चंद्र ग्रहण से जुड़ी दुनिया की 10 हैरान करने वाली मान्यताएं, कहीं ड्रैगन तो कहीं जगुआर निगलता था चांद!

Published : Aug 21, 2026, 09:25 AM IST
Chandra Grahan Myths

सार

चंद्र ग्रहण को लेकर दुनिया में कई रोचक मान्यताएं रही हैं। कहीं ड्रैगन तो कहीं जगुआर को वजह माना गया। जानें ग्रहण का असली वैज्ञानिक कारण।

Lunar Eclipse Myths: चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण दिखाई देता है। हजारों साल पहले जब लोगों को इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण पता नहीं था, तब अचानक चांद का अंधेरा या लाल पड़ जाना किसी रहस्य से कम नहीं था।

दुनिया की अलग-अलग सभ्यताओं ने चंद्र ग्रहण को समझाने के लिए अपनी-अपनी कहानियां और मान्यताएं बनाईं। कहीं माना गया कि कोई विशाल ड्रैगन चांद को निगल रहा है, कहीं इसे देवताओं या दानवों का गुस्सा माना गया। आइए जानते हैं चंद्र ग्रहण से जुड़ी दुनिया की 10 दिलचस्प और अजीब मान्यताएं।

1. चीन में ड्रैगन निगलता था चांद

चीन में माना जाता था कि चंद्र ग्रहण के दौरान एक विशाल आकाशीय ड्रैगन चांद को निगलने की कोशिश करता है। लोगों का विश्वास था- शोर मचाने, ढोल बजाने और दूसरे तरीके अपनाने से ड्रैगन डर जाएगा और चांद को छोड़ देगा। इसलिए ग्रहण के दौरान लोग आसमान की ओर देखकर चिल्लाते थे।

2. भारत में राहु-केतु की कहानी

भारत में चंद्र ग्रहण को राहु और केतु की कथा से जोड़ा जाता है। समुद्र मंथन के दौरान स्वरभानु नाम के असुर ने देवताओं के बीच बैठकर अमृत पी लिया था। भगवान विष्णु ने उसका सिर अलग कर दिया। इसके बाद सिर राहु और धड़ केतु कहलाए। कहा जाता है कि सूर्य-चंद्रमा ने भगवान विष्णु को इशारे से स्वरभानु के बारे में बताया था। हालांकि, अमृत पीने की वजह से वो अमर हो गया, लेकिन सूर्य और चंद्रमा से बदला लेने के लिए समय-समय पर उन्हें निगलता है। चूंकि राहु-केतु छाया ग्रह हैं, इसलिए दिखते नहीं हैं। लेकिन साइंस में ग्रहण का कारण पृथ्वी की छाया है।

3. मेसोपोटामिया में ग्रहण को माना जाता था खतरा

मेसोपोटामिया में चंद्र ग्रहण को सिर्फ नेचुरल घटना नहीं माना जाता था। वहां के लोग इसे राजा के लिए खतरे का अलार्म समझते थे। ग्रहण को देखकर भविष्य में आने वाली परेशानियों की आशंका जताई जाती थी। राजा की सुरक्षा के लिए खास अनुष्ठान भी किए जाते थे।

4. माया सभ्यता में चांद को खतरा

माया सभ्यता के लोगों ने खगोलीय घटनाओं का काफी अध्ययन किया था। लेकिन चंद्र ग्रहण को लेकर उनकी परंपराओं में यह डर भी दिखाई देता है कि कोई खतरनाक शक्ति चांद को नुकसान पहुंचा रही है। ग्रहण के दौरान चांद पर हमला करने वाली शक्तियों की कल्पना की गई थी।

5. इंका सभ्यता में जगुआर की कहानी

दक्षिण अमेरिका की इंका सभ्यता से जुड़ी मान्यताओं में चंद्र ग्रहण के दौरान एक विशाल जगुआर चांद पर हमला कर रहा है। लोगों को डर था कि जगुआर के बाद वह धरती पर भी आ सकता है। इसलिए ग्रहण के समय लोग शोर करते और हथियारों से आवाज करते थे ताकि जगुआर को भगाया जा सके।

6. यूरोप में भी माना गया अपशकुन

मध्यकालीन यूरोप में लाल रंग का चांद कई लोगों के लिए डरावना संकेत था। चूंकि चंद्र ग्रहण के दौरान चांद कभी-कभी लाल या नारंगी दिखाई देता है, इसलिए इसे युद्ध, बीमारी या किसी बड़ी आपदा का अलार्म माना जाता था।

7. वाइकिंग्स की कहानी

नॉर्स यानी वाइकिंग परंपराओं में सूर्य और चंद्रमा का पीछा करने वाले भेड़ियों की कहानियां मिलती हैं। मान्यता थी कि एक भेड़िया चंद्रमा को पकड़ने के करीब पहुंच गया है।

8. अफ्रीका की कुछ परंपराओं में ग्रहण को झगड़े का समय माना गया

अफ्रीका की कई संस्कृतियों में ग्रहण से जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग रही हैं। कुछ समुदायों में चंद्र ग्रहण को सूर्य और चंद्रमा के बीच लड़ाई-झगड़े के रूप में देखा गया। ग्रहण के दौरान लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर शांति और एकता का संदेश देते थे। मतलब डर के बजाय इसे सामाजिक मेल-जोल का मौका बनाया गया।

9. चंद्र ग्रहण और गर्भवती महिलाओं से जुड़ी धारणाएं

चंद्र ग्रहण को गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए खतरनाक माना गया। कुछ जगहों पर महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलने या कुछ काम न करने की सलाह दी जाती थी। ग्रहण के दौरान सूर्य-चंद्रमा से निकलने वाली खतरनाक किरणों से गर्भस्थ शिशु को नुकसान हो सकता है। ये बात डॉक्टर और वैज्ञानिक भी मानते हैं।

10. ग्रहण को देवताओं का संकेत माना गया

पुराने समय में आसमान की असामान्य घटनाओं को अक्सर देवताओं की इच्छा से जोड़कर देखा जाता था। अचानक चांद का रंग बदलना या उसका कुछ समय के लिए अंधेरे में चले जाना लोगों को किसी दैवीय मैसेज जैसा लगता था। इसी वजह से कई सभ्यताओं में ग्रहण के दौरान पूजा, प्रार्थना या खास अनुष्ठान किए जाते थे।

चंद्र ग्रहण को लेकर साइंस क्या कहता है?

चंद्र ग्रहण के पीछे किसी ड्रैगन, दानव, जगुआर या भेड़िए का हाथ नहीं है। यह पूरी तरह नेचुरल खगोलीय घटना है। जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाता है, तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है और चंद्रमा का कुछ या पूरा हिस्सा अंधेरा दिखाई देता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चांद लाल दिखाई दे सकता है। ऐसा इसलिए होता है- क्योंकि सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते हुए मुड़ती है और लाल रंग की रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है। इसी वजह से इसे Blood Moon भी कहते हैं।

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