रक्षाबंधन पर राखी बांधने से पहले बहने क्यों जलाती हैं दीपक? जानें अग्नि और रक्षा सूत्र का कनेक्शन

Published : Aug 20, 2026, 07:30 AM IST
Raksha Bandhan

सार

Raksha Bandhan Diya Significance: रक्षाबंधन पर राखी बांधने से पहले बहनें दीपक क्यों जलाती हैं? जानें राखी की थाली में दीप जलाने का महत्व और अग्नि-रक्षा सूत्र का कनेक्शन।

Raksha Bandhan Rituals: रक्षाबंधन के दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है। उसके सुख, स्वास्थ्य, लंबी उम्र और समृद्धि के लिए भगवान से दुआ मांगती है। भाई भी बहन की रक्षा और हर मुश्किल में उसका साथ देने का वादा करता है। राखी बांधने की यह परंपरा देखने में भले ही सिंपल लगती हो, लेकिन इसके साथ कई छोटी-छोटी परंपराएं जुड़ी हुई हैं। इनमें से एक है राखी बांधने से पहले दीपक जलाना। राखी की थाली में दीपक रखा जाता है। बहन पहले भाई की आरती करती है और फिर उसके माथे पर तिलक लगाकर राखी बांधती है। सवाल है दीपक क्यों जलाया जाता है? अग्नि और रक्षा सूत्र का क्या कनेक्शन है?

दीपक को शुभ क्यों माना जाता है?

दीपक प्रकाश और शुभता का प्रतीक है। पूजा-पाठ की शुरुआत दीप जलाकर की जाती है। प्रकाश अंधकार को दूर करता है और जीवन में पॉजिटिविटी लाता है। दीपक जलाने का एक मकसद यह है कि पूजा या शुभ काम भगवान की मौजूदगी और आशीर्वाद के साथ स्टार्ट हो। इसलिए शादी, गृह प्रवेश, व्रत, त्योहार और दूसरे धार्मिक मौकों पर दीपक जलाया जाता है। रक्षा बंधन में भी दीपक का यही महत्व है।

राखी की थाली में दीपक का क्या काम?

राखी की थाली में आमतौर पर रोली, अक्षत, मिठाई, राखी और दीपक रखा जाता है। बहन भाई को तिलक लगाने और राखी बांधने से पहले या बाद में उसकी आरती करती है। आरती में दीपक को भाई के सामने घुमाया जाता है। इसे नजर, नकारात्मकता और अशुभ प्रभाव से भाई की रक्षा के लिए बहन भगवान से कामना करती है। यानी राखी केवल कलाई पर धागा बांधने की रस्म नहीं है। उसके साथ आरती और दीपक जोड़ने से यह पूरा अनुष्ठान भाई के मंगल और सुरक्षा की प्रार्थना का रूप ले लेता है।

अग्नि और रक्षा सूत्र का क्या संबंध है?

रक्षा सूत्र का अर्थ ही है- रक्षा का सूत्र या धागा। किसी शुभ काम के दौरान कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा है। इसे ईश्वर की कृपा और सुरक्षा की कामना से जोड़ा जाता है। वहीं अग्नि को हिंदू धर्म में पवित्र माना गया है। वैदिक परंपरा में अग्नि देवताओं तक यज्ञ की आहुति पहुंचाने वाले माध्यम माने गए हैं। इसी वजह से अग्नि को शुद्धता, ऊर्जा और पवित्रता से जोड़ा जाता है। रक्षा बंधन में दीपक की लौ इसी पवित्र अग्नि का छोटा और प्रतीकात्मक रूप है। जब राखी बांधने से पहले दीप जलाया जाता है तो उसका मकसद होता है- यह रक्षा (राखी) का संकल्प पवित्र प्रकाश और शुभ ऊर्जा के सामने लिया जा रहा है।

आरती में दीपक क्यों घुमाया जाता है?

आरती का सामान्य अर्थ किसी व्यक्ति या देवता के प्रति श्रद्धा और मंगलकामना व्यक्त करना है। जब बहन भाई की आरती करती है तो उसके पीछे यह भाव होता है कि मेरा भाई स्वस्थ रहे, उसके जीवन से संकट दूर हों और वह हमेशा खुश रहे। दीपक की लौ को सामने घुमाना इसी शुभकामना का पार्ट है। आरती के बाद भाई के माथे पर तिलक लगाया जाता है और फिर राखी बांधी जाती है।

रक्षाबंधन का असली भाव क्या है?

रक्षा बंधन की सबसे बड़ी खूबसूरती किसी एक रस्म में नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते में है। राखी का धागा इस रिश्ते को याद दिलाता है और दीपक उस शुभ भावना को प्रकाश का प्रतीक देता है। इसलिए रक्षा बंधन पर दीपक जलाने की परंपरा को आस्था और परंपरा के रूप में देखा जा सकता है।

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