Cyclone Arnab: चक्रवात अर्नब का नाम किसने रखा, इसका मतलब क्या है और तूफानों के नाम कैसे तय किए जाते हैं? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
Cyclone Arnab Meaning: बंगाल की खाड़ी के पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्व में बना गहरा दबाव अब 'चक्रवात अर्नब' में बदल गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 26 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। यह तूफान आंध्र प्रदेश तट के करीब से गुजर सकता है और एक बेहद खतरनाक चक्रवात का रूप ले सकता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन तूफानों के नाम कैसे रखे जाते हैं, अर्नब का मतलब क्या है और यह नाम कौन तय करता है?
अर्नब नाम किसने रखा?
अर्नब नाम बांग्लादेश ने दिया है। यह नाम उत्तरी हिंद महासागर (जिसमें बंगाल की खाड़ी और अरब सागर शामिल हैं) में आने वाले तूफानों की आधिकारिक लिस्ट में शामिल है। इस लिस्ट को अप्रैल 2020 में अपनाया गया था। इसमें 13 देशों के दिए गए कुल 169 नाम हैं। हर देश ने 13 नाम दिए हैं। इन देशों में बांग्लादेश, भारत, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यमन शामिल हैं।

जैसे ही कोई तूफान चक्रवात की कैटेगरी में आता है, तो पहले से तय लिस्ट के हिसाब से उसे नाम दे दिया जाता है। लिस्ट में किसी देश का नाम होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि तूफान उसी देश में आएगा या वहीं टकराएगा।
अर्नब नाम का मतलब क्या है?
बंगाली भाषा में अर्नब का मतलब समुद्र या महासागर होता है। IMD की आधिकारिक लिस्ट में इस नाम को मंजूरी दी गई है और इसका उच्चारण "ओर्नब" (Ornab) बताया गया है। हालांकि, इसका कोई औपचारिक विवरण नहीं दिया गया है। यह नाम एक साझा क्षेत्रीय सिस्टम का हिस्सा है, जहां देश तूफान आने से पहले ही अपने सुझाए गए नाम लिस्ट में दे देते हैं।
भारत में चक्रवातों का नाम कौन रखता है?
नई दिल्ली में मौजूद IMD का क्षेत्रीय विशेष मौसम विज्ञान केंद्र (RSMC) इन तूफानों का नाम तय करता है। जब उत्तरी हिंद महासागर (बंगाल की खाड़ी और अरब सागर) में उठने वाला तूफान एक तय स्पीड पार कर लेता है, तब उसे नाम दिया जाता है।
यह केंद्र उन नामों का इस्तेमाल करता है जो 13 देशों ने मिलकर तय किए हैं। नाम इस बात पर निर्भर नहीं करता कि तूफान कहां टकराएगा, बल्कि यह लिस्ट के क्रम के हिसाब से चुना जाता है। इसलिए, भले ही नाम बांग्लादेश ने दिया हो, लेकिन तूफान भारत के तट पर टकरा सकता है। नाम सिर्फ तूफान की पहचान के लिए होता है। मौसम विज्ञानी इसके रास्ते और टकराने की जगह का अलग से अनुमान लगाते हैं।
हम तूफानों को नाम क्यों देते हैं?
नाम रखने से मौसम विभागों, रेस्क्यू टीमों, मीडिया और आम लोगों को किसी खास तूफान के बारे में बात करने और उसे पहचानने में आसानी होती है। इससे कोई कन्फ्यूजन नहीं होता, खासकर तब जब एक ही समय में कई तूफान एक्टिव हों। इसके अलावा, चेतावनी जारी करने और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने में भी मदद मिलती है।
उत्तरी हिंद महासागर में तूफानों के नाम रखने की शुरुआत कब हुई?
उत्तरी हिंद महासागर में तूफानों का नाम रखने का सिलसिला सितंबर 2004 में शुरू हुआ था। तब 8 देशों ने मिलकर नाम दिए थे। बाद में इस सिस्टम को और बड़ा किया गया। अप्रैल 2020 में जारी नई लिस्ट में 5 और देशों को शामिल किया गया, जिससे इनकी संख्या 13 हो गई। हर देश ने 13 नाम दिए, इसलिए मौजूदा लिस्ट में कुल 169 नाम हैं। हर नए तूफान के लिए नया नाम सोचने के बजाय, लिस्ट में मौजूद अगले नाम का इस्तेमाल किया जाता है।

क्या तूफान के नाम से पता चलता है कि वह कहां टकराएगा?
बिल्कुल नहीं। तूफान के नाम से यह पता नहीं चलता कि वह कहां जाएगा, कितना ताकतवर होगा या कहां टकराएगा। यह सिर्फ एक पहचान है। जैसे, अर्नब नाम बांग्लादेश ने दिया है, लेकिन इसके आंध्र प्रदेश तट की ओर जाने का अनुमान है। तूफान का रास्ता, उसकी ताकत और टकराने की जगह वहां के मौसम और समुद्र की स्थिति पर निर्भर करती है, न कि उस देश पर जिसने नाम दिया है।
