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Nobel Winners की 10 अनसुनी कहानियां: C.V. Raman से Malala तक...कोई Teacher तो कोई था Clerk
Nobel Prize 2026 के Medicine और Physics विजेताओं की घोषणा हो चुकी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नोबेल विजेताओं की कहानी सिर्फ स्टॉकहोम से आए फोन तक सीमित नहीं है। इन विजेताओं ने Nobel से पहले पढ़ाई, नौकरी, रिसर्च व लंबे संघर्ष से अपनी पहचान बनाई है।

Albert Einstein- Nobel से पहले Patent Office में नौकरी
Albert Einstein को दुनिया महान वैज्ञानिक के तौर पर जानती है, लेकिन Nobel Prize मिलने से पहले उनकी नौकरी एक Patent Office में थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें टीचर की नौकरी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने Switzerland के Bern स्थित Patent Office में Technical Assistant के तौर पर काम शुरू किया। इसी नौकरी के दौरान खाली समय में उन्होंने अपने कई बड़े वैज्ञानिक थॉट्स पर काम किया। 1921 का Nobel Prize Physics उन्हें Photoelectric Effect पर उनके काम के लिए मिला।

CV RamanC.V. Raman- सरकारी नौकरी के साथ करते थे रिसर्च
भारत के महान वैज्ञानिक C.V. Raman की कहानी भी दिलचस्प है। उस समय भारत में Scientific Career के मौके बहुत कम थे। इसलिए 1907 में उन्होंने Indian Finance Department में नौकरी शुरू की। लेकिन सरकारी नौकरी ने उनकी Science की दिलचस्पी खत्म नहीं की। नौकरी के साथ-साथ उन्हें जब भी समय मिलता, वे Laboratory में Research करते थे। बाद में Light के scattering पर उनके काम ने हिस्ट्री क्रिएट कर दी और 1930 में उन्हें Physics का Nobel Prize मिला।
Marie Curie- Nobel से पहले बच्चों को पढ़ाती थीं
Marie Curie का शुरुआती जीवन आसान नहीं था। पढ़ाई के साथ परिवार की मदद करने के लिए उन्होंने कम उम्र में बच्चों को Governess और Tutor के रूप में पढ़ाया। Nobel Prize की दुनिया में आने से बहुत पहले वे अपने परिवार और अपनी पढ़ाई के बीच संतुलन बना रही थीं। बाद में Paris जाकर उन्होंने Physics और Mathematics की पढ़ाई की और Pierre Curie के साथ Research शुरू की। 1903 में Physics और 1911 में Chemistry का Nobel जीता।
Rabindranath Tagore- Nobel से पहले संभालते थे परिवार की जमीन-जायदाद
Rabindranath Tagore को भारत का पहला Nobel Prize विजेता माना जाता है। लेकिन Nobel से पहले उनका जीवन सिर्फ कविता और साहित्य तक सीमित नहीं था। वे परिवार की जमीन-जायदाद का काम भी संभालते थे। इस दौरान उनका आम लोगों से संपर्क हुआ और सामाजिक मुद्दों को करीब से समझने का मौका मिला। उन्होंने Shantiniketan में एक अलग तरह का स्कूल भी शुरू किया। 1913 में Gitanjali के लिए उन्हें Literature का Nobel मिला।
Har Gobind Khorana- छोटे गांव से शुरू हुआ सफर
Har Gobind Khorana का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उनके पिता British India के समय Patwari थे। परिवार आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं था, लेकिन पिता बच्चों की पढ़ाई को बहुत महत्व देते थे। Khorana ने आगे की पढ़ाई के लिए भारत से बाहर का सफर किया और धीरे-धीरे Biochemistry और Genetics की दुनिया में अपनी जगह बनाई। 1968 में उन्हें Medicine का Nobel Prize मिला।
Malala Yousafzai- Nobel से पहले स्कूल की छात्रा थीं
Malala Yousafzai की कहानी बाकी Nobel Winners से काफी अलग है। जब उन्होंने लड़कियों की शिक्षा के लिए आवाज उठानी शुरू की, तब वह खुद एक स्कूल की छात्रा थीं। सिर्फ 11 साल की उम्र में उन्होंने BBC Urdu के लिए गुमनाम Diary लिखनी शुरू की, जिसमें Swat Valley में लड़कियों की पढ़ाई पर रोक और Taliban के डर के बारे में बताया। 2012 में उन पर हमला हुआ, लेकिन उन्होंने अपनी आवाज नहीं रोकी। 2014 में उन्हें Nobel Peace Prize मिला।
Mother Teresa- Nobel से पहले स्कूल में पढ़ाती थीं
Mother Teresa जब भारत आईं तो उनका शुरुआती काम गरीबों के बीच नहीं, बल्कि स्कूल में पढ़ाना था। 1931 से 1948 तक उन्होंने Calcutta के St. Mary’s High School में पढ़ाया। लेकिन स्कूल के बाहर गरीबी और लोगों की हालत देखकर उनका जीवन बदलने लगा। बाद में उन्होंने गरीब और बीमार लोगों के बीच काम करने का फैसला किया। 1979 में उन्हें Nobel Peace Prize मिला।
Nelson Mandela- Nobel से पहले Lawyer और कैदी
Nelson Mandela Nobel जीतने से पहले South Africa में Apartheid के खिलाफ लंबे संघर्ष का चेहरा बन चुके थे। उन्होंने Law की पढ़ाई की और देश के शुरुआती Black Lawyers में शामिल हुए। बाद में वे African National Congress के आंदोलन से जुड़े। उन्हें गिरफ्तार किया गया और लंबे समय तक जेल में रखा गया। Robben Island की जेल में बिताए वर्षों ने उन्हें दुनिया भर में Apartheid के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बना दिया। 1993 में उन्हें Nobel Peace Prize मिला।
Karl Deisseroth- Nobel से पहले Doctor और Brain Researcher
2026 के Nobel Prize in Physiology or Medicine के विजेताओं में Karl Deisseroth का नाम शामिल है। Nobel से पहले वे Doctor, Psychiatrist और Researcher के रूप में काम कर रहे थे। Stanford University में वे Bioengineering और Psychiatry से जुड़े रहे। उनके Research ने Brain की Nerve Cells को समझने के लिए एक नई दिशा दी। Karl Deisseroth ने Peter Hegemann और Georg Nagel के साथ Optogenetics से जुड़े काम के लिए 2026 का Medicine Nobel जीता।
Francis Halzen- दशकों तक ‘Ghost Particles’ के पीछे
2026 Physics Nobel Winner Francis Halzen की कहानी भी किसी फिल्म से कम नहीं है। उन्होंने High-Energy Neutrinos को पकड़ने के लिए South Pole में एक विशाल Observatory बनाने का आइडिया दिया था। उन्होंने यह Idea 1988 में रखा था, लेकिन IceCube Observatory को पूरा होने में 2011 तक का समय लगा। इसी काम ने उन्हें Physics का Nobel Prize दिलाया है। South Pole की बर्फ में हजारों Sensors लगाए गए हैं, जो ब्रह्मांड से आने वाले Neutrinos को पकड़ते हैं।