Can Tulsi be offered to Shiva: भगवान शिव की पूजा में कुछ चीजें चढ़ाने की मनाही है, तुलसी भी इनमें से एक है। वैसे तो तुलसी को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र माना गया है लेकिन क्यों इसे महादेव की पूजा में उपयोग में नहीं लिया जाता।
Shivling worship rules: भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक का फूल, गंगाजल और कच्चा दूध चढ़ाया जाता है। वहीं भगवान विष्णु और उनके अवतार श्रीराम व श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी का खास महत्व माना जाता है। ऐसे में सवाल उठता है- क्या शिवलिंग पर तुलसी चढ़ाई जा सकती है? जानें क्या है इसका जवाब...
देवी लक्ष्मी का स्वरूप है तुलसी
हिंदू धर्म में तुलसी को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि मां लक्ष्मी का स्वरूप और भगवान विष्णु की प्रिय माना जाता है। इसलिए लगभग हर वैष्णव घर में तुलसी का पौधा लगाया जाता है और उसकी रोजाना पूजा की जाती है। तुलसी की पूजा को लेकर कई कथाएं हैं।
तुलसी क्यों पूजनीय मानी जाती हैं?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार- तुलसी का संबंध वृंदा नाम की एक परम पतिव्रता स्त्री से है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, वृंदा असुरराज जालंधर की पत्नी थीं। वृंदा भगवान विष्णु की अनन्य भक्त थीं और अपने पतिव्रत धर्म के प्रभाव से उन्होंने अपने पति को इतना शक्तिशाली बना दिया था कि देवता भी उसे हरा नहीं कर पा रहे थे।
देवताओं ने भगवान विष्णु से मदद मांगी। भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण कर वृंदा के सामने प्रकट हुए। जब वृंदा का पतिव्रत भंग हुआ, तब भगवान शिव ने युद्ध में जालंधर का वध कर दिया। जब वृंदा को इस घटना का पता चला, तो उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि वे पत्थर बन जाएं।
माना जाता है इसी श्राप की वजह से भगवान विष्णु शालिग्राम स्वरूप में स्थापित हुए। बाद में भगवान विष्णु ने वृंदा के तप, भक्ति और पवित्रता का सम्मान करते हुए उन्हें तुलसी के रूप में अमर होने का वरदान दिया और कहा- उनकी पूजा के बिना मेरी पूजा पूरी नहीं मानी जाएगी।
भगवान विष्णु को तुलसी क्यों प्रिय है?
भगवान विष्णु और उनके अवतार श्रीकृष्ण को तुलसी दल बहुत प्रिय है। इसलिए-
- विष्णु पूजा में तुलसी पत्र अर्पित किए जाते हैं।
- श्रीकृष्ण को तुलसी के बिना भोग अधूरा माना जाता है।
- तुलसी की माला से मंत्र जप करना शुभ माना जाता है।
तुलसी विवाह की परंपरा क्यों है?
कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) से लेकर द्वादशी तक तुलसी विवाह किया जाता है। इसमें तुलसी माता का विवाह भगवान शालिग्राम (विष्णु) से कराया जाता है। इसके बाद ही विवाह जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।
घर में तुलसी लगाने का धार्मिक महत्व क्यों है?
- तुलसी का पौधा घर में पॉजिटिव एनर्जी का प्रतीक माना जाता है।
- जहां तुलसी होती हैं, वहां भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
- सुबह-शाम तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा है।
- तुलसी की परिक्रमा और जल अर्पित करना लाभदायक माना जाता है।
तुलसी से जुड़ी एक और मान्यता
कहा जाता है- मृत्यु के समय यदि किसी व्यक्ति के मुंह में तुलसी दल और गंगाजल दिया जाए, तो उसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और उसकी आत्मा को सद्गति मिलती है। यह मान्यता कई वैष्णव परंपराओं में प्रचलित है। इसी कथा के आधार पर तुलसी का संबंध भगवान विष्णु से ज्यादा है, इसलिए इसे शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता।
भगवान शिव को क्या पसंद है?
भगवान शिव को कुछ खास चीजें ज्यादा पसंद हैं।
- बेलपत्र
- गंगाजल
- धतूरा
- भांग
- आक का फूल
- सफेद चंदन
- कच्चा दूध
- शहद
- दही
मान्यता है इन चीजों से शिवजी का अभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
क्या भूल से तुलसी चढ़ जाए तो क्या करें?
अगर किसी से अनजाने में शिवलिंग पर तुलसी चढ़ जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। भगवान भाव के भूखे हैं। यदि पूजा सच्चे मन और श्रद्धा से की गई है, तो इसे बड़ा दोष नहीं माना जाता। लेकिन आगे से शिवजी को उनके प्रिय पूजन सामग्री ही अर्पित करनी चाहिए।
क्या तुलसी शिवजी को कहीं भी नहीं चढ़ती?
वैसे तो शिवलिंग पर तुलसी नहीं चढ़ाई जाती, लेकिन कुछ जगहों और स्थानीय परंपराओं में शिव परिवार की पूजा के दौरान तुलसी का इस्तेमाल अलग तरीके से देखने को मिलता है। हालांकि, ज्यादातर मंदिर और शैव परंपरा शिवलिंग पर तुलसी नहीं चढ़ाते हैं। सनातन धर्म में हर देवता की पूजा की अपनी अलग विधि और प्रिय सामग्री है। जैसे-
- भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है।
- भगवान शिव की पूजा बेलपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है।
