
Pheasant Island why Administration Changes: एक ऐसा द्वीप, जहां न कोई स्थायी आबादी है और न कोई होटल, लेकिन हर छह महीने में प्रशासनिक नियंत्रण बदल जाता है। 1659 की एक ऐतिहासिक संधि से जुड़ी इस जगह की कहानी आज भी उतनी ही दिलचस्प है। जानिए इस अनोखे आईलैंड की पूरी कहानी और क्यों हर 6 महीने में बदल जाती है इसकी सत्ता।
फ्रांस और स्पेन की सीमा के बीच बहने वाली बिदासोआ नदी में एक बेहद छोटा-सा द्वीप है फेजेंट आइलैंड (Pheasant Island)। इसका क्षेत्रफल करीब 0.0068 वर्ग किलोमीटर होने के बावजूद यह जगह अपने अनोखे प्रशासनिक इंतजाम की वजह से खास है।
यहां हर साल दो बार प्रशासन बदलता है। 1 फरवरी से 31 जुलाई तक स्पेन प्रशासन संभालता है, जबकि 1 अगस्त से 31 जनवरी तक जिम्मेदारी फ्रांस के पास रहती है। यानी छह महीने बाद द्वीप की देखरेख दूसरे देश को सौंप दी जाती है। हालांकि, इसे यह कहना सही नहीं होगा कि द्वीप हर छह महीने में एक देश से निकलकर दूसरे देश का हिस्सा बन जाता है। इसकी संप्रभुता फ्रांस और स्पेन के बीच साझा है। इस तरह की व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय कानून में कंडोमिनियम (Condominium) कहा जाता है।
फेजेंट आइलैंड की कहानी सीधे यूरोप के इतिहास के एक बड़े अध्याय से जुड़ी है। 17वीं सदी में फ्रांस और स्पेन के बीच लंबे समय तक युद्ध चला। शांति की कोशिशों के तहत दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने इसी द्वीप पर बातचीत की। इन वार्ताओं का नतीजा 7 नवंबर 1659 को पाइरेनीज की संधि (Treaty of the Pyrenees) के रूप में सामने आया। इस समझौते ने फ्रांस-स्पेन युद्ध को समाप्त करने में अहम भूमिका निभाई। इसी वजह से फेजेंट आइलैंड को कॉन्फ्रेंस आइलैंड के नाम से भी जाना जाता है।
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इस संधि की एक और बड़ी ऐतिहासिक कड़ी थी फ्रांस के राजा लुई चौदहवें (Louis XIV) और स्पेन की राजकुमारी मारिया थेरेसा (Maria Theresa) का विवाह। मारिया थेरेसा, स्पेन के राजा फिलिप चतुर्थ (Philip IV) की बेटी थीं। दोनों के बीच तय हुआ यह शाही गठबंधन भी पाइरेनीज की संधि का हिस्सा था।
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1659 के समझौते के बाद द्वीप का इतिहास फ्रांस और स्पेन की साझा संप्रभुता से जुड़ गया, लेकिन आज जिस तरह छह-छह महीने में प्रशासन बदलता है, उसकी औपचारिक व्यवस्था बाद में बनी। 1856 के बायोन की संधि (Treaty of Bayonne) ने दोनों देशों के बीच इस प्रशासनिक व्यवस्था को स्पष्ट रूप दिया।
आज फेजेंट आइलैंड पर कोई स्थायी आबादी नहीं रहती। आम पर्यटकों के लिए यहां पहुंच भी सामान्य तौर पर आसान नहीं है। खास मौकों, जैसे औपचारिक प्रशासनिक हस्तांतरण के दौरान, इसकी चर्चा दुनिया भर में होती है। यही वजह है कि नदी के बीच मौजूद यह छोटा-सा निर्जन भूखंड फ्रांस और स्पेन के साझा इतिहास, कूटनीति और शांतिपूर्ण सीमा-व्यवस्था का अनोखा उदाहरण बन चुका है।