
Mahadev 108 Names: भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है। वे सृष्टि के संहारक होने के साथ-साथ करुणा, तप, वैराग्य और कल्याण के प्रतीक भी हैं। शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भगवान शिव के अनेक नामों का जिक्र मिलता है। हर नाम उनके किसी विशेष गुण, स्वरूप या लीला का परिचय देता है। इसलिए भक्त शिव के अलग-अलग नामों का जप करते हैं। आइए जानते हैं भगवान शिव के प्रमुख नाम कौन-कौन से हैं, शिव के 108 नामों का महत्व क्या है और उनकी महिमा से जुड़ी 5 प्रसिद्ध कथाएं कौन-सी हैं।
धार्मिक ग्रंथों में भगवान शिव के हजारों नाम बताए गए हैं। इनमें 108 नाम सबसे ज्यादा प्रसिद्ध और पूजनीय हैं। इसके अलावा शिव सहस्रनाम में उनके 1008 नामों का भी जिक्र मिलता है। 108 नामों का जाप विशेष रूप से सोमवार, महाशिवरात्रि, सावन और प्रदोष व्रत में शुभ माना जाता है।
महादेव, शंभु, शंकर, शिव, रुद्र, नीलकंठ, महेश, ईशान, पशुपति, त्रिलोचन, त्र्यंबक, गंगाधर, चंद्रशेखर, उमापति, अर्धनारीश्वर, भोलेनाथ, विश्वनाथ, कैलाशपति, मृत्युंजय, आशुतोष, हर, गिरीश, गिरिजापति, दिगंबर, जटाधर, कपाली, भैरव, विरूपाक्ष, नागेश्वर, सदाशिव, योगेश्वर, योगीश्वर, त्रिपुरांतक, भूतनाथ, आदियोगी, नटराज, शूलपाणि, पिनाकी, कृत्तिवास, धूर्जटि, कालेश्वर, सर्वेश्वर, महाकाल, कालभैरव, भूतपति, देवदेव, जगदीश, जगत्पति, अचलेश्वर, ओंकारेश्वर, सोमेश्वर, रामेश्वर, केदारनाथ, अमरनाथ, वैद्यनाथ, मल्लिकार्जुन, भीमशंकर, त्र्यंबकेश्वर, घृष्णेश्वर, नागनाथ, महाकालेश्वर, ओंकारनाथ, विश्वेश्वर, चिदंबरेश्वर, हरिहर, शिवशंकर, ईश्वर, परमेश्वर, अनादि, अनंत, अक्षय, सर्वज्ञ, सर्वात्मा, सर्वमंगल, करुणामूर्ति, कृपालु, शर्व, भव, शर्वरीपति, त्रिशूलधारी, वृषभवाहन, भस्मांग, पंचवक्त्र, त्रिनेत्र, महायोगी, ध्यानेश्वर, तपस्वी, अघोर, शांतेश्वर, कल्याणसुंदर, देवाधिदेव, महातपस्वी, कृपानिधि, विश्वरूप, लोकनाथ, मुक्तेश्वर, आनंदेश्वर, शिवप्रिय, उमानाथ, हिमालयपति, अजर, अमर, अनश्वर, परमात्मा, ज्योतिर्मय, शिवाय और ओम नमः शिवाय के अधिष्ठाता।
ये भी पढ़ें- शिवजी को क्यों नहीं चढ़ाई जाती तुलसी?
1. समुद्र मंथन और नीलकंठ बनने की कथा
जब समुद्र मंथन से विष निकला, तब पूरे संसार पर संकट आ गया। देवताओं और असुरों की रक्षा के लिए भगवान शिव ने विष को अपने कंठ में रख लिया। इस वजह उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए।
2. गंगा को जटाओं में धारण करना
राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर आने को तैयार हुईं। लेकिन उनकी तेज धार से पृथ्वी के खत्म होने का खतरा था। तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर उनकी तेज धार को कंट्रोल किया। इसलिए वे गंगाधर कहलाते हैं।
3. चंद्रमा को मस्तक पर धारण करना
दक्ष प्रजापति के श्राप से चंद्रदेव का तेज घटने लगा। उन्होंने भगवान शिव की आराधना की। शिव ने उन्हें अपने मस्तक पर जगह दिया। तभी से भगवान शिव चंद्रशेखर कहलाए।
4. त्रिपुरासुर का वध
त्रिपुरासुर नामक 3 असुर भाइयों ने 3 नगर बनाकर अत्याचार शुरू कर दिया। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने एक ही बाण से तीनों नगरों का विनाश किया। इस लीला के कारण वे त्रिपुरांतक कहलाए।
5. मार्कंडेय की रक्षा
ऋषि मार्कंडेय की उम्र सिर्फ 16 साल की थी। उन्होंने भगवान शिव की कठोर उपासना की। जब यमराज उन्हें लेने आए, तो शिवलिंग से प्रकट होकर भगवान शिव ने यमराज को रोक दिया और मार्कंडेय को दीर्घायु का वरदान दिया। इसी कारण शिव को मृत्युंजय कहा जाता है।
ये भी पढ़ें- Sawan 2026: क्या महिलाएं शिवलिंग को छू सकती हैं…
मान्यता है भगवान शिव के नामों का जाप करने से मन में शांति, धैर्य और पॉजिटिविटी आती है। सावन, महाशिवरात्रि और सोमवार के दिन 108 नामों का पाठ करने से भगवान की विशेष कृपा होती है।