 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इटली में डॉक्टर और नर्स भी कोरोना संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। ऐसे वक्त में इटली को पीपीई की जरूरत पड़ी है।
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ऐसे खुली चीन की पोल: इस मुश्किल वक्त में इंसानियत की मिसाल देने के चलते चीन ने दुनिया को यह बताया कि वह इटली को पीपीई दान दे रहा है। लेकिन बाद में तमाम मीडिया रिपोर्ट में चीन की यह पोल खुल गई। दरअसल, यह कोई मानवता नहीं बल्कि चीन का बिजनेस था। चीन ने इटली को पीपीई बेचे थे नाकि फ्री में दिए थे।
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द स्पेक्टेटर ने ट्रम्प प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से लिखा, चीन ने इटली को पीपीई खरीदने के लिए मजबूर किया, ये पीपीई कोरोना वायरस फैलने के दौरान इटली ने चीन को दान दिए थे। इस रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में जब कोरोना फैला था, तब इटली ने उसे पीपीई दान दिए थे।
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अधिकारी ने बताया, जब चीन में कोरोना फैला था तो इटली ने कई टन पीपीई उसे दिए थे। इनसे चीन को कोरोना फैलने से रोकने और इलाज में काफी मदद मिली और चीन के मेडिकल कर्मी भी सुरक्षित रहे।
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इस कोरोना महामारी के वक्त जहां देश एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। वहीं, चीन मदद के नाम पर पैतरेंबाजी कर रहा है। चीन ने हाल ही में कुछ देशों में मेडिकल उपकरण भेजे इनमें भी शिकायत मिली है।
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पिछले दिनों चीन ने स्पेन को टेस्टिंग किट बेची थीं। लेकिन तकनीकी खराबी और खराब गुणवत्ता के चलते स्पेन ने 50 हजार किटों को वापस कर दिया। इसी तरह से नीदरलैंड्स में भी हुआ।
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चीन ने नीदरलैंड्स को मास्क भेजे थे, इनमें से आधे की गुणवत्ता मानकों के तहत नहीं थी। इस सबके बावजूद चीन ने माफी मांगने के बजाय दूसरों पर दोष लगा दिया।
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दुनिया भर के 200 से ज्यादा देशों में कोरोना वायरस का आतंक जारी है। अब तक इस महामारी से 12 लाख लोग संक्रमित हुए हैं, वहीं 64 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका, स्पेन, इटली, जर्मनी, फ्रांस, चीन, ईरान और ब्रिटेन इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
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अमेरिका में सबसे ज्यादा 3 लाख 11 हजार 357 मामले सामने आए हैं। यहां अब तक 8452 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका के मैक्सिको में लगातर बढ़ रहे मौत के आंकड़े को देखते हुए कब्रें बनाई गईं।
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