
Money Saving Tips: हर इंसान चाहता है उसके पास फ्यूचर के लिए सेविंग्स हों। लेकिन अक्सर मंथ एंड़ तक पूरी सैलरी खर्च हो जाती है। ऐसे में बचत करना मुश्किल होता है। सेविंग का मतलब सिर्फ पैसे जमा करना नहीं है, बल्कि अपने फ्यूचर को सेफ बनाना भी है। अचानक बीमारी, जॉब छूटना, बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना या रिटायरमेंट जैसे बड़े खर्चों के लिए सेविंग काम आती है। जैसे, अगर किसी शख्स की जॉब अचानक चली जाती है। अगर उसके पास 5-6 महीने के खर्च जितनी सेविंग है, तो उसे नई जॉब मिलने तक इकोनॉमिकल प्रॉब्लम कम होगी।
बचत की शुरुआत बड़ी रकम से नहीं, बल्कि अच्छी आदतों से होती है। सबसे पहले अपनी इनकम और एक्सपेंस का हिसाब लिखें। मंथली देखें कि पैसा कहां खर्च हो रहा है। इसमें गैर-जरूरी खर्चों को नोट करें।
अक्सर लोग पहले खर्च करते हैं और जो पैसा बचता है, उसे सेविंग मान लेते हैं। लेकिन फाइनेन्सियल एक्सपर्ट आमतौर पर दूसरा तरीका अपनाने की सलाह देते हैं। सैलरी या कमाई आते ही पहले कुछ पार्ट सेविंग्स के लिए अलग रखें, फिर बाकी पैसे से खर्च का प्लान करें। जैसे- अगर आपकी सैलरी 40,000 रुपए है, तो आप शुरुआत में 4,000–8,000 रुपए (इनकम और जरूरतों के अनुसार) अलग अकाउंट में रख सकते हैं और बाकी पैसों से मंथली खर्च चला सकते हैं।
बिना बजट सेविंग्स करना मुश्किल हो सकता है। एक सिंपल बजट बनाइए, जिसमें लिखें- घर का खर्च, रेंट या EMI, बिजली-पानी, बच्चों की एजुकेशन, ट्रवेल, मेडिकल खर्च, सेविंग्स। जब हर खर्च तय होगा, तो फालतू के खर्च कम होगा। इमरजेंसी फंड बनाएं। इमरजेंसी फंड मतलब ऐसा पैसा, जिसे सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही यूज किया जाए। कोशिश करें आपके पास कम से कम 3 से 6 महीने के जरूरी खर्च के बराबर Emergency Fund हो। यह हर शख्स की इनकम, जॉब की सिक्यूरिटी और जिम्मेदारियों के अनुसार अलग हो सकता है।
कई बार बड़े खर्च नहीं, बल्कि रोज के छोटे खर्च आपकी बचत को कम कर देते हैं। जैसे- रोज बाहर चाय-कॉफी पीना, बिना जरूरत ऑनलाइन शॉपिंग,कई OTT सब्सक्रिप्शन, बार-बार खाना ऑर्डर करना। एक उदाहरण- अगर कोई इंसान हर दिन 200 रुपए का बाहर का खाना खाता है, तो महीने में लगभग 6000 रुपए खर्च होगा। इस हैबिट को कम करके सेविंग की जा सकती है।
बचत का एक टारगेट होना चाहिए। जैसे- नई कार खरीदना, घर खरीदना, बच्चों की पढ़ाई, फॉरेन ट्रिप, रिटायरमेंट। जब टारगेट फिक्स होता है, तो बचत करने की इच्छा बढ़ जाती है।
सिर्फ बैंक खाते में पैसा रखने से हमेशा ग्रोथ नहीं होती। अपने टारगेट, रिस्क उठाने की क्षमता और समय के अनुसार बचत का कुछ पार्ट अलग-अल ऑप्शन में इन्वेस्ट करना चाहिए। जैसे- फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), रिकरिंग डिपॉजिट (RD), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), म्यूचुअल फंड (जोखिम के अनुसार) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)।
आज कई बैंक और फाइनेंस ऐप ऑटोमैटिक सेविंग की सर्विस देते हैं। आप हर महीने एक फिक्स डेट पर अपने सेविंग अकाउंट या इन्वेस्ट अकाउंट में ऑटो ट्रांसफर सेट कर सकते हैं। इससे सेविंग की हैबिट बनाए रखना आसान होता है।
हां। सेविंग आपकी इनकम से ज्यादा हमारी हैबिट्स पर डिपेंड करता है। अगर कोई इंसान मंथली सिर्फ 500 या 1,000 रुपए भी बिना गैप के बचाए तो ठीक ठाक अमाउंट जमा हो सकती है।
Content Sources: Reserve Bank of India, National Centre for Financial Education, Investor.gov (U.S. Securities and Exchange Commission), CFPB (Consumer Financial Protection Bureau), Organisation for Economic Co-operation and Development (OECD).
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता और शिक्षा के उद्देश्य से है। इसे किसी भी तरह की पेशेवर वित्तीय सलाह (Financial Advice), निवेश की सिफारिश या कानूनी सलाह के रूप में न लिया जाए। कोई भी निवेश करने, पॉलिसी खरीदने या बड़ा वित्तीय फैसला लेने से पहले कृपया किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर (Certified Financial Planner) से सलाह जरूर लें।