
Lord Shiva Worship Rules: सावन मास इस बार 30 जुलाई से शुरू हो चुका है, जो 28 अगस्त तक रहेगा। इस महीने में शिव पूजा का विशेष महत्व है। शिवलिंग पूजा से जुड़े कुछ जरूरी नियम धर्म ग्रंथों में बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करना सभी के लिए जरूरी माना गया है। अक्सर लोगों के मन में ये सवाल आता है कि क्या महिलाएं शिवलिंग को छू सकती हैं? इसे लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. नलिन शर्मा से जानिए इस विषय में धर्म और परंपराओं का क्या मत है…
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव समस्त सृष्टि के आराध्य हैं और उनकी भक्ति करने का अधिकार सभी को है। अधिकांश शिव मंदिरों में महिलाएं शिवलिंग पर जल, दूध और बिल्वपत्र अर्पित करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं शिवलिंग का स्पर्श कर पूजा भी करती हैं। धर्म ग्रंथों में ऐसा कोई स्पष्ट निषेध नहीं मिलता, जिसमें महिलाओं को शिवलिंग के स्पर्श के लिए मना किया गया हो।
धर्म ग्रंथों में 12 ज्योतिर्लिंगों का वर्णन मिलता है। इनमे से एक है रामेश्वरम जो तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरं नामक स्थान पर स्थित है। मान्यता है कि इस शिवलिंग का निर्माण और स्थापना त्रेतायुग में स्वयं देवी सीता ने की थी। एक अन्य ज्योतिर्लिंग की स्थापना भी महिला द्वारा की गई मानी जाती है, ये है घुश्मेश्वर। ये ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के औरंगाबाद के निकट दौलताबाद में स्थित है। घुश्मा नाम की भगवान शिव की परम भक्त द्वारा ये ज्योतिर्लिंग स्थापित किया गया था।
भारत में कुछ प्राचीन मंदिरों में शिवलिंग स्पर्श को लेकर अलग नियम बनाए गए हैं। कई मंदिरों में केवल पुजारी ही गर्भगृह में जाकर शिवलिंग को स्पर्श करते हैं। ऐसे नियम केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि आम पुरुष भक्तों पर भी लागू होते हैं। ये नियम वहां के विद्वानों द्वारा पूर्व समय में निश्चित किए गए होते हैं जिनका पालन सभी बहुत ही श्रद्धा से करते हैं।
इसे लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं हालांकि किसी भी ग्रंथ में शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल को न पीने के बारे में नहीं बताया। वर्तमान में लोग शिवलिंग पर चढ़ाया जल विशेष कामना पूर्ति के लिए पीते हैं। अनेक विद्वान भी ऐसा करने के लिए कहते हैं। मान्यता है कि शिवलिंग पर चढ़ाया जल पीने से जीवन में चल रही परेशानियां स्वत: ही दूर हो सकती हैं।
1. शिवलिंग की पूजा करते समय हल्दी, कुमकुम आदि चीजें नहीं चढ़ानी चाहिए क्योंकि ये चीजें स्त्री श्रंगार के काम आती है।
2. शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं करना चाहिए क्योंकि जलाधारी को लांघा नहीं जाता।
3. शिवलिंग पर कभी भी शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए और न ही कभी तांबे के बर्तन से दूध चढ़ाना चाहिए।
4. पूजा करते समय शिवलिंग के ऊपरी हिस्से को स्पर्श नहीं करना चाहिए, चाहे स्त्री हो या पुरुष।
5. शिवलिंग की पूजा करते समय मुंह दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए।