शेषनाग से वासुकी तक...हिंदू धर्म में इतने नाग क्यों हैं? जानें इन नागों की रहस्यमयी कहानी

Published : Aug 17, 2026, 04:00 PM IST
Sheshnag vs Vasuki

सार

Sheshnag vs Vasuki: शेषनाग, वासुकी, तक्षक और कर्कोटक, आखिर कौन हैं ये रहस्यमयी नाग, जिनकी कहानियां देवताओं, राजाओं और महाभारत से जुड़ी हैं? जानिए नागों के अनसुने रहस्य।

Hindu Mythology Nagas: हिंदू धर्म में नागों का नाम आते ही सबसे पहले शेषनाग या अनंत नाग की तस्वीर सामने आती है। भगवान विष्णु को शेषनाग की शय्या पर विराजमान दिखाया जाता है। समुद्र मंथन में वासुकी नाग का नाम आता है। महाभारत में तक्षक राजा परीक्षित की मृत्यु से जुड़ा है, जबकि कर्कोटक की कहानी राजा नल से जुड़ी है। हिंदू धर्म में “नाग” सिर्फ एक सांप का नाम नहीं है। धार्मिक ग्रंथों में कई अलग-अलग नाग पात्र हैं, जिनकी अपनी पहचान, कहानी और भूमिका है।

नाग क्या है?

पुराणों और महाकाव्यों में नाग शब्द का इस्तेमाल सिर्फ सामान्य सांप के लिए नहीं, बल्कि एक दिव्य या अर्ध-दिव्य सर्प जाति के लिए किया गया है। कश्यप ऋषि और कद्रू से नागों की उत्पत्ति की कथा मिलती है। धार्मिक ग्रंथों में नागों का संबंध पाताल या नागलोक से जोड़ा गया और कई नागों को राजा या शक्तिशाली दिव्य प्राणी माना गया। इसी नाग परंपरा में शेष, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म आदि कई नाम आते हैं।

1. शेषनाग यानी अनंत- भगवान विष्णु की शय्या

शेषनाग को कई परंपराओं में अनंत या अनंत शेष भी कहा जाता है। यही वह नाग हैं जिनके ऊपर क्षीरसागर में भगवान विष्णु के विश्राम का वर्णन मिलता है। विष्णु पुराण में शेष को अनंत नाम से भी संबोधित किया गया है और उनके हजार फनों का वर्णन मिलता है। शेष को ब्रह्मांडीय व्यवस्था से भी जोड़ा गया है। शेष का अर्थ ही “जो बचा हुआ है” से जोड़ा जाता है, जबकि अनंत का अर्थ है जिसका अंत न हो। इसलिए शेषनाग को केवल सांप के रूप में नहीं, बल्कि अनंतता और स्थायित्व के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।

शेषनाग की सबसे बड़ी खासियत क्या है?

उनकी पहचान भगवान विष्णु के परम सेवक के रूप में होती है। वैष्णव परंपरा में विष्णु की शेषशायी छवि बहुत महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि जब लोग “नागराज” या “सबसे बड़े नाग” की बात करते हैं तो अक्सर शेषनाग का नाम सबसे पहले लेते हैं।

2. वासुकी- समुद्र मंथन की रस्सी बने नाग

अब आते हैं वासुकी पर। यही वह नाग हैं जिनका नाम समुद्र मंथन की कथा में सबसे ज्यादा चर्चित है। देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन के लिए मंदराचल पर्वत को मथनी और वासुकी को रस्सी बनाया था। इस तरह वासुकी का रोल सिर्फ नागराज की नहीं, बल्कि एक बड़े महत्वपूर्ण मददगार की भी है। महाभारत में वासुकी को प्रमुख नागों में गिना गया है और उन्हें नागों का राजा कहा गया। उनकी एक और महत्वपूर्ण कथा जनमेजय के सर्पसत्र से जुड़ी है। नागों के विनाश की आशंका को देखते हुए वासुकी ने अपनी बहन की शादी ऋषि जरत्कारु से कराया, जिससे आस्तीक का जन्म हुआ। आगे चलकर आस्तीक ने सर्पयज्ञ को रुकवाकर नागों को बचाया।

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3. तक्षक - महाभारत का सबसे चर्चित नाग

तक्षक की कहानी शेष और वासुकी से अलग है। महाभारत में तक्षक का संबंध राजा परीक्षित से है। कथा के अनुसार- तक्षक के डसने से परीक्षित की मृत्यु होती है। इसके बाद उनके बेटे जनमेजय ने नागों के विनाश के लिए विशाल सर्पसत्र शुरू कराया। इस यज्ञ में बड़ी संख्या में नाग खिंचकर अग्नि में गिरने लगे। महाभारत के आदि पर्व में तक्षक के वंश से जुड़े कई नागों के नाम भी दिए गए हैं। आखिरकार आस्तीक के हस्तक्षेप से यह यज्ञ रुकता है।

4. कर्कोटक- राजा नल की जिंदगी बदलने वाला नाग

कर्कोटक की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। उनका संबंध राजा नल की कथा से है। महाभारत के वन पर्व में कर्कोटक का प्रसंग आता है। कथा के अनुसार- कर्कोटक एक वन में फंस गए। राजा नल ने उन्हें बचाया। इसके बाद कर्कोटक ने नल को डसा और उनके शरीर का रूप बदल गया। पहली नजर में यह घटना किसी श्राप जैसी लगती है, लेकिन कथा में कर्कोटक के डंसने का उद्देश्य नल की आगे की यात्रा और उनके शत्रु से जुड़े प्रसंगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना था। इसलिए कर्कोटक को सिर्फ “विषैला नाग” समझना उनकी पूरी कथा को छोटा कर देना होगा।

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5. अनंत और शेष- क्या दोनों अलग हैं?

यहां सबसे ज्यादा भ्रम होता है। कई हिंदू परंपराओं में अनंत और शेष एक ही नाग के अलग नाम माने जाते हैं। यानी “अनंत शेष” या “अनंतनाग” कहना इसी परंपरा का हिस्सा है। विष्णु पुराण में शेष को अनंत नाम से संबोधित किया गया है। लेकिन शेष और वासुकी को एक ही नाग मानना सही नहीं है। महाभारत में दोनों के नाम अलग-अलग दिए गए हैं, वहां शेष पहले और वासुकी उसके बाद जन्मे प्रमुख नागों में गिने जाते हैं।

शेषनाग और वासुकी में क्या अंतर है?

नागसबसे प्रसिद्ध संबंधमुख्य पहचान
शेष/अनंतभगवान विष्णुविष्णु की शय्या, अनंतता
वासुकी समुद्र मंथनमंदराचल की रस्सी, नागराज
तक्षकराजा परीक्षितसर्पदंश और जनमेजय का सर्पयज्ञ
कर्कोटकराजा नलनल की कथा और रूप परिवर्तन
अन्य नाग अलग-अलग कथाएंक्षेत्र और ग्रंथ के अनुसार अलग भूमिका

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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