कांवड़ यात्रा में नंगे पैर क्यों चलते हैं? सिर्फ परंपरा नहीं! कांवड़ यात्रा में नंगे पैर चलने के पीछे छिपा है बड़ा रहस्य

Published : Jul 22, 2026, 06:58 PM IST
Why Kanwariyas Walk Barefoot

सार

Barefoot Kanwar Yatra: कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु नंगे पैर क्यों चलते हैं? जानें इसका धार्मिक, पौराणिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व, साथ ही यात्रा से जुड़े जरूरी नियम और रोचक तथ्य।

Kanwar Yatra Significance: हर साल सावन का महीना आते ही देशभर में लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। कोई सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलता है तो कोई हजारों किलोमीटर की यात्रा पूरी करता है। इस दौरान आपने देखी होगी कि ज्यादातर कांवड़िए नंगे पैर ही चलते हैं। सवाल उठता है आखिर ऐसा क्यों? क्या यह सिर्फ एक परंपरा है या इसके पीछे कोई धार्मिक और आध्यात्मिक कारण भी छिपा है? आइए जानते हैं कांवड़ यात्रा में नंगे पैर चलने का क्या महत्व है।

भगवान शिव के प्रति समर्पण का प्रतीक

हिंदू धर्म में कांवड़ यात्रा को भगवान शिव की कठिन तपस्या और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। नंगे पैर चलना इस बात का संकेत है कि भक्त अपने आराम और सुख-सुविधा का त्याग कर पूरी श्रद्धा से भोलेनाथ की सेवा कर रहा है। जिस तरह मंदिर में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल उतारे जाते हैं, उसी भावना को कई श्रद्धालु पूरी यात्रा के दौरान अपनाते हैं।

क्या है पौराणिक कथा?

मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला, तब भगवान शिव ने पूरी सृष्टि की रक्षा के लिए उसे पी लिया। इसके बाद उनके शरीर की गर्मी शांत करने के लिए देवताओं ने अलग-अलग पवित्र नदियों का जल उनके ऊपर चढ़ाया। इसी घटना को कांवड़ यात्रा की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। श्रद्धालु गंगा या अन्य पवित्र नदियों से जल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। इस यात्रा के दौरान कठिनाई सहना और नंगे पैर चलना भगवान शिव के प्रति तप, त्याग और श्रद्धा का प्रतीक है।

नंगे पैर चलने का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नंगे पैर चलने से व्यक्ति का अहंकार कम होता है। यात्रा के दौरान भक्त जमीन से सीधे जुड़ता है, जिससे उसके अंदर विनम्रता और धैर्य का भाव बढ़ता है। कठिन यात्रा मन को अनुशासित करती है और भगवान के प्रति आस्था को मजबूत बनाती है।

क्या इसका वैज्ञानिक पक्ष भी है?

हालांकि कांवड़ यात्रा मुख्य रूप से धार्मिक आस्था से जुड़ी है, लेकिन कुछ एक्सपर्ट नंगे पैर चलने को ग्राउंडिंग (Grounding या Earthing) से भी जोड़ते हैं। कुछ रिसर्च के मुताबिक, जमीन पर कुछ समय तक नंगे पैर चलने से तनाव कम होने और शांति महसूस होती है।

ये भी पढ़ें- Sawan 2026: शिवजी को बेलपत्र चढ़ाते समय ये 5 नियम नहीं माने तो पूजा अधूरी!

क्या सभी कांवड़ियों के लिए नंगे पैर चलना जरूरी है?

नहीं। जरूरी नहीं है कि हर कांवड़िए को नंगे पैर ही चलना होगा। कई श्रद्धालु अपनी हेल्थ, उम्र या अन्य कारणों से चप्पल या जूते पहनकर भी यात्रा करते हैं। सबसे जरूरी चीज श्रद्धा, नियमों का पालन और भगवान शिव के प्रति सच्ची भक्ति मानी जाती है।

कांवड़ यात्रा में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • भरपूर पानी पीते रहें।
  • मौसम के अनुसार आराम करें।
  • यदि पैरों में चोट या बीमारी हो तो डॉक्टर की सलाह लें।
  • प्रशासन द्वारा तय किए गए मार्ग और सुरक्षा नियमों का पालन करें।
  • दूसरों की आस्था और सुविधा का भी सम्मान करें।

ये भी पढ़ें- Sawan 2026: व्रत में कौन-से फल खा सकते हैं-कौन से नहीं? जानें जरूरी नियम

कांवड़ यात्रा से जुड़ी कुछ जरूरी बातें...

  • सावन के दौरान करोड़ों श्रद्धालु देशभर में कांवड़ यात्रा में हिस्सा लेते हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और बिहार इसके प्रमुख केंद्र हैं।
  • कई श्रद्धालु 200 से 500 किमी तक पैदल यात्रा कर गंगाजल लेकर अपने गांव या शहर पहुंचते हैं।
  • डाक कांवड़ में श्रद्धालु बिना रुके दौड़ते हुए यात्रा पूरी करते हैं और गंगाजल को जमीन पर नहीं रखते।
  • उत्तराखंड के हरिद्वार, गंगोत्री और गौमुख कांवड़ यात्रा के सबसे प्रमुख जल-स्रोतों में गिने जाते हैं।
  • कई राज्यों में कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था संभालने के लिए हजारों पुलिसकर्मी और स्वयंसेवक तैनात होते हैं।

कॉन्टेन्ट सोर्सः शिव पुराण, स्कंद पुराण, भारतीय पुरातत्व एवं संस्कृति पर प्रकाशित धार्मिक अध्ययन, Ministry of Culture, Government of India, विभिन्न अखाड़ों एवं धार्मिक विद्वानों की पारंपरिक व्याख्याएं

PREV
Welcome to the Asianet News Hindi General Knowledge (GK) Hub, your go-to destination for amazing facts, interesting information, everyday science explainers, "Did You Know?" stories, curiosity-driven content, and answers to intriguing "Aisa Kyu?" questions. Explore fascinating insights about science, nature, history, technology, space, health, and the world around you—all explained in a simple and engaging way.
AT
About the Author

Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
Read more Articles on

Recommended Stories

₹10 वाली चाय भूल जाइए! इस चाय की कीमत में खरीद लेंगे 1KG सोना, 2 ऑडी और 3 लग्जरी बंगला
Aadhaar क्यों जरूरी है? क्या हर जगह Aadhaar देना कंपलसरी है? सबको पता होनी चाहिए इसकी असली अहमियत