Published : Aug 17, 2021, 11:43 AM ISTUpdated : Aug 17, 2021, 12:43 PM IST
पोर्टो प्रिंस (Port-au-Prince). हैती में शनिवार को आए 7.2 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप में मरने वालों की संख्या 1400 को पार कर गई है। इस बीच मौसम विभाग ने तूफान ग्रेस(Cyclonic storm) की चेतावनी से लोगों में और गहरा डर बैठा दिया है। तूफान के चलते मूसलाधार बारिश की आशंका के कारण रेस्क्यू अभियान और तेज कर दिया गया है। इस भूकंप में करीब 6000 लोग घायल हुए हैं। हजारों लोग बेघर हो गए हैं। घायलों को खुले मैदान में रहना और इलाज कराना पड़ा रहा है। अस्पताल मरीजों से पटे पड़े हैं। लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। देखें कुछ तस्वीरें...
भूकंप से हैती के दक्षिण-पश्चिम हिस्से के कई शहर लगभग पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं। भूस्खलन होने से बचाव अभियान प्रभावित हो रहा है।
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अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण ने कहा है कि भूकंप का केंद्र राजधानी पोर्ट औ प्रिंस से करीब 125 किलोमीटर की दूरी पर था। रविवार को भी यहां झटके महसूस किए गए। फोटो क्रेडिट-Ralph Tedy Erol/Reuters
भूकंप से हैती के कई शहर जमींदोज हो गए हैं। घर पत्तों की तरह बिखर गए। सैकड़ों लोग घर ढहने के बाद मलबे में दबे रह गए। मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। यहां लगातार रेक्यू जारी है। लोगों का खुले में इलाज करना पड़ रहा है।
यह तस्वीर दुनिया के सबसे गरीब देश माने जाने वाले हैती में शनिवार शाम 5.59 बजे (भारतीय समयानुसार) आए भयंकर भूकंप के बाद की हैं। 2019 की जनगणना के अनुसार हैती की जनसंख्या 1.13 करोड़ है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7.2 आंकी गई थी। भूकंप का केंद्र पोर्ट-ओ-प्रिंस से करीब 118 किलोमीटर पश्चिम में था। फोटो क्रेडिट-Joseph Odelyn/AP Photo
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हैती पहले से ही कोरोना संक्रमण का सामना कर रहा है। ऐसे में भूकंप ने दूसरा बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। लोगों को कुछ समझ नहीं आ रहा है कि वे क्या करें। फोटो क्रेडिट-Joseph Odelyn/AP Photo
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देश के राष्ट्रपति की हत्या और गहराती गरीबी से हैती वैसे ही संकट में है, इस पर अब भूकंप ने कमर ही तोड़कर रख दी है। इस समय हैती में ऐसा मंजर दिखाई दे रहा है। जैसा पूरा शहर सड़क पर आ गया है।
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भूकंप के बाद से लोग इतने डरे हुए हैं कि घरों में जाने से घबरा रहे हैं। घर किसी भुतहा खाने से कम नहीं रहे। इस तरह खंडहर हो चुके हैं अच्छे-खासे घर।
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भूकंप प्रभावित लोगों का इलाज और अन्य मदद के लिए अमेरिका सहित कई देश आगे आए हैं। लोगों के इलाज के लिए रेडक्रॉस संस्था भी लगातार काम रही है।
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