
Ganpati Festival Prices: मुंबई में गणेश उत्सव सिर्फ आस्था का त्योहार नहीं, बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा सीजन है। घर-घर गणपति की स्थापना से लेकर बड़े-बड़े सार्वजनिक पंडालों तक, इस दौरान फूल, फल, नारियल, मोदक, पूजा सामग्री, सजावट और मूर्तियों की डिमांड अचानक बढ़ जाती है। डिमांड बढ़ने का सीधा असर बाजार की कीमतों पर दिखता है। इस साल भी गणपति उत्सव से पहले मूर्ति बनाने वालों ने कच्चे माल, मजदूरी, जगह और ट्रांसपोर्टेशन की बढ़ती लागत को कीमत बढ़ने की वजह बताया है।
मुंबई में 2026 का गणेश चतुर्थी पर्व 14 सितंबर को है, इसलिए उत्सव से पहले बाजार में खरीदारी तेज होने लगी है। आइए जानते हैं किन चीजों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है और इसकी वजह क्या है।
गणपति पूजा में फूलों की डिमांड बहुत ज्यादा होती है। गेंदे से लेकर गुलाब और दूसरे फूलों तक की बिक्री अचानक बढ़ जाती है। जब कुछ दिनों के लिए मांग अचानक बढ़ती है, तो थोक बाजार से लेकर स्थानीय दुकानों तक कीमतों पर दबाव आ जाता है।
नारियल, दूर्वा, सुपारी, फल, अगरबत्ती, कपूर और दूसरी पूजा सामग्री गणपति पूजा की जरूरी चीजें हैं। उत्सव के दिनों में इनकी खपत सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। यही वजह है कि बाजार में मांग बढ़ने पर कीमतों में भी बदलाव देखने को मिलता है।
गणपति उत्सव और मोदक का रिश्ता बेहद खास है। इस दौरान मिठाई की दुकानों पर नॉर्मल मावा मोदक के साथ काजू, पिस्ता, चॉकलेट और दूसरे फ्लेवर वाले मोदक भी बिकते हैं। मुंबई की कुछ दुकानों पर अभी अलग-अलग तरह के मोदक की कीमतें ₹550 रु. से लेकर 2000 रु. या उससे ज्यादा प्रति किलो दिख रही हैं। यहां कीमत सिर्फ त्योहार की मांग से नहीं, बल्कि दूध, ड्राई फ्रूट्स, चीनी, पैकेजिंग और बनाने की लागत से भी तय होती है।
मूर्ति उन चीजों में है, जिसकी कीमत पर कच्चे माल और मजदूरी का सीधा असर पड़ता है। 2026 में मुंबई के मूर्तिकारों ने PoP, कारीगरों की मजदूरी, वर्कशॉप का किराया और ट्रांसपोर्टेशन जैसी लागत बढ़ने की बात कही है। कुछ मूर्तिकारों ने पहले ही कीमतों में करीब 25% तक बढ़ोतरी की जानकारी दी थी।
लाइट, फूलों की माला, कपड़ा, थर्माकोल के ऑप्शन, इलेक्ट्रॉनिक डेकोरेशन और पंडाल की दूसरी सामग्री की मांग भी अचानक बढ़ जाती है। बड़े मंडलों की खरीदारी ज्यादा होने से छोटे दुकानदारों और सप्लायरों के पास भी स्टॉक जल्दी खत्म हो सकता है।
पंडाल बनाना सिर्फ सजावट का काम नहीं है। इसमें मजदूर, इलेक्ट्रिशियन, लाइटिंग टीम, साउंड सिस्टम, सुरक्षा और ट्रांसपोर्ट जैसे कई खर्च शामिल होते हैं। इसलिए पंडाल सीजन में इन सर्विस की डिमांड बढ़ने से कीमतें भी ऊपर आ जाती हैं।
इस साल मुंबई में एक अलग वजह से भी लोगों की यात्रा लागत बढ़ने वाली है। MMRTA ने 1 सितंबर 2026 से ऑटो का न्यूनतम किराया ₹26 से बढ़ाकर ₹27 और ब्लैक-एंड-येलो टैक्सी का न्यूनतम किराया ₹31 से बढ़ाकर ₹33 करने को मंजूरी दी है। गणपति खरीदारी और दर्शन के दौरान लोगों की आवाजाही बढ़ने के बीच यह बढ़ोतरी जेब पर एक्स्ट्रा इंपैक्ट डालेगी।
बड़ी मूर्तियों को वर्कशॉप से घर या पंडाल तक पहुंचाने के लिए विशेष वाहन की जरूरत पड़ती है। ईंधन, ड्राइवर, दूरी और मूर्ति के साइज के हिसाब से डिलीवरी खर्च बदलता है। कुछ मुंबई विक्रेताओं के यहां 2026 के लिए मूर्ति डिलीवरी के जोन के हिसाब से ₹200 से ₹500 तक के चार्ज भी दिख रहे हैं।
गणपति पंडालों में रोशनी सबसे आकर्षक हिस्सों में होती है। एलईडी लाइट, वायर, इलेक्ट्रिकल फिटिंग और जनरेटर जैसी चीजों की मांग बढ़ने से इनका किराया या सर्विस चार्ज नॉर्मल दिनों के मुकाबले ज्यादा होता है।
त्योहार के दौरान सिर्फ सामान बेचने वालों को ही फायदा नहीं होता। फूल सजाने वाले, मूर्ति पहुंचाने वाले, डेकोरेशन करने वाले, अस्थायी स्टॉल लगाने वाले और छोटे सर्विस प्रोवाइडर भी ज्यादा काम करते हैं। डिमांड बढ़ने पर उनकी मजदूरी और सर्विस चार्ज में भी बदलाव आ सकता है।
इसे सिर्फ 'त्योहार में दुकानदार महंगा बेच रहे हैं' कहकर समझना सही नहीं होगा। कीमत बढ़ने के पीछे तीन बड़े कारण होते हैं- डिमांड में अचानक बढ़ोतरी, सप्लाई की सीमाएं और इनपुट कॉस्ट में बदलाव। मूर्ति के मामले में 2026 में कच्चे माल, मजदूरी, किराया और परिवहन की लागत बढ़ने की रिपोर्ट सामने आई है।