AI के दौर में भी अंधेरे में जी रहे हैं दुनिया के ये 7 गांव, आज तक नहीं पहुंची बिजली

Published : Jul 21, 2026, 11:30 AM IST
Villages Without Electricity

सार

Villages Without Electricity: क्या आज भी दुनिया में ऐसे गांव हैं जहां बिजली नहीं पहुंची? जानिए 7 दूरदराज बस्तियों की कहानी, जहां सूरज के साथ दिन शुरू और अंधेरे में खत्म होता है।

Villages Where Electricity Has Not Reached: दुनिया तेजी से डिजिटल हो रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G और स्मार्ट सिटी का दौर है, लेकिन आज भी दुनिया के कई ऐसे गांव हैं जहां बिजली नहीं पहुंची है या बहुत सीमित रूप में उपलब्ध है। इन गांवों में लोग सूरज की रोशनी के हिसाब से अपना दिन शुरू करते हैं और अंधेरा होते ही ज्यादातर काम बंद हो जाते हैं। आइए जानते हैं दुनिया के ऐसे 7 गांवों के बारे में, जहां आज भी बिजली व्यवस्था लोगों की जिंदगी का हिस्सा नहीं बन सकी है।

1. फुएर्ते बुलोनेस (चिली)- दुनिया के आखिरी छोर पर बसा गांव

दक्षिणी चिली के पैटागोनिया क्षेत्र में स्थित फुएर्ते बुलोनेस बेहद दूरदराज का इलाका है। यहां राष्ट्रीय बिजली ग्रिड नहीं पहुंची है। कुछ घरों में सोलर पैनल या छोटे जनरेटर हैं, लेकिन रेगुलर बिजली की सुविधा नहीं है।

लोग कैसे जीते हैं?

  • लकड़ी से खाना बनाते हैं।
  • बारिश का पानी जमा करते हैं।
  • रात में लालटेन या सोलर लाइट का यूज करते हैं।

2. ओयम्याकोन (रूस)

साइबेरिया का ओयम्याकोन दुनिया के सबसे ठंडे आबाद इलाकों में गिना जाता है। यहां तापमान -50°C से भी नीचे चला जाता है। ज्यादा ठंड और दूरस्थ स्थान होने की वजह से कई बाहरी बस्तियों तक बिजली की सप्लाई नहीं पहुंच पाती।

लोगों की जिंदगी-

  • लकड़ी और कोयले से गर्मी मिलती है।
  • जरूरत पड़ने पर डीजल जनरेटर चलाए जाते हैं।
  • मौसम के अनुसार जीवन पूरी तरह ढल चुका है।

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3. कोरो (पापुआ न्यू गिनी)

पापुआ न्यू गिनी के कई पहाड़ी गांव आज भी राष्ट्रीय बिजली नेटवर्क से जुड़े नहीं हैं। कोरो ऐसा ही एक गांव है।

यहां कैसे रहती है जिंदगी?

  • खेती और मछली पकड़ना मुख्य काम है।
  • रात में मिट्टी के तेल वाले लैम्प जलाए जाते हैं।
  • मोबाइल चार्ज करने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

4. धर्नाई (बिहार, भारत)- जहां कभी बिजली नहीं थी

बिहार के गया जिले का धर्नाई गांव वर्षों तक बिजली से वंचित रहा। बाद में यहां सोलर माइक्रोग्रिड की शुरुआत हुई, लेकिन यह गांव लंबे समय तक बिना सरकारी बिजली के जीवन का उदाहरण रहा।

क्या सीख मिलती है?

  • धर्नाई ने दिखाया कि सोलर ऊर्जा दूरदराज के इलाकों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती है।

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5. नामचे के आसपास की ऊंची बस्तियां (नेपाल)

हिमालय के ऊंचाई वाले कई गांव आज भी राष्ट्रीय बिजली ग्रिड से नहीं जुड़े हैं। कुछ जगहों पर छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट या सोलर सिस्टम हैं, लेकिन कई बस्तियां अब भी सीमित बिजली पर निर्भर हैं।

यहां जीवन कैसा है?

  • खेती और पर्यटन मुख्य आय का स्रोत हैं।
  • बिजली सीमित होने से रात का जीवन बहुत शांत रहता है।
  • कई घरों में अब भी मोमबत्ती या सोलर लैंप का उपयोग होता है।

6. अमेजन वर्षावन के आदिवासी गांव (ब्राजील)

ब्राजील के अमेजन जंगलों में बसे कई आदिवासी गांव राष्ट्रीय बिजली नेटवर्क से दूर हैं।

लोग कैसे रहते हैं?

  • नदी ही उनका मुख्य रास्ता है।
  • शिकार, मछली पकड़ना और खेती जीवन का आधार हैं।
  • आधुनिक सुविधाएं बेहद सीमित हैं।
  • इन गांवों में कई समुदाय जानबूझकर अपनी पारंपरिक जीवनशैली को बनाए रखना चाहते हैं।

7. किब्बर के आसपास की दूरस्थ बस्तियां (हिमाचल प्रदेश, भारत)

स्पीति घाटी के कुछ ऊंचाई वाले छोटे गांव और मौसमी बस्तियां लंबे समय तक नियमित बिजली से दूर रहीं। आज कई जगहों पर सोलर और माइक्रो-हाइड्रो सिस्टम लगाए गए हैं, लेकिन कठोर मौसम के कारण बिजली की उपलब्धता अब भी चुनौती बनी रहती है।

यहां की जिंदगी-

  • सर्दियों में कई महीने बर्फ से रास्ते बंद रहते हैं।
  • लोग ईंधन के लिए लकड़ी और याक के गोबर का उपयोग करते हैं।
  • सीमित बिजली होने के कारण ऊर्जा का बहुत सोच-समझकर इस्तेमाल किया जाता है।

क्या पूरी दुनिया तक बिजली पहुंच चुकी है?

नहीं। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, दुनिया में अब भी करोड़ों लोगों के घर इलेक्ट्रिक नहीं पहुंची है। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका उप-सहारा अफ्रीका, दक्षिण एशिया और दूरस्थ पर्वतीय व वर्षावन क्षेत्र हैं। कई देशों में बिजली पहुंची जरूर है, लेकिन उसकी आपूर्ति रेगुलर नहीं है।

कंटेंट सोर्स - International Energy Agency (IEA), United Nations Sustainable Development Goal 7 (Affordable and Clean Energy), World Bank, International Renewable Energy Agency (IRENA), Our World in Data, Reuters और BBC की विभिन्न रिपोर्ट.

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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