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Nobel Prize की अनसुनी कहानियां: किसी ने Nobel ठुकराया, कोई जेल में था...नोबेल के चौंकाने वाले रिकॉर्ड
Nobel Prize Records: नोबेल पुरस्कार के इतिहास में कई हैरान करने वाले रिकॉर्ड हैं। किसी ने 17 साल में जीता, तो किसी ने 97 की उम्र में। किसी ने पुरस्कार ठुकराया, तो कुछ को जेल में रहते मिला। 10 तस्वीरों में जानिए नोबेल के ऐसे हैरान करने वाले रिकॉर्ड...

सिर्फ 17 साल की उम्र में नोबेल जीतने वाली लड़की
मलाला यूसुफजई ने सिर्फ 17 साल की उम्र में नोबेल शांति पुरस्कार जीता। 2014 में उन्हें बच्चों और युवाओं के अधिकार और लड़कियों की पढ़ाई के लिए किए गए काम के लिए यह सम्मान मिला।

97 साल की उम्र में नोबेल प्राइज, उम्र का सबसे बड़ा रिकॉर्ड
नोबेल के इतिहास में सबसे ज्यादा उम्र में यह सम्मान पाने वाले व्यक्ति जॉन बी. गुडइनफ हैं। उन्हें 2019 में 97 साल की उम्र में रसायन के क्षेत्र में नोबेल मिला। उन्हें यह सम्मान ऐसी बैटरी बनाने के काम के लिए दिया गया, जिसने मोबाइल फोन और दूसरी चीजों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों के विकास में बड़ी भूमिका निभाई। यानी नोबेल के इतिहास में एक तरफ 17 साल की उम्र का रिकॉर्ड है, तो दूसरी तरफ 97 साल की उम्र का।
एक ही शख्स ने 2 बार जीता नोबेल प्राइज
ऐसा करने वालों में सबसे मशहूर नाम मैरी क्यूरी का है। उन्हें 1903 में भौतिकी का और 1911 में रसायन का नोबेल पुरस्कार मिला। मैरी क्यूरी आज तक की इकलौती महिला हैं, जिन्हें 2 बार नोबेल मिला है। नोबेल के इतिहास में कुछ और लोगों ने भी दो बार यह सम्मान जीता है। इनमें जॉन बार्डीन, फ्रेडरिक सेंगर और लिनस पॉलिंग शामिल हैं।
पिता और बेटे दोनों को मिला नोबेल प्राइज
नोबेल के इतिहास में एक परिवार की कहानी बेहद खास है। विलियम ब्रैग और उनके बेटे लॉरेंस ब्रैग को 1915 में भौतिकी का नोबेल मिला।
दोनों को एक ही काम के लिए साथ में यह सम्मान दिया गया था। लॉरेंस ब्रैग की उम्र उस समय सिर्फ 25 साल थी। यानी नोबेल हिस्ट्री में पिता और बेटे का एक साथ यह बड़ा सम्मान पाना अपने आप में खास रिकॉर्ड है।
नोबेल प्राइज मिला, लेकिन पुरस्कार लेने से कर दिया मना
आमतौर पर लोग नोबेल मिलने की खबर सुनकर खुशी मनाते हैं। लेकिन इतिहास में ऐसे भी विजेता हुए जिन्होंने पुरस्कार लेने से मना कर दिया। ज्यां-पॉल सार्त्र ने 1964 में साहित्य का नोबेल लेने से मना कर दिया। उनका कहना था कि उन्होंने हमेशा सभी तरह के सरकारी और आधिकारिक सम्मान लेने से दूरी बनाई है।
ले डक थो ने भी 1973 में नोबेल शांति पुरस्कार लेने से मना कर दिया। उन्हें वियतनाम से जुड़ी शांति बातचीत के लिए यह सम्मान दिया गया था।
जेल में रहते हुए भी मिला नोबेल प्राइज
नोबेल के इतिहास में कुछ ऐसे विजेता भी रहे, जिन्हें पुरस्कार दिए जाने के समय वे जेल में थे। अब तक ऐसे 5 नोबेल विजेता रहे हैं। इनमें कार्ल फॉन ओसिएत्स्की, आंग सान सू ची, लियू शियाओबो, एलेस बियालियात्स्की और नर्गिस मोहम्मदी शामिल हैं। इन सभी को नोबेल शांति पुरस्कार मिला। इस रिकॉर्ड की सबसे खास बात यह है कि अवार्ड मिलने के समय भी वे आजाद नहीं थे। फिर भी उनके काम को दुनिया के इस बड़े सम्मान के लिए चुना गया।
मौत के बाद मिला नोबेल प्राइज, लेकिन ऐसा बहुत कम हुआ
आम तौर पर किसी इंसान को उसकी मौत के बाद नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जाता। लेकिन पुराने समय में ऐसी घटनाएं हुई हैं। एरिक एक्सेल कार्लफेल्ट को 1931 में साहित्य का नोबेल उनकी मौत के बाद दिया गया था। डैग हैमरशोल्ड को 1961 में शांति का नोबेल मरणोपरांत मिला।
2011 में भी एक अनोखी घटना हुई। राल्फ स्टीनमैन की नोबेल विजेता के रूप में घोषणा होने के 3 दिन पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। लेकिन पुरस्कार देने वाली संस्था को उनकी मौत की जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्हें विजेता माना गया।
कुछ विजेताओं को सरकार ने पुरस्कार लेने ही नहीं दिया
नोबेल के इतिहास में ऐसी घटनाएं भी हुईं जब विजेता खुद पुरस्कार छोड़ना नहीं चाहते थे, लेकिन उनके देश की सरकार ने उन्हें इसे लेने से रोक दिया। जर्मनी के रिचर्ड कून, एडोल्फ बुटेनांट और गेरहार्ड डोमाग्क को हिटलर के शासन में नोबेल लेने से रोक दिया गया था। इसके अलावा साहित्य के विजेता बोरिस पास्तरनाक ने पहले अवार्ड स्वीकार किया था, लेकिन बाद में सोवियत संघ के दबाव में उन्हें इसे ठुकराना पड़ा।
नोबेल प्राइज पाने वाला पूरा परिवार, सिर्फ एक नहीं
नोबेल के इतिहास में क्यूरी परिवार का नाम सबसे खास परिवारों में आता है। मैरी क्यूरी को 2 बार नोबेल मिला। उनके पति पियरे क्यूरी को भी 1903 में भौतिकी का नोबेल मिला था। उनकी बेटी आइरीन जोलियो-क्यूरी को 1935 में रसायन का नोबेल मिला।
अब तक 633 बार दिया जा चुका नोबेल
1901 से 2025 तक नोबेल पुरस्कार और अर्थशास्त्र से जुड़ा यह पुरस्कार कुल 633 बार दिया जा चुका है और इसमें 1,026 लोगों व संस्थाओं को सम्मान मिला है।