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Moon Phases: आखिर हर रात क्यों बदल जाता है चांद का रूप? जानिए इसके पीछे का दिलचस्प विज्ञान
क्या आपने कभी सोचा है कि चांद हर रात अपना आकार क्यों बदलता है? चांद की अलग-अलग कलाएं, सूरज की रोशनी और पृथ्वी के चारों ओर इसके घूमने की प्रक्रिया इसके पीछे की मुख्य वजह हैं। आइए आसान भाषा में इसका पूरा विज्ञान समझते हैं।

आसमान में चांद का जादू
हम हर रात आसमान में एक दिलचस्प नजारा देखते हैं। चांद का आकार कभी एक जैसा नहीं रहता। सात या दस दिन में इसका रूप पूरी तरह बदल जाता है।
कभी यह पूरा गोल और चमकदार दिखता है, तो कभी घटकर आधा रह जाता है। आखिर चांद के इस तरह बदलने के पीछे कौन सा विज्ञान काम करता है? आइए जानते हैं कि चांद हर रात अपना रूप क्यों बदलता है।

सूरज की रोशनी है असली वजह
असल बात यह है कि चांद के पास अपनी कोई रोशनी नहीं होती। सूरज की किरणें जब चांद की सतह पर पड़ती हैं, तो वह रोशनी पृथ्वी की तरफ रिफ्लेक्ट होती है। इसी वजह से हम चांद को देख पाते हैं।
चांद हमारी पृथ्वी के चक्कर लगाता है। पृथ्वी का एक पूरा चक्कर लगाने में इसे करीब 27.3 दिन लगते हैं। लेकिन, एक अमावस्या से दूसरी अमावस्या तक का सफर पूरा करने में इसे 29.5 दिन का समय लगता है।
चांद की अलग-अलग कलाएं और विज्ञान
चांद जब सूरज और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तो रोशनी वाला हिस्सा हमें नहीं दिखता। इसे हम अमावस्या कहते हैं। इस दिन चांद बिल्कुल नजर नहीं आता। जब यह थोड़ा आगे बढ़ता है, तो एक पतले आकार में दिखता है, जिसे 'वैक्सिंग क्रीसेंट' (Waxing crescent) कहते हैं। सफर के चौथे हिस्से में पहुंचने पर यह आधा दिखता है, जिसे 'फर्स्ट क्वार्टर' (First quarter) कहते हैं। जब पृथ्वी, सूरज और चांद एक सीध में आते हैं, तब पूर्णिमा (Full moon) होती है। इस रात चांद पूरा गोल और सबसे ज्यादा चमकदार दिखता है।
फिर से शुरू होता है सफर
पूर्णिमा के बाद चांद का चमकने वाला हिस्सा धीरे-धीरे कम होने लगता है। इस प्रक्रिया को 'वेनिंग मून' (Waning moon) कहा जाता है। इस चरण में चांद अपने सफर का दूसरा हिस्सा पूरा करता है। इसका आकार लगातार बदलता रहता है और अंत में यह वापस अपनी शुरुआती जगह पर पहुंच जाता है। यह फिर से सूरज और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इस समय सूरज की रोशनी हम तक नहीं पहुंच पाती और फिर से अमावस्या आ जाती है। चांद का यह सफर ऐसे ही लगातार चलता रहता है।